सोमवार, 14 जनवरी 2019

मकर संक्रांति ..... संस्कृति निष्ठा का महा पर्व 1

यह सृष्टि का सूर्य पर्व है। यह कोटि -कोटि ब्रह्मांडो में से इस पृश्नि ब्रह्माण्ड के द्वितीय मन्वन्तर में वाराहकल्प के कलियुग के काली प्रथम चरण में प्रति वर्ष आने वाला वह पर्व है जो हमें जीवन के सिद्धांतो और उद्देश्यों का स्मरण  कराता है। पर्व शब्द का सामान्य लोक अर्थ प्रचलन में किसी भी उत्सव या त्योहार से जुड़ा है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। पर्व वस्तुतः सृष्टि के पड़ाव का द्योतक है। सृष्टि का कोई भी क्रम जब एक चक्र पूर्ण करता है वही उसका पर्व होता है। इसी आधार पर सुरमंडल की यात्रा के आधार पर वर्ष की प्रत्येक तिथि पर्व के रूप में आती है। इनमे से वे तिथियां जिनको लोकमानस या जीवन में किसी अनुष्ठान या उत्सव से जोड़ा गया है , वे उस उत्सव विशेष के पर्व के रूप में स्थापित है। इस प्रकार मानव जीवन के सभी उत्सव और त्यौहार पर्व के रूप में ही आते है। यह किसी तिथि विशेष के यात्रा का एक पड़ाव है। यह ठीक वैसे ही है जैसे बांस की वृद्धि होती है। एक पोर से दूसरा पोर , फिर तीसरा  और इसी तरह वृद्धि का क्रम चलता है और बांस लंबा होता चलता है। मानव जीवन की यात्रा भी इसी प्रकार प्रत्येक पर्व पर आगे बढती रहती है। किसी भी तंत्र  में किसी भी संधिस्थल को पर्व ही संज्ञा दी जाती है। यह उत्सव हो सकता है। जीवन हो सकता है। कोई कार्य हो सकता है। ग्रन्थ हो सकता है। शरीर के अंग हो सकते है।
वास्तविक रूप में जब भी भारतीय पर्व परंपरा सूर्य से जुडती है तो बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध अपनी श्रुति परम्पपरा यानी वेदों से सम्बन्ध स्थापित होता है। लोक प्रचलन में हम जिस गायत्री मन्त्र को जानते है वह वास्तव में सूर्य का ही मंत्र है। गायत्री मंत्र में - तत्सवितुर्वरेण्यं - में जिस सविता देवता की आराधना हम करते है वह यही सूर्य देवता है। यहाँ किसी गायत्री नाम की देवी  भ्रम नहीं रखना चाहिए क्योकि मंत्र में हम -  भर्गो देवस्य - की पूजा करते है न कि किसी देवी की।  यह सविता देवता यही है जो प्रभामंडल के केंद्र में नारायण के रूप में विद्यमान है जिनको सूर्यनारायण की संज्ञा दी जाती है। यही सूर्य नारायण , यानी नारायण , यानी भगवान् विष्णु है जिनकी आराधना गायत्री मंत्र के माध्यम से की जाती है। इसी नारायण से यह सृष्टि है , और संक्रांति इसी सृष्टि का एक पर्व यानी यात्रा का एक पड़ाव होता है।
भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष जनवरी के महीने में समस्त भारत में मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है, जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है। परम्परा से यह विश्वास किया जाता है कि इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। यह वैदिक उत्सव है। इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। गुड़–तिल, रेवड़ी, गजक का प्रसाद बाँटा जाता है। इस त्यौहार का सम्बन्ध प्रकृति, ऋतु परिवर्तन और कृषि से है। ये तीनों चीज़ें ही जीवन का आधार हैं। प्रकृति के कारक के तौर पर इस पर्व में सूर्य देव को पूजा जाता है, जिन्हें शास्त्रों में भौतिक एवं अभौतिक तत्वों की आत्मा कहा गया है। इन्हीं की स्थिति के अनुसार ऋतु परिवर्तन होता है और धरती अनाज उत्पन्न करती है, जिससे जीव समुदाय का भरण-पोषण होता है। यह एक अति महत्त्वपूर्ण धार्मिक कृत्य एवं उत्सव है। लगभग 80 वर्ष पूर्व उन दिनों के पंचांगों के अनुसार, यह 12वीं या 13वीं जनवरी को पड़ती थी, किंतु अब विषुवतों के अग्रगमन (अयनचलन) के कारण 13वीं या 14वीं जनवरी को पड़ा करती है। वर्ष 2016 में मकर संक्रान्ति '15 जनवरी' को मनाई गयी । इस वर्ष फिर 14 जनवरी को खिचड़ी मनाई जानी है।  इस दिन भगवान सूर्य की पूजा करने का विशेष विधान है। सनातन  शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति से देवताओं का दिन आरंभ होता है जो कि आषाढ़ मास तक रहता है। इसी दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं। जबकि उत्तर भारत में यह खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व की एक कथा गुरु गोरक्षनाथ और माता ज्वालादेवी से भी जुडी है। इस दिन गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में प्रथम खिचड़ी नेपाल के महाराजा की तरफ से चढ़ाई जाती है। ऐसा परंपरा रूप में सैकड़ो वर्षो से होता आ रहा है।

 ब्राह्मण एवं औपनिषदिक ग्रंथों में उत्तरायण के छ: मासों का उल्लेख है में 'अयन' शब्द आया है, जिसका अर्थ है 'मार्ग' या 'स्थल। गृह्यसूत्रों में 'उदगयन' उत्तरायण का ही द्योतक है जहाँ स्पष्ट रूप से उत्तरायण आदि कालों में संस्कारों के करने की विधि वर्णित है। किंतु प्राचीन श्रौत, गृह्य एवं धर्म सूत्रों में राशियों का उल्लेख नहीं है, उनमें केवल नक्षत्रों के संबंध में कालों का उल्लेख है।...….अगली पोस्ट में जारी (क्रांति-दूत से साभार)

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