शुक्रवार, 24 सितंबर 2021

वन्दे मातरम...!! मातृ आराधना के 75 दिन

वन्दे मातरम...💐💐☺️


स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ पर भारत माता को समर्पित यह घनाक्षरी श्रृंखला आगामी 75 दिनों तक चलेगी। इसमें सर्वप्रथम भारत के महान क्रांतिकारियों व स्वतंत्रता सेनानियों के स्मरण कर के सभी राज्यों तथा उसके बाद प्रमुख धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों का वर्णन एक घनाक्षरी में करने का प्रयास करेंगे। आशा है हमारे सभी मित्र बंधुओं को यह श्रृंखला अच्छी लगेगी। 

💐वन्दे मातरम-जय हिंद💐

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वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

पहला दिन-19.8.21गुरुवार

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1.(क)देव भूमि भारत को 

नमन हैं कोटि-कोटि

ज्ञान ध्यान भक्ति दया 

प्रेरणा की खान है।


दस अवतारों से ये 

पावनी धरा है सजी,

सारी सृष्टि हेतु यहां 

मंगल विधान है।।


सत्य न्याय प्रेम का 

आशीष है सभी के लिए,

देव ऋषि मुनियों ने

किया गुण गान है।


हिमगिरि का मुकुट

गंगा यमुना का हार

चरण पखारे सिंधु

मेरा हिंदुस्तान है।।


1(ख).कितने अनाम इस

देश पे शहीद हुए,

कितनों का स्वर्ण अक्षरों पे

लिखा नाम है।


कुछ ने तो देश को 

स्वतंत्र देखा भी है किंतु

कुछ ने जवानी ये

लुटाई निष्काम है।।


आज जो ये साँस हम

ले रहे स्वतंत्रता की,

कितनी साँसों का इस हेतु

दिया दाम है।


सारे वीर बलि-दानियों का

है ऋणी ये देश,

उनको अनंत कोटि

नमन प्रणाम है।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

दूसरा दिन-20.8.21शुक्रवार

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2. क्रांति का विचार 

मुक्ति चाहत का जोश 

जिस वीर के हृदय में आके 

गहरा समाया था। 


शासक विदेशी क्रूर 

आए थे हमारे देश 

किंतु जिसने इन्हें 

न शीश पे बिठाया था।


शांति का संदेश बनी 

पहली चलाई गोली,

प्राण दंड देके जिसे 

फांसी पे झुलाया था।


सत्तावनक्रांति का 

प्रणेता वीर मंगल था,

शान थी अनोखी 

मां को रक्त से सजाया था।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

तीसरा दिन-21.8.21 शनिवार

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3. पति का निधन हुआ

पुत्र था अबोध, 

क्रूर-शासकों ने राज,

धोखादेकर छिनाया था।


जीते जी ज़मीन पे

फिरंगी को न आने दूंगी

ऐसा ही कठोर प्रण

मन में उठाया था।।


दांतों में लगाम और

पीठ पे था पुत्र

दोनों हाथों में खडग

बिजली सा लहराया था।


झांसी वाली रानी

महा शक्ति की मिसाल बनी

देश शत्रुओं को

घुटनों तले झुकाया था।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

चौथा दिन-22.8.21रविवार

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4. खुदीराम औ प्रफुल्ल 

ने तो अल्प आयु में ही 

मातृ-बलिवेदी पे 

मस्तक चढ़ाया था 


बिस्मिल रोशन अशफाक 

ने काकोरी हेतु 

मां के चरणों में निज 

जीवन लुटाया था।। 


सुखदेव राजगुरु भगत 

क्यों फांसी चढ़े ??

उनकी  'ललक',

कोई समझ ना पाया था। 


धन्य है आजाद 

रण बांकुरा अनोखा 

जिसे जीते जी तो कोई 

हाथ भी न लगा पाया था।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

पांचवां दिन-23.8.21सोमवार

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5.धींगरा मदनलाल

ऊधम,अनंत 

अमीचंद,सूर्य सेन जैसे 

यहां कई नाम है। 


अवध बिहारी 

वासुदेव करतार जैसे 

वीर 'लुटेरों' के रूप 

में ही बदनाम हैं।। 


वीर बलिदानी थे सुभाष बोस

उनकी तो 'जिंदगी' क्या 

मौत अब तक 'गुमनाम' है।। 


लाला लाजपत जैसे 

सिंह-सपूतों को सारे

भारत का जनगण 

करता प्रणाम है।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

छठा दिन-24.8.21मंगलवार

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6. शीश पे किरीट 

हिमवान सा महान जहां 

शिव का त्रिशूल 

नृत्य तांडव दिखाता है। 


चरणों में तीन 

महासागरों का संगम है,

राम का प्रताप 

सारे जग को बताता है।। 


संत ऋषि मुनि 

महाज्ञानी कवियों का कोष

भारत धरा से 

रिक्त नहीं होने पाता है। 


स्वर्ग भूमि कर्म भूमि 

मातृभूमि मेरी, यहां 

ईश भी मनुष्य बन

शीश को झुकाता है।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

सातवां दिन-25.8.21बुधवार

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7. तक्षशिला,ज्ञान-कला 

का महान केंद्र रहा,

विश्व के हज़ारों छात्र

लाभ लेने आते थे।


चाणक्य जीवक पाणिनि

से ज्ञानवान यहाँ

आत्म-चेतना की दिव्य

अलख जगाते थे।।


फलगू नदी के तट

तीरथ महान 'गया'

पितरों को पिंडदान

यहीं पे कराते थे।।


इंद्रप्रस्थ,सोमनाथ 

पाटली,प्रयाग,काशी

भव्यता थी ऐसी

शीश खुद झुक जाते थे।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

आठवां दिन-26.8.21गुरुवार

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8. वीर शिवा राणा जैसे

नायक यहां पे सूर-

-तुलसी कबीर जैसे 

गायक समाए हैं। 


स्वाभिमान वेदी पर 

पीढ़ियां निछावर हैं 

क्रांतियां हुईं तो वीर 

रक्त से नहाए हैं।।


ललकारा जिसने तो 

काल को पुकारा मानो, 

मिट्टी में मिले हैं 

जो भी आके टकराए हैं। 


राष्ट्रध्वज तिरंगा 

आसमां पे लहराता आज

कोटि-कोटि प्राणपुष्प 

वीरों ने चढ़ाए हैं।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

नौवां दिन-27.8.21शुक्रवार

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9.एकता के सूत्र में

बंधा हुआ है देश चाहे,

जाति धर्म पंथ की 

यहां पे भरमार है।


बाल-वृद्ध नर-नारी

धनी या भिखारी कोई,

संविधान में यहां 

समान अधिकार है।।


ग्रीष्म शीत वर्षा का

संतुलन मिले यहां,

काश्मीर जैसा 

प्रकृति का उपहार है।


गर्व इतिहास पे है

दिव्य है भूगोल भूमि,

हमने तो जन्म यहीं

चाहा बार बार है।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

दसवां दिन-28.8.21शनिवार

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10. कटरा में माता 

वैष्णवी का दिव्य धाम 

जहाँ देश औ विदेश से 

करोड़ों भक्त आते हैं।


ज्वाला जी का दिव्य रूप

देखते हिमाचल में,

अग्नि की शिखा में

माता की ही छवि पाते हैं।


बद्रीनाथ गोमुख 

केदार का दरश पा के

स्वर्ग जैसा दिव्य भाव

मन में ले आते हैं।।


मोक्ष का है मार्ग

ऋषि केश हरिद्वार 

जहाँ, गंगा में नहा के जीव

ब्रह्म में समाते हैं।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

ग्यारहवां दिन-29.8.21रविवार

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11.उत्तर में बद्रीनाथ 

दक्षिण में रामेश्वर 

द्वारिका पश्चिम तो

जगन्नाथ पूर्व राजे हैं। 


चार दिव्य धाम 

चार मठ हैं शंकर के यहां 

ज्ञान के प्रकाश हेतु 

सूर्य से विराजे हैं।।


हिम के अमरनाथ 

उत्तर में सोहैं 

नाथद्वारा में श्रीनाथ आगे 

झुके महाराजे हैं।


दक्षिण में वैंकटेश 

परम प्रतापी देव,

द्वार पर बारहों मास 

नित्य ढोल बाजे हैं।। 


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

बारहवां दिन-30.8.21सोमवार

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12.कुरुक्षेत्र गीता ज्ञान- 

-दायिनी अमर भूमि,

मदुरै मीनाक्षी का 

बड़ा ही भव्य द्वार है।


काशी विश्वनाथ और 

संगम त्रिवेणी जहां 

पाप-ताप नाशिनी 

अनोखी गंग-धार है।। 


स्वर्ण का शिखर सजा 

गुरु ग्रंथ शीश पर, 

'अमृत का सर' 

शांति मिलती अपार है।


ऐसा मेरा देश 

जहां शासक थे शीलवान 

शत्रु को भी प्राण-दान 

दिया बार-बार है।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

तेरहवां दिन-31.8.21मंगलवार

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13.पद्मनाभ मंदिर ने 

केरल सजाया है तो 

उज्जैन में भव्य रूप

धारे महाकाल हैं।


दिल-वाड़ा वाले 

जैन मंदिरों ने जीता दिल 

गुफा है अजंता 

जहां बोलती दीवाल है।। 


विंध्याचल धाम 

विंध्यवासिनी का गेह,जहां 

छवि को निहार 

भक्त हो रहे निहाल हैं। 


पावन बटेश्वर औ 

उच्च गिरनार जहां 

सैकड़ों ही मंदिरों के 

मानो फैले जाल हैं।। 


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

चौदहवां दिन-1.9.21बुधवार

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14.ओरछा के रामराजा 

बैठे हैं रसोई बीच 

किंतु राजकाज वाली 

मिलती सलामी है।


कामरूप देश जहां 

बैठी है कामाख्या मात 

शक्तिपीठ दक्षिणेश 

काली बड़ी नामी है।। 


चित्रकूट देवभूमि 

राघव बिराजे जहां,

आज भी मिलेंगे 

वहां भक्त अनुगामी हैं। 


दिव्य है गोलोक रूप 

वृंदावन धाम 

जहां रासेश्वर करें 

राधा रानी की गुलामी हैं।। 


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

पन्द्रहवां दिन-2.9.21गुरुवार

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💐हमारे राष्ट्रीय प्रतीक💐


15.सिंह की दहाड़ और 

मोर की नजाकत में 

खिलते कमल ने

अनोखा रूप पाया है।


धर्म चक्र हिंसा पे 

अहिंसा की विजय दिखाता,

क्रियाशील जीवन का 

पाठ भी पढ़ाया है।।


वन्दे मातरम 

'राष्ट्रगीत' है हमारा 

'राष्ट्र-गान' मानो

जन-गण- 

मन में समाया है।


सत्यमेव जयते का 

'राष्ट्रवाक्य' याद रहे

'सत्य ही विजेता है' 

ये सत्य समझाया है।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

सोलहवां दिन-3.9.21शुक्रवार

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प्रदेश-दर्शन 1 (अरुणाचल)

16/क.

दिशांग तवांग 

बौद्ध धर्म के पुराने मठ 

लोहित की धारा 

सारे क्षेत्र को सजाती है।


ऐसा अरुणाचल है 

पूरब का छोर जहां 

पहली किरण 

धरती को सहलाती है।।


सेला-पास, बोमडिला, 

सैकड़ों शहीद हुए 

आज भी वो याद 

नयनों को छलकाती है। 


उन्नत पहाड़,घने जंगल 

व ऊंचे पेड़-

-झरने ही दिखें 

दृष्टि जहां तक जाती है।।


16/ख.

