शनिवार, 4 अक्टूबर 2025

समाचार का व्रत रखिए

आजकल नकारात्मक समाचार ज्यादा बिकते हैं। हमारे समाज में ज्यादातर लोग एक प्रसिद्ध इन्सान के जुर्म का मुकदमा देखना किसी वास्तव में महान इन्सान की जीवनी देखने से ज्यादा पसन्द करते हैं। एक समाचार पत्र जिसकी मुख्य खबर किसी नवीनतम दुःखद घटना का खुलासा कर रही है उसकी प्रतियां उस खबर से जो एक नवीनतम वैज्ञानिक खोज के बारे में बता रही है, से ज्यादा बिकेंगी। 

असली परेशानी यह है कि नकारात्मक खबरें सुनने और देखने का नशा बड़ी आसानी से हो जाता है। हम लोगों में से अधिकांश के दिन की शुरुआत सिर्फ अपराध, दुर्घटनाओं और देर रात को हुई सनसनीखेज खबरों से होती है जिनसे किसी चरित्र निर्माण की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

यद्यपि कई समाचार पत्रों के जरिए अत्यन्त उत्तम किस्म की सूचनाएं और खबरें भी मिलती हैं तथा अनेक टी.वी. कार्यक्रमों से भी बहुत सी बुद्धिमत्ता की बाते सीखी जा सकती हैं किंतु यह लाभ अत्यंत अल्प है। सत्य तो ये है कि हम जिस समाचार पर आज अपने मस्तिष्क का ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं उसका चुनाव करने की आवश्यकता है। सुबह इससे पहले कि हम सुबह का अखबार पढ़े हमारे दिमाग में एक उद्देश्य होना चाहिए। इसको हम सिर्फ समय काटने का साधन नहीं बल्कि सूचना साधन की तरह उपयोग करें जो हमें ज्यादासमझदार बनाएगा।

स्वयं को समाचार के नशे से दूर करने के लिए हम सात दिन के लिए समाचार के व्रत का अनुसरण कर के देखें और कसम खाएँ कि हम समाचार पत्र की एक भी नकारात्मक कहानी नही पढ़ेंगे या एक भी नकारात्मक खबर टेलीविजन पर नहीं देखेंगे। 

हम लोग दो बातों पर ध्यान दें। पहली चीज़ वास्तव में सूचनाओं का ज्ञान न होने से हमें किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। हम इसके बाद भी उन अत्यधिक महत्वपूर्ण खबरों के बारे में अपने दफ्तर और घर में लोगों से मिलकर जान ही जाएंगे। दूसरी चीज़ हम बहुत शान्त और निश्छल महसूस करेंगे। इसके अलावा सात दिन का समाचार का उपवास एक और फायदा देता है वह है अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए समय का लाभ।  💐शुभम भवतु

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