दिव्य अरुणाचल का 

पावन स्वरूप जहां 

प्रकृति नटी का खेल 

सबसे निराला है।


तिब्बती प्रभाव 

मंदिरों पे दिखता है और 

वन्य जीव जंतुओं का 

बना रखवाला है।


कुटिल पड़ोसियों ने 

नजर लगाई किंतु 

इसने तो खुद को 

अनेक रंग ढाला है।


यह अरुणा-चल की 

अरुण अचल भूमि 

मेरी धरती को देता 

पहला उजाला है।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

सत्रहवां दिन-4.9.21शनिवार

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प्रदेश-दर्शन-2 (आसाम)


17A. कामरूप देश 

जादू टोना तंत्र मंत्र, 

नील लोहित अहोम 

इसके ही कई नाम है।


ब्रह्मपुत्र धारा 

पाल पोस के बढ़ाती इसे,

काजीरंगा गैंडों का 

निवास अभिराम है।


भौमासुर कृष्ण ने 

हराया इसी धरती पे,

कामाख्या में मिलता 

हृदय को विश्राम है। 


तरुण फूँकन गोपीनाथ 

औ नवीन जैसे 

क्रांतिवीरों से सजा

ये अनोखा आसाम है।।


17B. बीहू की उमंग सारे 

असम में दौड़ती है,

जयमती-गदाधर की

कीर्ति अविराम है।


वीरता अमर बडफूकन

की गाते यहां,

नाम-घर शंकर के 

फैले गाम-गाम हैं।।


ब्रह्मपुत्र का सपूत 

चाय के बागों से सजा 

जीव-जंतुओं को यहां 

घर सा आराम है।।


प्रकृति का भव्य 

अवतार है आसाम 

जहां एक बार आए तो 

जाने का नहीं नाम है।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*


अठारहवां दिन-5.9.21रविवार

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प्रदेश-दर्शन-3 (मणिपुर)


18/A.मणियों का देश 

कहलाता,मणिपूर यहां 

नृत्य औ संगीत की 

अनोखी ही बहार है।


अर्जुन के पुत्र 

बभ्रुवाहन की भूमि यह 

बभ्रु ने थी रोकी 

अश्वमेध अश्वधार है।। 


रासलीला और नृत्य 

वैष्णवों की प्रेम भूमि 

सभी धर्म-पंथ हेतु 

रखते ये प्यार हैं।


'भारत का पुष्प' 

राजधानी है इंफाल और 

यहां के निवासी 

धीर वीर दिलदार हैं।। 


18/B.पूरब मुकुट में 

जड़ा है मणि जैसा 

उस भव्य मणिपुर का तो 

रूप ही निराला है।


राजा भाग्यचंद्र 

बने भाग्य के विधाता 

विष्णुपुर विष्णु मंदिर ने 

भक्ति में ही ढाला है।। 


लोकतक झील 

ताजे पानी की विशाल 

और,तैरते बगीचों ने 

चकित कर डाला है। 


मणिपुर रास 

अति सरल सुगढ़ 

जिसे देख के लगे कि 

पिया,भक्ति रस प्याला है।।



वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

उन्नीसवाँ दिन-6.9.21सोमवार

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प्रदेश-दर्शन-4 (त्रिपुरा)


19/A. त्रिपुर के नाम पर 

त्रिपुरा पड़ा है नाम,

देवता अनेक विधि 

यहां पूजे जाते हैं।


शांति के पुजारी पर 

युद्ध से डरे न कभी,

धान जूट ईख चाय 

खेतों में उगाते हैं।।


चकमा रियांग मग 

तिपेरा हलाम कूकी,

नागा जनजातियों के 

लोग पाए जाते हैं।


वीर चंद्र देव जैसे 

शासक यहां पे हुए 

कबीलों के पंच 

यहां राजा कहलाते हैं।। 


19/B.त्रिपुरा छोटा सा राज्य 

चार ही जिले हैं यहां,

साक्षर सलीके दार 

सारे रहवासी हैं। 


त्रिपुरी बंगाली 

काकबोरक भाषा है किंतु 

यहां के निवासी 

बन गये बहुभाषी हैं।।


जंपुई पहाड़ी ऊनाकोट 

माताहारी 

नीर-महल को देखो 

छीन लेते ये उदासी हैं।


सागर कमल 

शक्तिपीठ है राधाकिशोर 

देश का है छोर 

जहां बसे ये सन्यासी हैं।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

बीसवां दिन-7.9.21मंगलवार

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प्रदेश-दर्शन-5 (मेघालय)


20A. मेघों का निवास 

कहलाती है यहां की भूमि,

प्रकृति में छाई 

हरियाली की बहार है।


साल टीक बांस के 

विशाल वन क्षेत्र यहां 

फलदार पेड़ों की 

यहां पे भरमार है।।


गारो और खासी 

जनजातियां विशेष यहां,

छोटी बहनें ही पाती 

उत्तरा-धिकार हैं। 


चेरापूंजी ऐसा भव्य 

शहर यहां है जहां 

पूरे साल बर-सात 

होती धुआंधार है।। 


20.B. जन जाति भाषा 

औ पहाड़ गारो खासी यहां,

बादलों का घर 

मेघालय कहलाया है। 


इंद्र देव ने भी मानो 

जल का भंडार सारा, 

प्यार औ दुलार से 

यहीं पे लुढ़काया है।।


रानीकोर,केलांग,नोहन 

झरना विशाल 

नरतियांग शिलाखंड 

अजूबा बनाया है।


घाटियों पहाड़ों 

घने वृक्ष नदी झाड़ियों ने 

मेघों की कृपा से 

यहां स्वर्ग उतराया है।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

इक्कीसवां दिन-8.9.21बुधवार

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प्रदेश-दर्शन-6 (मिजोरम)


21A.मिजोरम का 

कुटीर शिल्प है अनोखा 

औ अनोखी अदरक 

का विशेष उपयोग है।


पुरुषों में बहु विवाह 

प्रथा का रहा है जोर,

बांस और बेंत 

मनोहारी उद्योग हैं।।


नाटा कद स्वस्थ काय

खान-पान बहुत भाय,

गहनों का शौक रखें

रहते नीरोग हैं।


मिजोरम सदा बहार

आयें यहां बार बार

उत्साही और सहज

मित्र मिजो लोग हैं।।


21B.आंधियों में पले

जाति मूल है मंगोल

यहां खेत और पहाड़

में ही जीवन की धार है।


'छिन-लुड'धरती का छिद्र

जहां से पैदा ये वीर,

मिजो जाति जीवन

लोकरीति अनुसार है।।


खुवालम चेराव नृत्य

सात उत्सवों की धूम,

झूम-खेती करें और

बजाते ये गिटार हैं।


मिठी-खुआ पाथियान

देव पुजें कई यहां,

रहता अभाव किन्तु

जीते शानदार हैं।।


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

बाईसवां दिन-9.9.21गुरुवार

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प्रदेश-दर्शन-7 (नागालैंड)


22A. नागा जातियों का 

नागालैंड है प्रदेश जहां 

जंगलों पहाड़ों का 

स्वरूप उजियाला है। 


पर्वतों का पुत्र यहां 

मानते हैं खुद को तो 

प्रकृति के साथ 

रिश्ता सा ही बना डाला है।। 


अर्जुन औ उलूपी का 

अनोखा प्रेम-रंग सजा 

उत्तर पूरब में खड़ा 

ये रखवाला है। 


जनजातियों की हैं

परंपरा पुरानी किंतु,

बेटी चुने पति 

ये विधान ही निराला है।।



22B.रंग चटकीले यहां 

सबको पसंद और 

पंखों पत्तियों से 

खूब खुद को सजाते हैं।


जैकेट चटाई पर्स

टोकरी स्कार्फ आदि

बाँस से बनाते 

बांस ओढ़ते बिछाते हैं।।


तातार सभाएं 

यहां शासन चलातीं,

'भूत-झोलका' सी तीखी मिर्च 

स्वाद लेके खाते हैं। 


प्रहरी अनोखे 

नागालैंड के ये बाँकुरे,जो 

देश के हैं किन्तु 

पहचाने नहीं जाते हैं।।


अशेष💐💐

वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

तेईसवां दिन-10.9.21शुक्रवार

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प्रदेश-दर्शन-8 (सिक्किम)


23A.

हिम से ढके शिखर 

मस्तक उठाए खड़े,

पशु पक्षियों औ 

झरनों की धुन प्यारी है। 


कंदरा गुफाऐं खोह 

घाटियां अनेक यहां,

लामा गुरुओं की 

रोज निकले सवारी है।। 


सुंदर बुरांश जब 

खिलते हैं घाटियों में, 

देव वाटिका ही मानो 

भूमि पे उतारी है।


सिक्किम की चाय 

एक बार चख ली तो 

दुनिया की हर चाय से 

लगेगी बेजारी है।।


23B.कंचनजंघा का 

उच्च शिखर यहां जो खड़ा 

भव्यता में स्वर्ग,

शर्मिंदा हुआ जाता है। 


भोटिया व लेपचा 

यहां की जनजातियां हैं,

झरनों का शोर 

दिव्यता के गीत गाता है।।


खागेन पहाड़ 

रखवाला है यहां का और 

चावल की भूमि 

'डेनजोंग' कहलाता है।


धर्म यहां बौद्ध 

मठ वासी आस्था के केंद्र,

बुद्धिमान, बड़ा पुत्र 

लामा बन जाता है।।  


23C.प्रकृति की सुषमा का 

कोश है अपार यहां 

मानव की दृष्टि 

ईश्वरीय बन जाती है।


जनजातियों की धूम,

पर्व हैं अनोखे 

वेशभूषा अतरंगी 

जो कि दिल को लुभाती है।।


भाषाएं अनेक 

खानपान का अनोखा रंग 

चेतना धरा की मानो 

स्वर्ग छू के आती है।


पूर्व उत्तरीय प्रांत 

जीवन यहां है शांत 

भूमि सात बहनों का 

घर कहलाती है।।


अशेष💐💐


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

चौबीसवां दिन-11.9.21शनिवार

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प्रदेश-दर्शन-9(पश्चिम बंगाल)


24A. 

वंदे मातरम गान 

दिलों में बसाया यहां 

बंकिम शरद से 

साहित्य के प्रणेता हैं।


नृत्य औ संगीत 

नाट्य गोष्ठियों की धूम 

अर-विन्द योगी जैसे 

यहां आत्म शक्ति जेता हैं।।


रामकृष्ण रवीन्द्र,

सुभाष चितरंजन से,

कला के पुजारी 

भक्त ज्ञानी और नेता हैं।


दुर्गा काली का रूप, 

नारियों में दिखे,बंग-

भूमि ज्ञान क्रांति शक्ति 

प्रेम की प्रणेता है।। 


24B.

मातृशक्ति पूजक 

चैतन्य प्रेम धारा तथा 

संस्कृति कला के गढ़े 

नए प्रतिमान हैं। 


स्वर्णबंगभूमि 

सुर ताल व कला का स्वर्ग,

गुणियों व ज्ञानियों से 

पाया दिव्य ज्ञान है।।


जूड़ों में सजावें पुष्प, 

साड़ी भी विशेष यहां,

चावलों से बनें कोटि 

व्यंजन विधान हैं 


गंगा दामोदर तिस्ता 

नदियों की धार बहे,

रस-गुल्ला यहां 

रस भरी पहचान है।।


अशेष💐💐


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

पच्चीसवां दिन-12.9.21रविवार

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प्रदेश-दर्शन-10(उड़ीसा)


25A.

जगत के नाथ 

जगन्नाथ जी विराजें,

सिंधु-तीर सूर्य मंदिर की

छटा ही निराली है।


एक युद्ध ने पढ़ाया 

पाठ जो अहिंसा का 

अशोक ने हिंसा की 

राह बदल डाली है।। 


महानदी ब्राह्मणी 

वैतरणी नदी के तट,

ताड़ नारियल के झुंड 

करें रखवाली है। 


उत्कल कलिंग नाम, 

ओडिसी का दिव्य नृत्य

 पावन उड़ीसा 

 देव-पूजन की थाली है।। 

 

25B.

बांध हीराकुंड 

लोहा कण-कण में लेता श्वास 

उदयगिरी पहाड़ 

खारवेल कीर्ति गाता है।


चिल्का और सागर तट 

छाऊ मयूर नृत्य 

पंछियों का कूँजन भी 

हृदय को लुभाता है।। 


रथयात्रा पावन 

जगन्नाथ की जो आती, 

तब उत्कल धरा पे मानो 

स्वर्ग उतर आता है।


विद्यापति वंश 

सेवादार नीलमाधव के, 

म्लेच्छ यहां मंदिर प्रवेश 

नहीं पाता है।।


अशेष💐💐

वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

छब्बीसवाँ दिन-13.9.21सोमवार

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प्रदेश-दर्शन-11(बिहार)


26A.

बुद्ध ने जहां पे 

ज्ञान सरिता बहाई और 

जैमिनी कणाद जैसे 

हुए दिव्य ज्ञानी हैं। 


चाणक्य अशोक 

चंद्रगुप्त विद्यापति 

महावीर खुदीराम 

जैसे वीर बलिदानी हैं।। 


राजगिरि आरा

चंपारण की जमीन 

जहां वीरों के लहू ने लिखी 

क्रांति की कहानी है।


शांति क्रांति ज्ञान 

चेतना की राह पे चली 

ये भूमि है बिहार की 

जो जानी पहचानी है।।


26B.

बैद्यनाथ धाम 

भोलेनाथ का स्वरूप दिव्य 

सोनपुर में लगे 

अनोखा पशु मेला है। 


दशमेश जन्मथली 

गंगा के किनारे 

गया पिंड दान भूमि 

साधकों का लगे रेला है।।


मिथिला सिया का जन्म 

नालंदा मगध भव्य 

युद्ध औ विनाश काल 

हँस के ही झेला है।


भाषा है मधुर 

सूर्य छठ के अनोखे रंग 

बलिदानों का ये 

बिहार अलबेला है।।


अशेष

वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

सत्ताईसवाँ दिन-14.9.21मंगलवार

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प्रदेश-दर्शन-12(आंध्र प्रदेश)


26A. 

दक्षिण की गंगा 

गोदावरी के किनारे 

राम राघव के मंदिर की 

छटा ही निराली है।


वेंकटाचलम के स्वामी 

तिरुपति बालाजी ने 

संकटों से नौका 

भक्त जनों की निकाली है।। 


त्याग राज वेमन की 

भक्ति साधना में पगी 

आंध्र भक्ति भूमि 

दंभ पाखंड से खाली है। 


भक्त कण-अप्प 

शिव भक्ति की मिसाल बने 

चारमीनारों की 

खूबसूरती निराली है।।


26B.

भद्राचलम मंदिर की 

राम नवमी विशेष, 

नृत्य कुचिपुड़ी 

भाषा तेलुगु रंगीली है। 


धोती और कुर्ते पर 

पगड़ी सजीली बंधे,

चटनी अचार 

दाल रसम रसीली है।।


तुंगभद्रा नागपल्ली

कृष्णा हरियातीं खेत,

मंत्र तंत्र पूजा-पाठ 

भावना हठीली है।


कोंडपल्ली काठ के 

खिलौनों में विशेष और 

कछुओं पर होती 

चित्रकारी नीली पीली है।।


अशेष💐💐



वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

अट्ठाईसवाँ दिन-15.9.21बुधवार

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प्रदेश-दर्शन-13(तेलंगाना)

27A. 

रायलसीमा से दूर 

आंध्र का ही एक भाग 

राज्य है नया सा और

नाम तेलंगाना है। 


कालहस्ती द्राक्षाराम 

मंदिर पुराने यहां 

सिंहाचल के नृसिंह 

पूजता जमाना है।। 


दक्षिण की मीरा मोल्ला 

भक्ति की मिसाल बनी,

रंगनाथ रामायण को 

चित्त में समाना है।


यहां पर निजामशाही 

अति ही प्रभावी रही 

क्षेत्रवादियों से 

राष्ट्रवाद को बचाना है।।


27B.

वारंगल का हजार 

खंभों का त्रिकूट गिरी, 

विष्णु शिव मध्य 

सूर्य मूरत निराली है। 


काकतीय उत्सव 

जो गरिमा बढ़ाता 

राजा कृष्णदेव राय कीर्ति 

गाती डाली डाली है।। 


सारावती मंदिर है 

ज्ञान को समर्पित और 

महाकाली येल्लम्मा 

करती रखवाली हैं। 


गोलकुंडा कला शिल्प 

विश्व में अनोखा जंचे 

तहरी बिरियानी हेतु 

दुनिया मतवाली है।।


अशेष💐💐


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

उनतीसवाँ दिन-16.9.21गुरुवार

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प्रदेश-दर्शन-14(तमिलनाडु)


28A.

मंदिरों की भूमि 

भक्ति मार्ग की प्रणेता 

इसे द्रविडों की शक्ति का 

अनूठा केंद्र मानिए। 


पोंगल का पर्व है 

यहां की पहचान 

डोसा इडली वड़े का 

तीखा स्वाद भी तो जानिए।। 


कंबन के छंद 

आलवार औ नयनार संत 

कवियों की वाणी सुन 

चिंतन को छानिए।


रामेश्वर की कृपा 

रमण जैसे ज्ञानी वहीं 

दो गजी लुंगी में 

तमिलों को पहचानिए।। 


28B.

पक्षी-तीर्थ कांची 

नटराज मदुरई,

कुंभ-कोणम के मंदिरों की 

छटा ही अनूठी है।


पांडवों के रथ 

पल्लवों ने बनवाए 

नाट्य नृत्य गीत साधना 

ज्यों सोने की अंगूठी है।।


गोबर से लिपे घर 

कोल्लम से सजे द्वार,

कावेरी का जल 

कृषि हेतु जड़ी बूटी है। 


श्रीनिवास रामानुज 

सुब्रमण्य भारती से 

साधकों से दुनिया ने 

ज्ञान मणि लूटी है।।


अशेष💐💐

वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

तीसवाँ दिन-17.9.21शुक्रवार

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प्रदेश-दर्शन-15(केरल)

29A. 

सिंधु की तरंग 

चरणों को धो रही है और 

प्रकृति पे छाई यहां 

नूतन जवानी है। 


चेर राजवंश ने 

संवारा और सजाया इसे,

वेद-पुराणों की यहां 

गूंजती कहानी है।।


चेरल से केरल 

कहाई तपोभूमि भव्य,

कालड़ी में शंकर से 

हुए महा ज्ञानी हैं। 


परशुराम ने दिया था 

दान ब्राह्मणों को इसे,

सर्वधर्म समता की 

भूमि वरदानी है।।


29B.

पेरियार के किनारे 

वन्य प्राणियों के झुंड,

नारियल केले और 

पपीते की बहार है।


कथक्कली नृत्य 

काली मिर्च मसाले विशेष  

पेरूमाल राज का 

इतिहास शानदार है।।


भाषा मलयाली 

गांव गलियां बगीचों जैसी,

स्वच्छता अनोखी 

दृष्टि जाति बार-बार है।।


रविवर्मा चित्रकार 

पद्मनाभ गुरुवयूर 

शिक्षित नारी से

यहां सक्रिय घर द्वार है।।


अशेष💐💐


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

इकतीसवाँ दिन-18.9.21शनिवार

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प्रदेश-दर्शन-16(कर्नाटक)


31A. 

वीर-शैव मत

शिव योगी महादेवी जैसे 

संतों ज्ञानियों ने 

भक्ति भाव से सजाया है।


चंदन के जंगल हैं 

सोने की खदान यहां,

राघव ने वानरों का 

साथ यहीं पाया है।।


कृष्णा तुंगभद्रा भीमा 

कावेरी के हार पड़े,

पांडवों ने यहां 

वनवास भी बिताया है।


कन्नड़ की भाव भूमि 

यक्ष-गान नृत्य 

मोक्षगुंडम ने वृंदावन 

बाग बनवाया है।।


31B.

कृष्णराज सागर का 

बांध है विशाल,

राजधानी बैंगलोर 

तकनीक का खजाना है। 


राष्ट्रकूट गंग औ 

कदंब शासकों की भूमि,

वेल्लूर नगर 

प्रकृति का नजराना है।। 


हाथियों की धमक 

वनों को जिंदा रखे 

जोग जल का प्रपात 

किसी से न अनजाना है। 


महिष व गोमतेश 

मूरतें विशाल 

गोल गुंबद से दुनिया ने 

इसे पहचाना है।।


अशेष💐💐


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

बत्तीसवाँ दिन-19.9.21रविवार

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प्रदेश-दर्शन-16(महाराष्ट्र)


32A. वीर शिवराज 

बाजीराव थे मराठा वीर, 

शक्तिशाली मुगलों को 

धरती सुंघाई थी। 


तानाजी सरीखे महावीर भी

यहीं पे हुए, 

मित्रता पे जीवन की 

आहुति चढ़ाई थी।। 


तुका नामदेव 

एकनाथ ज्ञानदेव ने

यहीं पे, भक्ति साधना की 

सरिता बहाई थी।


ज्योति-लिंग 

अष्ट विनायक से पवित्र,

महाराष्ट्र की धरा ने 

शक्ति साधना सिखाई थी।। 


32B.

राम जानकी वियोग

की गवाह पंचवटी,

नाम दक्षिणापथ का

वेदों ने भी गाया है।


आदिल कुतुब औ इमाम 

राजशाहियों का,

उद्भव-पतन इसी 

भूमि में समाया है।।


अजंता एलोरा एलिफेंटा से 

कला के तीर्थ 

पश्चिमी सिरे को 

महासिंधु ने लुभाया है। 


तीर्थ गुफा मंदिर 

व चैत्य विहारों ने 

सहयाद्री श्रृंखला पे 

अधिकार सा जमाया है।।


32C.

सुंदर शरीर स्वाभिमान 

श्रम जाति गर्व लिए 

ये मराठे कृषि स्वर्ण को 

उगाते हैं।


नारिकेल-राखी पूर्णिमा 

गणेश पूजा और 

भांति भांति उत्सव 

त्यौहार भी मनाते हैं।।


पैठण,सोपारा,

माथेरान,पंचगनी 

लोनावला में हजारों लोग 

आनंद उठाते हैं।


गोकुल की अष्टमी को 

गोविंदा का नाम ले के,

दही हांडी मैं तो 

खुद को भी भूल जाते हैं।।


अशेष💐💐


वंदे-मातरम (मातृ आराधना)

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

तैंतीसवाँ दिन-20.9.21सोमवार

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प्रदेश-दर्शन-17(गोआ)


33A. कोंकण किनारे 

प्रकृति की अठखेलियों ने 

दलदली ज़मीं पे

नई दुनिया बसाई है। 


पुर्तगालियों ने इसे 

जी भर के लूटा और 

स्वाधीनता प्रेमियों पे 

गोलियां चलाई हैं।।


पूरब का रोम 

कहलाती है यहां की भूमि,

जागती रही है 

कभी नहीं अलसायी है।


नीला आसमान 

नीला सागर विशाल तट 

यहां बूढ़ों  में भी 

जाग जाती तरुणाई है।। 


33B.

सिन्दाबुर गोमा जैसे 

नाम हैं अनेक इसे,

सागर से ऋषि 

परशुराम ने छिनाया था। 


मुस्लिमों व पुर्तगालियों की 

धन-लालसा ने 

सुंदर धरा को 

कत्ल-गाह सा बनाया था।।


कोंकण मराठी और 

द्रविड़ भाषा कला ने, 

साहित्य संगीत में भी 

शीर्ष दिखलाया था। 


गुफा हरवेल 

सप्तकेश्वर के जंगलों में 

पांडव अज्ञातवास 

यहीं पे बिताया था।।


33C.

मांडवी का तट 

मर्मगोवा मडगांव 

जहां रुकते जहाज 

माल-मत्ता पहुंचाते हैं।


आदिल महल 

दूधसागर प्रपात और 

सागर पे धरती 

आकाश मिल जाते हैं।।


ईस्टर दिवाली मंडो नृत्य 

और कार्निवाल, 

गोवा के निवासी 

बड़ी धूम से मनाते हैं।।


प्रकृति अनूठी 

व्यवहार प्यार भरा मिले, 

यहां जो भी आते,

यहां के ही बन जाते हैं।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*चौंतीसवाँ दिन-*

*21.9.21मंगलवार*

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*प्रदेश-दर्शन-18(मध्य प्रदेश)*


34A. 

नर्मदा की धार मानो 

स्वर्ग सा सुकून देती,

जहां ओरछा सी 

राजा राम राजधानी है।


चित्रकूट राम व भरत 

प्रेम की प्रतीक, 

झांसी,जहां खूब लड़ी 

रानी मर्दानी है।।


कालिदास और बाणभट्ट ने 

सजाया जिसे,

हवा ने बिखेरी,

जहां भोज की कहानी है।


प्यार भरी बानी 

जहां शौर्य की रवानी, 

भरे रगों में जवानी 

ऐसा मस्त हवा पानी है।।


34B.

मांडू खजुराहो सांची 

मंडला महोबा 

इतिहास औ कला का जोड़ 

यहां बेमिसाल है।


विंध्य का पठार 

तापी नदी मुलताई झील 

गोंडों के किले व 

भेड़ाघाट भी कमाल है।। 


आल्हा और उदल की 

वीरता के किस्से 

तानसेन के सुरों से भूमि 

रही ये निहाल है।


मंडन, पतंजलि, व 

दंडी भारवी गुणाढ्य 

जैसे भारती-सुतों से 

मेधा हुई माला-माल है।। 


34C.

क्षिप्रा तट महाकाल 

भूमि है अवंतिका की,

कुंभ मेला ज्ञान 

भक्ति संगम निराला है। 


विक्रम की राजधानी 

गूजरी का प्रेम 

शिवपुरी जंगलों में 

पशुओं का बोलबाला है।।


प्रकृति कला व सुर-

साधकों की कर्मभूमि,

मालवों के श्रम से 

किसान हरियाला है।


भारत का मोती 

ग्वालियर का किला विशाल 

मध्य देश को तो 

ज्यों महेश ने ही पाला है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*पैंतीसवाँ दिन-*

*22.9.21बुधवार*

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*प्रदेश-दर्शन-19(गुजरात)*


35A.

गौरव की भूमि 

गुजरात द्वारकेश 

सोमनाथ की कृपा ने यहां 

शक्ति बरसाई है। 


गांधी औ पटेल की है 

कर्मभूमि दिव्य 

आतताइयों ने सदा यहां 

मुंह की ही खाई है।। 


कृष्ण बलराम 

यदुवंश के प्रणेता 

भक्त नरसी व स्वामी 

दयानंद की बड़ाई है। 


अर्ध शक्ति की मिसाल 

दिल गरबे की ताल 

रंग भरी जिंदगी 

सभी के मन भाई है।।


35B. 

गर्भ दीप से बना है 

गरबा का नृत्य 

दीप पात्र रोशनी से भरा

मन को लुभाता है।


मोढेरा की बावड़ी है 

सिद्ध पुर जैन तीर्थ,

झूलतीं मीनार 

तो जिया भी झूल जाता है।।


ढोकला खमण दही 

फाफड़ा अचार 

स्वाद जीभ से लगे तो 

सदा याद रह जाता है।


नर्मदा व तापी माही 

साबर-मती बनास 

नदियों का तेज 

गुजरात में समाता है।।


35C.

कच्छ की जमीन 

बियाबान है परंतु 

शत्रु देश की कुदृष्टि से 

ये राष्ट्र को बचाती है।


पाटन प्रभास 

सोमनाथ पालीताणा 

पाल वंश के प्रतिष्ठा गीत 

धरती ये गाती है।।


कांकरेजी गाय और 

गिर जंगलों के सिंह 

यहीं पे बची हुई ये

अनमोल थाती है।


भोजन में मीठे 

व्यवहार में भी मीठे 

लोकरीत  में अनूठे 

गरवीले गुजराती हैं।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*छत्तीसवाँ दिन-*

*23.9.21गुरुवार*

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*प्रदेश-दर्शन-20(राजस्थान)*

36A.

रणबांकुरों के 

बलिदान से सजा है 

यहां वीरता बहादुरी ही 

जीने का विधान है।


मरुभूमि की 

कठोरता ने यहां जीवन को 

दृढ़ता और पौरुष का 

दिया वरदान है।।


कुंभा राणा सांगा 

भामाशाह औ प्रताप ने 

सिखाया हमें- जीवन से 

बड़ी आन बान है।


गढ़ों ने निखारा-

राज-पूतों ने संवारा इसे,

जौहर की यज्ञशाला 

मेरा राजस्थान है

36B.

बांगड़ मेवात मत्स्य 

हाड़ोती शेखावटी से 

कितने ही नाम 

इस नाम में समाए हैं।


चंबल की धार 

आबूगिरी की गुफाओं ने भी 

वीर और ज्ञानी 

इतिहास में छुपाए हैं।।


पन्ना पद्मिनी व 

हाड़ा रानी जैसे नारी रत्न 

कीर्ति के किरीट बने 

शीश पे सजाए हैं।


चुन्दड़ी लहरिया औ 

फैंटा पाग अंगरखा,

घाघरे की घूमर ने 

रंग दिखलाये हैं


36C.

तीज गणगौर 

तलवार कुल्लेदार मूंछ,

दाल बाटी चूरमा 

यहां की पहचान है। 


शरण पड़े का 

रखवाला है हमीर हठ,

आन के लिए तो,

शीश दान का विधान है।।


बाड़मेर बीकानेर 

मरुभूमि द्वार खड़े,

शक्ति औ सुरक्षा हेतु 

बने प्रतिमान हैं।


भक्तिमयी मीरा 

बनी-ठनी की कला के संग 

महलों किलों का ये 

रंगीला राजस्थान है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*सैंतीसवाँ दिन-*

*24.9.21शुक्रवार*

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*प्रदेश-दर्शन-21(पंजाब)*

37A.

भारत को अन्न का 

प्रदाता है प्रदेश 

बाँके वीर नौजवान 

जिंदादिली की मिसाल हैं। 


लस्सी का गिलास 

'मक्की रोटी ते सरों दा साग'

एक बार खाओ 

लगे दिल को कमाल है।।


पोरस की भूमि 

भांगड़े का ताल देती हुई,

नानक गोविंद गुरु 

हुए बेमिसाल हैं।


सीमा पे खड़ा है सिख,

खेत में अड़ा है,देखो 

पानी भी पंजाब का 

मां भारती की ढाल है।।


37B.

मौज जिंदगी से 

भरपूर है पंजाब जहां 

खाना खेलना तो 

नस-नस में समाया है। 


लोहड़ी बैसाखी गिद्दा 

बड़े हैं त्यौहार 

नाच-रंग पुरजोर 

सारा देश ही नचाया है।। 


कैकय पांचाल 

सप्त सिंधु का प्रदेश 

रावी झेलम चिनाब ने

ज़मीं को महकाया है। 


पाणिनि पतंजलि 

वशिष्ठ तपोनिष्ठ हुए 

सिख गुरुओं ने 

शक्ति तेज बिखराया है।।


37C.

धर्म,मत,जीवन- 

विधान वेश-भूषा 

खान-पान मौज-मेला 

यहां सब से निराला है ।


हीर-रांझा और 

महिवाल-सोहनी का प्यार 

बना है मिसाल 

और दिल छूने वाला है।।


बंटवारे का विनाश 

झेल के खड़ा हुआ ये 

देशघातियों को 

रोके खड़ा रखवाला है।


कर्मवीरता यहां पे

दौड़ती लहू में इसे 

अग्नि ने जगाया और 

आंधियों ने पाला है।।


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*अड़तीसवाँ दिन-*

*25.9.21शनिवार*

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*प्रदेश-दर्शन-22(हरियाणा)*


38A.

कुश्ती और खेती 

सांस-सांस में रची है यहां 

धरती के पूत 

बसे जाट औ अहीर हैं। 


पुष्ट हैं शरीर और

वाणी रूष्ट लगे किंतु 

दिल के ये साफ और 

बड़े धीर वीर हैं।।


हर्ष का प्रदेश 

कुरुक्षेत्र है विशेष,

गीता ज्ञान का संदेश 

दूध बहे जैसे नीर है। 


'हरि का अरण्य' 

हरियाणा है अनोखा जहां,

बातों में है तीर 

दिल प्यार से अमीर है।।


38B.

वेदमन्त्र रचना की

भूमि ये पवित्र,आर्य

धर्म अग्नि पूजा शैवधर्म 

का प्रचार है।


अग्रसेन धाम रोहतक

वैश्य जाति मूल,

जुड़े पानीपत से

भीषण संहार हैं।।


सोहना के तप्तकुंड

कर्ण का है करनाल,

द्रोण गुरु-ग्राम

कोठी किलों का हिसार है।


रागिनी यहां की 

झूमने पे मजबूर करे,

ढोला-मारू में 

माटी महक गुलजार है।।


38C.

घाघरे व ओढ़नी में 

नारियां अनोखी सजें,

धरती की गोद ये 

पसीने से भिगाती हैं।


शक्ति धैर्य की प्रतीक

पत्थरों में पली यही

संकट पड़े पे शमशीर 

बन जाती हैं।।


बाजरे की रोटी

मूंग उड़द की दाल छाछ,

सादगी विशेष पर

रस बरसाती है।


पशु सम्पदा अपार

खेलों से रखें ये प्यार,

बोली हरियाणवी

जो दिल को छू जाती है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*उनतालीसवाँ दिन-*

*26.9.21रविवार*

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*प्रदेश-दर्शन-23*(हिमाचल)


39A.

शक्ति रूप शक्तिपीठ 

यहां पे विराजते हैं,

ज्वाला चिंत-पूरणी का 

विश्वव्यापी धाम है।


लामाओं का तीर्थ 

धर्मशाला है यहीं पे और 

चामुंडा व नैना देवी का 

यहीं विश्राम है।। 


चाय के बागान 

जड़ी बूटियों के खेत,

ज्यादा शीत है न ग्रीष्म 

छटा छाई अभिराम है।


देव किन्नरों का देश 

भावना से भरा हुआ 

भारत के हृदय का 

हिमाचल प्रिय नाम है।।


39B.

कुल्लू कांगड़ा लाहौल 

शिमला प्र-कृति पुत्र,

देवदार वृक्ष 

फल फूल बेमिसाल हैं। 


भीम ने हिडिम्ब दैत्य 

मारा था यहीं पे,और 

घूँघरी में हिडिंबा का

मंदिर कमाल है।।


भाखड़ा का बांध खड़ा 

कर्म की इबारत सा,

व्यास औ चिनाब रावी

नदियों का जाल है।


लामा भिक्षु और 

जोमो भिक्षुणी विहार बने,

बौद्ध चेतना ही 

भक्ति अर्चना का थाल है।।


39C.

गांव गांव झंडे और 

झंडियां सजे दिखेंगे,

तंत्र मंत्र टोने 

टोटके का बोलबाला है। 


देवों का निवास 

कहलाती कुल्लू घाटी, 

जहां पावन दशहरे का 

रंग ही निराला है।। 


ज्वालामुखी तीर्थ 

कांगड़ा का किला और चित्र 

चंबा ने पुराने 

इतिहास को संभाला है।


झरने पहाड़ नदी 

स्वर्ग दिखलाते यहां 

कांगड़ा की चाय का 

हाथों में गर्म प्याला है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*चालीसवाँ दिन-*

*27.9.21 सोमवार*

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*प्रदेश-दर्शन-24*(कश्मीर)


40A.

पुष्पित औ पल्लवित 

रूप हैं अनेक यहां 

देवता निवास हेतु 

रहते अधीर हैं। 


धवल कणों के मध्य 

सोए महादेव 

भव्य मंदिर सुशोभित हैं 

दिव्य नदी तीर हैं।। 


कैसा दुर्भाग्य 

जिन हाथों सजते थे फूल,

थामने लगे वो हाथ,

गोले शमशीर हैं।


ऐसी दिव्य भूमि 

जो है भारत  किरीट बनी, 

धरती का स्वर्ग 

कहलाता कश्मीर है।। 


40B.

कश्यप की तपोभूमि 

बौद्ध धर्म का प्रभाव 

कल्हण व कालिदास 

काव्य में समाए हैं। 


सिखों ने किया है राज 

शीश पे सजा है ताज,

शालीमार बेरीनाग 

बाग भी सजाए हैं।। 


गुफा है अमरनाथ

भोलेनाथ का ही रूप,

शेषनाग सोनमर्ग  

मन को लुभाए हैं।


बर्फ पे होते हैं खेल 

झीलों में नावों की दौड़,

पत्थर भी 

देवदार तले मुस्कुराए हैं।। 


40C.

माता वैष्णवी का दिव्य 

धाम है निराला जहां 

श्रद्धा भक्ति चेतना की 

बही गंगधार है।


पीठ पे शिशु को बांधे 

नारियाँ परिश्रमी, 

जो पालती हैं पशु, 

खूबसूरती अपार है।। 


भाषा डोगरी मधुर

सेब संतरे का स्वाद,

बस्तियों के चारों ओर 

खींचते दीवार हैं।


मक्खन की चाय 

लंबा कोट, कांगड़ी अंगीठी,

जूते नोकदार हैं

दिलों में भरे प्यार हैं।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*इकतालीसवाँ दिन-*

*28.9.21 मंगलवार*

**********************

*प्रदेश-दर्शन-25(उत्तराखंड)*


41A.

गंगा यमुना की धार 

निकली यहां से-

बद्रीनाथ औ केदारखण्ड

दिव्य चार धाम हैं। 


देवभूमि भव्य गिरि 

कंदरा पहाड़ और 

हिम के शिखर 

ऊंचे झरने तमाम हैं।।


चीड़ देवदार से 

घिरे हैं वन प्रान्त

फूलों फलों के बगीचे 

उत्सवों की धूम धाम है। 


ऋषियों का देश 

उत्तरा-खंड की तपोभूमि 

यहां जो बसें तो 

स्वर्ग का न कोई काम है।।


41B.

गोमुख से अमृत की 

धार गिरती है, 

देव-भूमि ये अनोखी 

शीश छूता हिमवान है।


व्यास और शंकर की 

दिव्य तपोभूमि यहां 

स्वर्णिम भूगोल 

इतिहास भी महान है।।


गोरखा कत्यूरी 

राजवंशों ने संभाला इसे,

शक औ कुषाणों का भी 

फैला यशगान है।


जोशीमठ बागेश्वर 

चंपावत औ चमोली 

टिहरी तो मानो 

प्रकृति का वरदान है।।


41C.

हुडली गुफा के 

शैल चित्र हैं अनोखे,

गढ़वाल की कला तो 

कला क्षेत्र की मिसाल है। 


हारुल मंडाण और 

जौनसारी नृत्य ढोल 

झांझ के संगीत से 

हुए ये मालामाल हैं।।


नंदा देवी,कुंभ,श्रावणी व 

सोमनाथ मेला 

उत्सवों की धूम 

लोग रहते निहाल हैं।


पांच हैं प्रयाग यहां 

दिव्य चार धाम 

शैल शिखरों से घिरा

प्रांत भव्य बेमिसाल है।।



*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*बयालीसवाँ दिन-*

*29.9.21 बुधवार*

**********************

*प्रदेश-दर्शन-26(उत्तर-प्रदेश)*


42A.

राम और कृष्ण ने 

जनम लिया है जहां पे 

मध्य में पवित्र 

महादेव भूमि काशी है। 


तानसेन,बैजू 

हरिदास का संगीत भाव 

प्रेम भूमि सूर 

तुलसी की कविता सी है।।


ताज का खुमार 

आंख पे जो चढ़ जाता है तो,

चांदनी में लूट लेता,

दिल की उदासी है।।


उत्तर-प्रदेश मेरा 

भारत का शक्तिपुंज 

भाग्यवान है कि, जोभी 

यहां का निवासी है।।


42B.

रामलीला रास स्वांग 

रसिया धमाकेदार,

कत्थक कव्वाली ने 

यहीं पे जन्म पाया है। 


रीतियाँ अनेक किन्तु 

संस्कृति है एक 

गंगा यमुना ने 

रत्नमयी 

धरा को बनाया है।।


रेशम चिकन 

हथकरघा जरी का काम,

चूड़ियों ने नारी के 

सुहाग को सजाया है।


अवधी बुंदेली बृज 

हिंदी की अनेक रूप,

शारदा सुतों ने इसे 

दिल में बसाया है।।


42C.

जायसी कबीर 

भारतेंदु, महावीर, पंत 

निराला,प्रसाद 

भाषा-भाव के प्रणेता हैं। 


बिस्मिल,आजाद 

मालवीय औ नरेंद्र देव,

राष्ट्रभक्त क्रांतिवीर 

चिंतक व नेता हैं।।


ठुमरी की तान 

शहनाई बांसुरी की गूंज, 

तबले की थाप से 

हृदय हिलोर लेता है।


मेरा ये प्रदेश 

आलू बाजरा गेहूं के संग 

गन्ने की मिठास 

आधे भारत को देता है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*तेतालीसवाँ दिन-*

*30.9.21 गुरुवार*

**********************

*प्रदेश-दर्शन-(झार खण्ड)


43A.

जंगल व झाड़ियों ने 

झारखंड दिया नाम 

पुंडरीक और कलिंद 

नाम भी पुराना है।


बैद्यनाथ धाम 

देवघर महिमा अनंत 

गंगराज ने इसे 

प्रथम पहचाना है।। 


आदिवासी और 

जनजातियों की भूमि 

जिसे धरती मैया से मिला 

खनिज खजाना है।


प्रकृति की संपदा से 

सज्जित है भूमि जहां 

लोहे कोयले ने रचा 

सारा ताना-बाना है।। 


43B.

पंचशूल युक्त 

बाबा धाम है निराला,

जैन शिखरों पे 

श्रद्धा भाव 

भक्ति का बसेरा है।


छिन्नमस्तिका का 

देवी रूप है यहां पे,

भगवान जगन्नाथ का 

यहां  भी बसा डेरा है।।


जंगल पठार किले,

दुर्गम पहाड़ियां हैं,

हुंडरू प्रपात 

स्वर्णरेखा का उजेरा है। 


सैकड़ों बगीचों का 

यहां पे है हजारीबाग,

गुफाएं यहां की 

जहां दिन भी अंधेरा है।। 


43C.

भाषा संस्कृति का 

भव्य संगम है झारखंड,

बेतला में वन्य 

जीव जंतु बेशुमार हैं। 


घाटियों के बीच से 

गुजरते हैं रास्ते तो,

सन्नाटे का 'शोर' भी 

बेहद शानदार है।। 


लोहे का शहर 

जमशेद ने बसाया जोकि 

पेट में समेटे बैठा 

कोयला अंगार है। 


झील और झरनों की 

गिनती न कोई 

ऐसा झारखंड पे 

प्रकृति ने उड़ेला प्यार है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*चौंवालीसवाँ दिन-*

*1.10.21 शुक्रवार*

**********************

*प्रदेश-दर्शन-28(छत्तीसगढ़)*


44A.

दक्षिण का कोसल 

कहाया है प्रदेश यह

संस्कृति विकास की 

अनोखी ही कहानी है।


सस्य श्यामला धरा है, 

अन्न से भरे कोठार,

"धान के कटोरे" ने,

बिखेरा रंग धानी है।।


घोटुल अनोखे,जो 

बचाये हैं रिवाज रीति,

संयम व साधना पे 

सधती जवानी है।


आदिवासी रंग जो 

उमंग की तरंग भरा,

हवा है सुहानी और

प्यार भरा पानी है।।


44B.

सातवाहनों का कभी

शासन रहा था यहां,

बौद्ध महायान ने

प्रचार यहां पाया है।


नल-नाग सोम फणी

वंश औ कांकेरियों ने 

पर्वतों के पार कभी

राज ये फैलाया है।।


विंध्य से घिरे विशाल

वृक्ष वन प्रान्त भव्य,

किलों व कछारों में 

अतीत उतराया है।


छत्तीस किले थे कभी,

चाहे वो न दिखें अब,

किन्तु इसी से छत्तिस-

गढ़ नाम पाया है।।


44C.

पंडवानी भोजली

देवार पन्था बांस गीत,

खुड़वा व फुंगली का 

खेल ही निराला है।


भतरा उरांव बैगा

कोरवा औ गोंड जाति

आदिवासी रीति का

यहां पे बोलबाला है।।


महामाई मरीमायी 

आरंग के मंदिरों में

भक्ति प्रेम भावना का 

फैलता उजाला है।


गंगरेल सेतुगङ्ग

चित्रकोट के प्रपात

पला जो अभावों में,

वो खून ही 'जियाला' है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*पेंतालीसवाँ दिन-*

*2.10.21 शनिवार*

**********************

*प्रदेश-दर्शन-29(अंडमान द्वीप)*

45A.

सागर के मध्य 

जल राशि से घिरा प्रदेश,

द्वार दक्षिणी पे यहां 

बैठा अंडमान है।


क्रांति की कहानियों का 

मूक ये गवाह जहां 

मातृ चरणों पे वीर 

हुए बलिदान हैं।। 


सेल्यूलर जेल 

क्रांतिवीरों की थी कर्मभूमि,

बलिदानों ने बनाया,

तीरथ महान है। 


प्रकृति की सुषमा ने 

स्वर्ग सा बनाया इसे, 

सिंधु की तरंगें 

भारती का जय-गान हैं।। 


45B.

नर-भक्षियों से भरे,

जंगल यहां थे कभी,

नाम सुन कर के ही 

लोग डर जाते थे।


ब्रिटिश हुकूमत में 

देशभक्त क्रांतिवीर 

अपनों से दूर यहां 

ला के रखे जाते थे।।


कोड़े पड़ते थे 

धूप बारिश सताती और 

कोल्हू चलवाते 

जंगलों को कटवाते थे। 


टाट पहनाते 

कंदमूल ही खिलाए जाते 

सैकड़ों सेनानी यहीं 

प्राण तज जाते थे।।


45C.

भारत का अंग 

अंडमान है जहां पे आज 

खेती हरियाली का भी 

हो रहा विकास है। 


मूल जो निवासी 

वस्त्रहीन रहते हैं उन्हें 

मानवों में वास का  

रहा न अभ्यास है।।


ओंगी औ जरावा 

आदिवासी हैं शिकारी 

घने, जंगलों के बीच 

वृक्ष उनका आवास है।


किंतु यही बात 

जोड़ती है उन्हें भारत से 

भारतीयता का 

उनको भी एहसास है।।


💐💐



*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*छियालीसवाँ दिन-*

*3.10.21 रविवार*

**********************

*प्रदेश-दर्शन-30(पांडिचेरी व लक्षद्वीप)*

46A.

पल्लव चालुक्य चोल

राष्ट्रकूट जैसे वंश

संस्कृति का दान यहां 

सदा देते आए हैं। 


फ्रांस का प्रभाव 

कण-कण में दिखाई देता 

रोम व यूनान से भी 

रिश्ते साध पाये हैं।। 


हरे-भरे खेतों से 

घिरें मकान चारों ओर,

वृक्षों के समूह व 

तालाब बनवाए हैं।


कहीं छोटी गलियां हैं 

सड़कें कतार बंधी 

मंदिरों के नए रूप 

नजरों पे छाए हैं।।


46B.

मंदिर वेरूलीनूर 

रोचक कथा से जुड़ा,

राजा ने यहां पे आके 

रोग मुक्ति पाई है। 


आश्रम अनोखा 

अरविंद योगी का बना है, 

योग साधना ने 

मानो पैंठ ही बनाई है।।


प्रेरक है भूमि 

क्रांतिवीर और साधकों की, 

आत्म ज्ञान राष्ट्रभाव 

चेतना जगाई है।


पांडिचेरी आश्रम व

योगी अरविंद नाम,

ध्यान साधना की शक्ति,

विश्व को दिखाई है।


46C.

सागर अरब मध्य 

फैले हैं प्रवाल द्वीप,

लक्ष मिनिकॉय औ

अमन नाम पाया है। 


बिन्ना चैटलेट और 

किल्टन छोटे हैं किंतु,

आठ दस द्वीपों ने 

आबादी को बसाया है।।


भाषा मलयाली मालदीवी 

और माहल हैं,

मातृ कुल ने ही

उत्तराधिकार पाया है।


'थकरू' मल्लाह हैं

'रावेरी' मजदूर यहां 

'मणिकफनों' ने सारा 

शासन चलाया है।


46D.

'अथीरी' का नेता 

कहलाता है 'मूपन'जिसे 

गांव की सभा, प्रधान 

पदवी दिलाती है ।


'मूपन' की बात 

सारा गांव मानता है और 

'मूपति' जो औरतों से 

काम करवाती है।।


चावल और नारियल 

संपदा यहां की जिसे 

लेती सरकार और 

शासन सधाती है।


पाल वाली नाव 

माल ढोती है यहां से और 

सागर की लहरें 

खुशी के गीत गाती हैं।।


अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*सैंतालीसवाँ दिन-*

*4.10.21 सोमवार*

**********************

*प्रदेश-दर्शन-31(दादरा व लद्दाख)*

47A.

गुजरात और 

महाराष्ट्र की गोदी में बसा 

दादरा हवेली 

केंद्र शासित प्रदेश है।


कभी पुर्तगाल का 

दमन झेलता था किंतु 

आज सिलवासा का 

स्वरूप ही विशेष है।।


ग्राम देवी और 

काली पूजा का चलन यहां,

भेदभाव का यहां 

न किंचित प्रवेश है।


जाति जनजाति 

पर्व मिल के मनाते सभी,

आपस में रखते न

हिंसा और द्वेष है।। 


47B.

बाणगंगा झील 

खानवेल हिरणों का खेल,

ताड़केश शिव की तो 

महिमा निराली है। 


'ढोढ़ीया' व 'कोंकना' का 

पर्व 'अवातीज' 

और 'बरश' के नाम 

यहां मनती दिवाली है।।


पेशवा ने बेचा 

पुर्तगाल ने खरीदा 

इसे संघ ने छुड़ाया 

इतिहास शक्तिशाली है। 


जनशक्ति आत्म शक्ति 

चेतना की ये प्रतीक 

दादरा की भूमि 

बलिदान से न खाली है।।


47C.

भारत का उत्तरी 

किनारा है लद्दाख लेह,

शत्रुओं ने इस पे 

कुदृष्टि सदा डाली है।


कहीं पे पहाड़ 

कहीं बर्फ की दीवार 

कहीं खुले से मैदान तो 

कहीं पे हरियाली है।।


सिंधु की अगम्य धार

ऊंचे ढाल औ,कगार 

झीलों ने तो मानो 

नई दुनिया बसा ली है।


लेह काराकोरम 

सुरू की घाटियों ने दिव्य 

प्रकृति सुरों की मानो

सरिता सजा ली है।।


47D.

चीन और पाक यहां 

नजरें गड़ाए बैठे,

भारतीय सेना यहां 

सीमाएं संभाले है।


सारे षड्यंत्र 

शत्रुओं के नष्ट होंगे,

सियाचिन पे डटे ये 

मातृभूमि के जियाले हैं।।


भारत के शीश को 

संभाले खड़े वीर 

घोर अग्नि में तपे हैं

क्रूर पत्थरों ने पाले हैं।।


भारत की सीमाओं को 

लेना हलके में नहीं,

सारे चाल-चौसर 

हमारे देखे भाले हैं।।


अशेष

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*अड़तालीसवाँ दिन-*

*5.10.21 मंगलवार*

**********************

*प्रदेश-दर्शन-32(राजधानी दिल्ली)*

48A. 

चंद्रवंशी तेज का 

प्रतीक बनी थी कभी तो 

इंद्रप्रस्थ जैसी 

जादू नगरी कहाती थी।


तोमरों के राजा थे 

अनंगपाल कीर्तिवान 

चंद्र-लाट उन्हीं ने 

यहां पे बनवाई थी।।


राजाओं के राजा 

पृथ्वीराज को हरा के

दुष्ट गोरी ने यहां पे  

अंधेर ही मचाई थी।


एक दो या तीन नहीं 

जीत हार की ज़मीं ये 

अठारह बार ये 

उजाड़ी और बसाई थी।।


48B.

शेरगढ़ कोटला 

सलीमगढ़ और 

महरौली जैसी दिल्लियों के 

कई रूप रंग है। 


खान-पान वेशभूषा 

भाषा बोलचाल के भी 

दिल्ली वालों के यहां

अजीब रंग ढंग हैं।


दिल्ली जो नई है वहां 

धूम रोशनी की और,

दिल्ली जो पुरानी 

वहां गलियां भी तंग हैं। 


सूफी या मुसलमान 

पारसी ईसाई सिख,

ईस्टर दिवाली ईद 

होती संग संग है।। 


48C.

लाल किला यमुना 

किनारे सीना ताने खड़ा,

आंसू-मुस्कान में 

हजारों घुटी आह हैं। 


राजघाट बापू की 

समाधि को संजोए,

जहां हृदयों में बहे

सत्य अहिंसा प्रवाह है।।


पहला तिरंगा 

फहरा यहां स्वतंत्रता का, 

शीशगंज गुरु-बलिदान 

का गवाह है।


दुनिया में दिल्ली ही,

अनोखा ऐसा शहर जो 

बार-बार बसा,

हुआ जितना तबाह है।।


48D.

बूढ़ी बादशाहत की 

टूटती सांसों के साथ,

दिल्ली की रगों में बहा 

यमुना का पानी है।


क्रांतिवीर संगीतज्ञ

नेता कवि साधकों की, 

इसके सीने में छिपी 

सैकड़ों निशानी है।।


सूरज स्वतंत्रता का 

उगा है इसी ज़मीं पे 

आज मेंरे भारत की 

भव्य राजधानी है।


भारत की शान 

पहचान आन बान बनी 

इतने में पूरी नहीं 

दिल्ली की कहानी है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*उनचासवाँ दिन-*

*6.10.21 बुधवार*

*******************

*देश-दर्शन-1(श्रीनगर-शिमला)*

49A.

झेलम की धार पर 

तैरते शिकारे और 

फूलों से सजी है झील, 

अद्भुत नजारा है।


गुफा है अमरनाथ 

हिम शिखरों की छांव,

प्रकृति शिखर पे  

चमकता सितारा है।।


तैरते बगीचे और 

तैरते मकान यहां, 

हरियाली ने सजीव 

स्वर्ग ही उतारा है।


भारत-किरीट, 

मां के मस्तक का मान  यह

श्री-नगर तो सभी के 

नयनों का तारा है।।


49B.

मिली जो स्वतंत्रता तो 

कुटिल पड़ोसियों ने,

इसे हथियाने को 

दिखाई चतुराई है।


भारत के वीर 

रणबांकुरे डटे हैं वहाँ, 

शत्रुओं ने मोर्चों पे

मुंह की ही खाई है।


धीरता औ वीरता की 

सैकड़ों कहानियों से,

तपोभूमि ऋषियों के 

मन में समाई है। 


बाल भी न बांका 

कर पाया है कोई भी 

चाहे सीमाओं पे आग 

बार बार दहकाई है।।


49C.

उत्तर में मंडी और 

कुल्लू से घिरा हुआ है 

पश्चिम सोलन 

दक्षिण में किन्नौर है।


श्यामला देवी पे नाम 

शिमला रखा है भव्य 

पर्वतों की माला ने 

बनाया सिरमौर है।


चीड़ देवदार  

घने जंगलों की है बहार,

शिमला ने देखा 

अपना ही शाही दौर है।। 

 

पर्वतों के अंचल में,

शहर मिलेंगे कई,

किंतु शिमला के जैसा 

नहीं कोई और है।।


49D.

बंदरों से घिरा यहां  

जाखू वाला मंदिर है,

तारा देवी मंदिर के

पर्व बेमिसाल हैं। 


लकड़ी की कला का, 

यहां ना कोई तोड़ मिले 

बक्से औ खिलौने यहां 

बनते कमाल हैं। 


शिमला की टोपी का 

निराला ही स्वरूप जब 

शीश पे सजे तो ये 

बदल देती चाल है। 


ओक के वनों से घिरी 

पर्वतीय घाटियों से,

प्रकृति यहां पे सदा,

रही मालामाल है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*पचासवाँ दिन-*

*7.10.21 गुरुवार*

**********************

*देश-दर्शन-2(चंडीगढ़-देहरादून)*

50A. 

नगर नियोजन की,

बना है मिसाल 

देवी चंडिका के नाम पे 

शहर ये बसाया है। 


गुलाबों का बाग 

झील सुखना अनोखी 

यहां,बाग बगीचों ने 

नया स्वर्ग ही सजाया है।


मिल्खा बलबीर 

युवराज और कपिल से 

खिलाड़ियों ने, भारत का 

शीश चमकाया है।


कचरे से मूरत 

बनाईं नेक चंद ने तो 

शिक्षा औ प्रशासन ने 

ऊंचे ला बिठाया है।। 


50B.

बत्तखों के झुंड 

लाखों तोते व प्रवासी खग,

निर्भय अरण्यवास 

हेतु यहां आते हैं।


सांभर हिरन मोर 

जैसे जीव जंतु 

अठखेलियां से 

दर्शकों का मन बहलाते हैं।।


सड़कें सजीली सीधी 

पेड़ लगे दोनों और, 

शीतल छाया में लोग 

गाड़ियां दौड़ाते हैं।


तन मन की खुशी को 

करने सजीव सारे,

भारत से सैकड़ों ही 

लोग यहां आते हैं।। 


50C.

द्रोण तपोभूमि 

राम राय जी का डेरा 

दून-घाटी में बसा ये  भव्य 

शहर सजीला है।


अफगानियों की 

धृष्टता का है गवाह 

यवनों की क्रूरता का 

इतिहास ही कंटीला है।। 


राजपूत गोरखा व 

गूजरों ने लूटा आज 

सुंदर बागों से 

फलदार व रसीला है।


मालसी राजाजी पार्क 

कालसी कलंगा भव्य,

घूमने के केंद्र 

लच्छीवाला और चीला हैं।।


50D.

सुंदर सहस्त्रधारा 

रोग मुक्त करें और 

गुरु राम राय 

दरबार भी निराला है।


शिव पे टपकती हैं 

बूंद टपकेश्वर में 

घंटाघर षटकोणी 

खड़ा रखवाला है।।


चंद्रवाणी कुंड 

ऋषि गौतम को याद करे

साईं दरबार 

भाव भक्ति का उजाला है।


तप ज्ञान और 

मनोरंजन के संगम सा,

पहने खड़ा ये ऊंचे 

पर्वतों की माला है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*इक्यावनवाँ दिन-*

*8.10.21 शुक्रवार*

**********************

*देश-दर्शन-3(लखनऊ-जयपुर)*


51A. अवध के शासकों की 

भव्य राजधानी रहा,

यहां की नफासत 

बड़ी ही अलबेली है। 


गोमती का तट 

शायरी का है अंदाज ए बयां,

भाषा भारती की छवि 

करे अठखेली है।।


कत्थक ने पाया यहां 

भव्य ही स्वरूप 

नृत्य गीत औ गजल 

शाम नित ही नवेली है।


लखनवी चाट, पान,

बिरयानी औ कबाब, 

चिकन कढ़ाई संग 

सजीली हवेली है।।


51B.

आसफउद्दौला का 

इमामबाड़ा शानदार 

अवध की वास्तु का 

स्वरूप दिखलाता है।


सत्तावन क्रांति का 

गवाह बना रेजीडेंसी, 

हमें इतिहास का 

सबक सिखलाता है।


ताजिए बारावफात 

ईद दशहरा जुलूस,

आपस के प्रेम का 

गवाह बन जाता है। 


लखनवी शान 

लखनऊ के नवाबी रंग 

लखनवी व्यंजनों में 

मन रम जाता है।। 


51C.

नगरी गुलाबी 

जयसिंह ने बनाई 

आज भव्यता में इसका 

न तोड़ मिल पाता है। 


स्वर्णिम त्रिभुज बना 

इसको मिला के ही तो, 

नजारा हवेली और 

किलों का दिखाता है।।


जादूगर वास्तुकार 

विद्याधर ने बनाया,

भारत का पेरिस 

शहर कहलाता है।


सौंदर्य सुधा का रस 

दिव्यता की दीप्ति मिले 

तब कहीं कोई जय-

-पुर बन पाता है।।


51D.

सात द्वार और 

किलाबंद तीन चौपड़ें हैं, 

शिल्पशास्त्र तत्व यहां 

सारे मिल जाते हैं।


शासकों के स्वागत में, 

रंगत गुलाबी और 

जादुई स्वरूप बना 

लोग बतलाते हैं।।


सरहदी चौकड़ी में 

गोविंद बिराजें 

रनिवास और महलों पे 

मेले लग जाते हैं।


हवा के महल तले 

केर सांगरी का साग,

दाल बाटी चूरमा,

दिलों को लूट जाते हैं।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*बावनवाँ दिन-*

*9.10.21 शनिवार*

**********************

*देश-दर्शन-4(पटना-कोलकाता)*

52A.

पाटन या पत्तन से 

पटना पड़ा है नाम, 

सोन-गंगा संगम पे

शहर बसाया था। 


किंवदंतियों में 

कहते हैं राजा पत्रक ने, 

रानी पाटली के लिए

इसको बनाया था।।


चंद्रगुप्त ने बनाई 

भव्य राजधानी यहां 

कण्व शुंग औ अशोक 

ने इसे सजाया था।


यवनों विधर्मियों ने 

क्रूरता से नष्ट किया,

भव्य भवनों को यहां 

धूल में मिलाया था।। 


52B.

गांधी सेतु पटना की 

शान है अनोखी 

कुम्हरार हरिमंदिर 

गोविंद गुरुद्वारा है।


गोलघर पटना-प्रतीक सा

खड़ा हुआ तो,

तारा घर ने ज़मीं पे 

नभ को उतारा है।।


सातशहीदों की 

प्रतिमाएं प्रेरणा बनी हैं, 

आश्रम सदाकत में 

शांति का नजारा है।


राष्ट्र एकता प्रतीक

संग्रहालयों से सजा,  

अगम कुआं की तो 

अथाह जल धारा है। 


52C.

कालीकाता सूतानॉटी 

गोविंदपुरा के तीन,

गांवों को मिला के 

बनी बस्ती ये निराली है।


प्लासी की लड़ाई जीत 

शासक फिरंगियों ने

नाम कोलकाता 

राजधानी ये बना ली है।।


महलों का शहर 

पूरब संस्कृति का केंद्र,

सृजन की कला 

जन-जन में निराली है। 


बंकिम रवीन्द्र 

ताराशंकर की कर्मभूमि 

दक्षिणेश्वरी विराजी 

माता महाकाली है।।


52D.

क्वार नवरात्रि 

कोलकाता का प्रसिद्ध पर्व 

उत्सव संगीत 

कण कण में समाया है। 


सत्यजीत ऋत्विक 

मृणाल रितुपर्णो ने भी 

बंग का सिनेमा 

सारे जग में फैलाया है।।


गॉथिक व रॉक 

इंडो-रोमन कला ने 

भव्य भवनों का भिन्न सा 

संसार ही सजाया है। 


कैसा कोलकाता देखा?

जात्रा नाटकों के बिना, 

'मिष्टि दोई' चखा नहीं 

पान नहीं खाया है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*तिरपनवाँ दिन-*

*10.10.21 रविवार*

**********************

*देश-दर्शन-5*

*(गंगटोक दिसपुर-इटानगर-इम्फाल)*


53A. 

कंचनजंघा के तले 

बसा गंगटोक 

भव्य प्रकृति यहां पे 

नित्य बदले नजारा है। 


हनुमान चौक 

झील सोमगो नाथू-ला दर्रा 

रूम टेक मठ 

शांति भक्ति का सहारा है।।


स्वर्ण मठ में हैं 

सौ से ज्यादा प्रार्थना के चक्र 

ताशीलिंग में पवित्र 

जल पात्र धारा है। 


बौद्ध धर्म व्यापक है 

सिक्किम की राजधानी, 

सिक्किम वो, 

लघुतम  प्रांत जो हमारा है।।


53B.

असम की राजधानी 

शांत और भव्य यहां 

सूताकाछी गांव 

जो अनोखा ही बसाया है। 


 प्रकृति निराली यहां

 पक्षियों का है प्रवास,

 सुंदर खगों ने ये 

 बसेरा ही बनाया है।।

 

'चाय की बोली' बाज़ार,

आश्रम वशिष्ठ दिव्य 

कांता-ललिता नदी का

संगम सजाया है।।

'मेखला-चादोर' यहां 

कपड़ा विशेष बने, 

हाथ-करघा का रंग 

जग को दिखाया है।।


53C.

नदी दिकरोंग 

अरुणाचल की प्राण-रेखा

तट पे इटा-नगर 

भव्य राजधानी है। 


'ईटा का किला' विशाल 

पन्द्रवीं सदी में बना, 

राज्यपाल का निवास 

कीर्ति की कहानी है।। 


गंगा झील के किनारे 

जीव जंतुओं के झुंड,

तिब्बती कला, घरों में 

जानी पहचानी है।


लामाओं की साधना के, 

केंद्र बौद्ध मठ बने, 

आये, जिसे मन में 

अनोखी शांति लानी है।। 


53D.

मणिपुर के 

टिकेंद्रजीत की शहादत का 

बना जो गवाह,

इंफाल वो निराला है।


कंगला-महल,

राजगद्दी अवशेष यहां,

वैष्णवीय मंदिरों ने 

भक्ति रस ढाला है।


स्वर्ण-गुम्बदों से  

गोविंद का मंदिर, 

जो नृत्य गान प्रेम की 

अनोखी पाठशाला है।


फैला भ्रम-जाल

पूर्व-उत्तर, विधर्मियों का, 

किंतु यहां व्याप्त

कृष्ण भक्ति का उजाला है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*चौवनवाँ दिन-*

*11.10.21 सोमवार*

**********************

*देश-दर्शन-6*

*(अगरतला-आईजोल-शिलांग-कोहिमा)*


54A.

हरोआ नदी के तट 

अगरतला बसा है, 

प्रकृति व संस्कृति का 

संगम विशेष है।


राजा कृष्ण माणिक्य ने 

रंगा माटी से हटा के,

राजधानी रूप में 

किया यहां प्रवेश है।।


नीर व उजन्त महलों का 

भव्य रुप दिखे, 

कानन रविंद्र 

विकृति का नहीं लेश है। 


लोकतंत्र पूरी भाव-

निष्ठा से दिखेगा किंतु 

लोगों के दिलों पे 

राज करते नरेश हैं।। 


54B.

पर्वत शिखर और 

गहरी घाटी के मध्य 

सदियों पुराना 

आइजोल देख पाओगे। 


दुर्त्त-लैंग शिखर 

तलोंग नदी का प्रवाह,

वन की समृद्धि

देखते ही रह जाओगे।।


बांस का चेराव नृत्य 

लोक पर्व रंग भरे 

ऊंचे झरनों में  

खुद खो के रह जाओगे।


तामदिल झील पर 

नाव की सवारी और 

आर्किड के रंग 

कभी भूल नहीं पाओगे।। 


54C.

नगर को घेरे खड़ी 

सुंदर पहाड़ियों ने 

स्वर्ग सा अनोखा 

यह शिलांग बसाया था। 


झरने व झीलों की 

जादुई दुनिया दिखा के,

शासक फिरंगियों के 

मन को लुभाया था।।


चेरापूंजी बादलों का 

घर औ मा-सिनराम 

बारिश ने यहां 

जल थल को मिलाया था।


आजादी से पहले

असम की ये राजधानी,

आजादी के बाद 

ये शिलांग कहलाया था।।


54D.

केवही के फूलों से 

केवहीमा पड़ा था नाम,

अंगरेजों ने तो इसे 

कोहिमा बुलाया है।


नागाओं की शक्ति और

एकता ने बार बार

युद्ध जो लड़े तो 

इतिहास ही बनाया है।।


घरों में घुमड़ते हैं

बादलों के झुंड और

प्रकृति नटी ने यहां

जीवन लुटाया है।


सुंदर पहाड़ 

ऊंचे झरने नदी बहाव,

कोहिमा ने ईश से ये

वरदान पाया है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*पचपनवाँ दिन-*

*12.10.21 मंगलवार*

**********************

*देश-दर्शन-7*

*(भुवनेश्वर-कटक-पुरी-रांची)*


55A.

पूरब की काशी 

कहलाता भुवनेश्वर जो 

बुद्ध-भूमि और 

शिव-शक्ति का उजाला है। 


धर्म चक्र केंद्र था 

अशोक के जमाने में तो 

खारवेल बना 

जैन धर्म रखवाला है।।


राजा रानी पत्थरों से 

मंदिर बना है भव्य,

मूरत में यहां 

जनजीवन को ढाला है। 


लिंगराज मंदिर 

मरीचि कुंड है प्रसिद्ध 

चौसठ योगिनी का भी 

मंदिर निराला है।।


55B.

महानदी के विशाल 

तट पे कटक बसा,

चांदी का शहर 

यह सबसे पुराना है। 


गंग वंश के किले व 

महलों के भव्य द्वार,

शूरवीर सैनिकों का 

सदा से ठिकाना है।। 


मंदिर परमहंस 

जल धारा का प्रवाह,

छिद्र है विशाल,

नहीं अंत मिल पाना है। 


भव्यता व दिव्यता की, 

संपदा समेटे यह 

शहर हमेशा रहा 

शत्रु का निशाना है।।


55C.

चारों धामों में प्रधान 

पुरी है विशेष,जहां 

जगन्नाथ स्वामी 

बलभद्र सँग राजे हैं।


बहिन सुभद्रा

दोनों अग्रजों के मध्य सोहें,

देवता भी द्वार पे 

बजावें दिव्य बाजे हैं।।


मन्दिर गुण्डिचा जहां 

रथ पे सवार हो के,

नित नई लीला,

नित नव रूप साजे हैं।


भात जगन्नाथ का,

तो जगत पसारे हाथ,

जगत के स्वामी

प्रेमबद्ध हो विराजे हैं।।


55D.

झील झरनों का

यह शहर सुहाना जहां, 

प्रकृति का बिखरा 

खजाना अनमोल है।


गोंडा की पहाड़ी 

भव्य जैविक उद्यान बना 

पांच-गाघ झरने का 

नहीं कोई तोल है।


घूमने वालों को 

स्वर्ग जैसा लगता है यहां,

पंछियों को देख बच्चे, 

करते किलोल हैं।। 


आदिवासियों के गांव 

सभ्यता बचाते अभी 

किंतु अब चढ़ा 

आधुनिक-ता का खोल है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*छप्पनवाँ दिन-*

*13.10.21 बुधवार*

**********************

*देश-दर्शन-8*

*(हैदराबाद-त्रिवेंद्रम-चेन्नई-बैंगलोर)*


56A. मूसी के किनारे 

भाग्य नगर बसा था कभी, 

आज हैदरा-बाद का,

नाम जाना जाता है।


कुतुब शाही की याद 

सागर हुसैन झील, 

चारमीनारों की वही 

शान दिखलाता है।।


स्थापत्य संस्कृति का 

संगम यहां के जैसा,

सारे भारत में कहीं 

नजर न आता है। 


हीरे मोतियों के रंग 

उसपे नवाबी ढंग,

भोजन नवाबी 

जो न खाए पछताता है।। 


56B.

कोरोमंडल का तट 

शिक्षा संस्कृति का केंद्र 

चेन्नई शहर 

दक्षि-ण में बेमिसाल है।


स्वच्छता सुरक्षा 

लोकप्रियता में बार-बार 

आता ये प्रथम 

बात खुद में कमाल है।। 


मौसम गरम किंतु 

दिल से नरम 

यहां मंदिरों व सड़कों का 

फैल रहा जाल है।


चिनप्पा नायक द्वारा 

चेन्नई मिला है नाम,

भारत का चौथा यह 

नगर विशाल है।। 

56C.

केरल की राजधानी 

दक्षिणी-पश्चिमी तट 

मौसम सदा-बहार 

अनोखा निराला है। 


प्रकृति की सुषमा औ

भव्यता विशेष यहां 

सागर पे सूरज का 

फैलता उजाला है।।


साराभाई अंतरिक्ष 

केंद्र है विशाल जहां 

बौद्धिक प्रयोगों की 

सफलता की माला है।


शिक्षा और सेवा का 

प्रभाव देखकर लगे,

शहर कहां है? 

ये बड़ी सी पाठशाला है।।


56D.


बेंगलुरू भारत का 

तीसरा शहर 

सारे साल यहां 

मौसम की रंगत 

सुहानी है।


होयसल और 

वोडीयार राजवंशों की तो 

शासन संपन्नता की 

बिखरी कहानी है।।


नगर बगीचों का 

दश-हरा यहां का खास  

सूचना-क्रांति व कला 

जानी पहचानी है। 


मिट्टी के किले 

सुमेर-महल औ लाल बाग

बेंगलुरु अनोखी 

सजीली राजधानी है।।


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*सत्तावनवाँ दिन-*

*14.10.21 गुरुवार*

**********************

*देश-दर्शन-9*

*(अहमदाबाद-राजकोट-उदयपुर-जोधपुर)*


57A.

साबरमती पे

गुजरात की ये शान,

कभी करणा-वती था 

नाम जाना पहचाना है। 


अहमदाबाद 

मान-चेस्टर है भारत का 

कर्म शीलता में इसे 

आगे ही तो जाना है।।


आशा भील ने बसाया 

बापू से हुआ प्रसिद्ध, 

वाणिज्य-उद्योग का ये 

प्रमुख ठिकाना है। 


कांकरिया झील 

जैन मंदिर व आश्रमों को,

एक बार देखने तो 

निश्चय ही जाना है।। 


57B.

गांधी जी की नगरी 

ये राजकोट है जहां पे 

गली-गली बापू का

स्वरूप ही समाया है।

 

रामकृष्ण आश्रम औ 

लालपरी झील यहां 

पतंगों के मेले ने तो 

सबको लुभाया है।।


जबूली बगीचा,बांध 

महल बड़ा ही भव्य 

बापू की छोटी से छोटी 

यादों को  सजाया है। 


कृषि पशुपालन 

उद्योग में कमाया नाम,

बापू के आशीष की 

बना ये प्रति-छाया है।। 


57C.

महल हवेलियों का 

शहर, बगीचे झील 

भव्यता उदयपुर की 

पहली पहचान है। 


कभी राजधानी था ये 

राजपूती शान की तो,

आज मोती मगरी में 

इसके निशान है।।


आयड़ नदी के तट 

सभ्यता बसी थी 

आज पिछोला समन्द,

राजपूती यश गान है।


रावल बप्पा व 

राणा सांगा की कहानी 

'राणा के प्रताप' से तो 

शिशु भी न अनजान है।।


57D.

साल भर तपता है

सूरज-नगर,

राव जोधा का शहर

जोधपुर कहलाया है।


मेहरानगढ़ भव्य

किला पत्थरों से बना,

नीले भवनों में,

नील-नभ उतराया है।।


जोधपुरी कोट 

पगड़ी की है निराली अदा,

शिक्षा ने यहां की,

इसे ऊंचे ला बिठाया है।


दरी मकराना और 

जूतियां सितारों जड़ी,

मरू-उत्सवों ने 

घर, दिल में बनाया है।।


अशेष💐💐



*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*अट्ठावनवाँ दिन-*

*15.10.21 शुक्रवार*

**********************

*देश-दर्शन-10*

*(भोपाल-ग्वालियर-उज्जैन-इंदौर)*


58A.

उच्च तकनीक के 

लगे हैं कारखाने और 

शिक्षा कला संस्कृति 

यहां पे बेमिसाल है।


भोजपाल नाम से 

बसाया राजा भोज ने तो 

मध्य राजधानी 

भव्य शहर भोपाल है।। 


गोंड परमार 

राजवंशों के अधीन रहा 

संपदा अनोखी 

बाग बगीचों का जाल है।।


गोलघर पटना व 

ताज आगरा में किंतु 

ताज गोलघर दोनों 

यहां भी कमाल हैं।।


58B.

गुर्जर तोमर 

प्रतिहारों ने संवारा,यहां

आज भी अनेकों 

अवशेष मिल जाते हैं।

 

गालव ऋषि से नाम 

पड़ा ग्वालियर, कभी

गोप-राष्ट्र था ये 

विशेषज्ञ बतलाते हैं।।


सिद्धाचल गुफा 

जैन भक्ति का प्रभाव पड़ा 

गूजरी महल में 

सुरों की गूंज पाते हैं।


क्रांति चेतना से जुड़ा 

प्रेम में पगा जहां पे 

पत्थर भी प्यार भरी 

कविता सुनाते हैं।। 


58C.

गुरु संदीपन का था

गुरुकुल जहां , कृष्ण- 

-बलराम ने भी 

-ज्ञान संपदा कमाई है।


राजा विक्रमादित्य 

शकों के थे विजेता वीर 

यश की ध्वजा यहीं से 

जग फहराई है।


कालिदास की कला का 

बनी है प्रमाण,

महाकाल महादेव ने भी 

कृपा बरसाई है।


सात पुरियों में 

एक मात्र है अवन्ति,

जहां कर्क रेखा 'काल' के

चरण छूने आयी है।।


58D.

बाजीराव पेशवा के

नायक मल्हार ने ही,

कान्ह के किनारे कभी 

शहर बसाया है।


उद्योगी नगर

शिक्षा स्वच्छता बनी मिसाल

अहिल्या रानी का यश

पीढ़ियों ने गाया है।।


नर्मदा किनारे बना

इंद्रेश्वर मन्दिर तो

इंदुर से इसने

इंदौर नाम पाया है।


पोहा नमकीन भुट्टे

सेव खिचड़ी का स्वाद

एक बार लिया है,वो

बार बार आया है।।


अशेष💐💐



*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*उनसठवाँ दिन-*

*16.10.21 शनिवार*

**********************

*देश-दर्शन-11*

*(आगरा-मथुरा-मिर्जापुर-गोरखपुर)*


59A.

यमुना किनारे 

इतिहास को समेटे खड़ा 

आगरा गवाह है 

पतन उत्थान का। 


मुगलों के वक्त 

राजधानी की समृद्धि देखी 

शासकों के लिए 

था सवाल आन बान का।। 


स्वातंत्र्य-समर में ये 

क्रांति केंद्र बना किंतु 

ताज माना जाता 

आज चिन्ह पहचान का।


विश्व की धरोहर है 

अनोखा किला, जहां पे

शिवा ने जवाब दिया 

हिन्दू स्वाभिमान का।।


59B.

कालिंदी की गोद की 

दुलारी मथुरा की व्यथा 

देश में विशेष 

तीन लोक में भी न्यारी है।


दिव्य जन्मभूमि 

कर्मभूमि योगिराज की ये 

जहां ब्रह्म आ के बना 

प्रेम का पुजारी है।। 


मंदिर कला के 

इतिहास औ प्रभाव के 

प्रमाण बने बैठे 

गली मोहल्ले अटारी हैं। 


भीषण विनाश 

दिव्य प्रेम का समन्वय 

ये पुण्य भूमि प्यारी 

भव्य मथुरा हमारी है।।


59C.

विंध्य की पहाड़ियों में 

गंगा के किनारे बसे

विंध्यवासिनी के भव्य

धाम  को निहारिये। 


तारकेश शिव 

सीताकुंड औ महा त्रिकोण 

तंत्र साधना के गूढ़ 

रूप को विचारिये।।


टंडा का प्रपात व

चुनार का किला विशेष 

पुण्यजल  में भी 

एक डुबकी तो मारिये।


अपने पिता का श्राद्ध

रामजी ने किया यहीं,

तीर्थ शिवपुर 

शिव नाम को उचारिये।।


59D.

नाथ पंथ गुरुओं की 

तपोभूमि सिद्ध-पीठ, 

गोरख-मछिन्द्र  धूनी 

यहीं पे रमाई है।


राप्ती और रोहिणी का 

संगम यहीं पे दिखे 

जैन बौद्ध पंथ ने भी 

नई शक्ति पाई है।।


गीता प्रेस भक्ति का 

प्रचार करती यहीं से 

दर्शनीय स्थलों ने

धूम सी मचाई है। 


गोरख के मठ के 

मुरीद बन जाते 

माघ मेले में जो खिचड़ी 

यहां पे कभी खाई है!!


अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*

*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*

*साठवाँ दिन-*

*17.10.21 रविवार*

**********************

*देश-दर्शन-12*

*(मुम्बई-नासिक-पुणे-नागपुर)


60A.

सात द्वीप जोड़ के 

बना है मुंबई जहां पे, 

गली-गली बसा एक 

नया हिंदुस्तान है।


जाति धर्म पंथ 

मतभेद का अभाव यहां 

मुंबई ही 'मुंबईकरों' की 

पहचान है।।


मुंबा,महालक्ष्मी,

माउंट मेरी, हाजी अली 

वित्त राजधानी,

फिल्म प्रेमियों की जान है। 


रेल बस सुविधा 

बेजोड़ है यहां की 

सदा दौड़ती मुंबई 

सारे भारत की शान है।।


60B.

कुंभ स्थली व 

ज्योतिलिंग त्रंबकेश

कभी पांडवों व राम ने 

बिताया बनवास है। 


पंचवटी,काला राम 

सीता गुफा,रामकुंड 

ब्रह्मगिरि राम की 

निशानी यहां खास है।। 


प्याज व अंगूर 

पहचान है यहां की और 

सैकड़ों उद्योग यहां 

लगे आसपास हैं।


नासिक है छोटा 

किंतु श्रद्धा भावना से भरा 

नगरीय चेतना का 

हो रहा विकास है।।


60C.

फैलते उद्योग और 

दौड़ते विकास में भी,

पुणे इतिहास की 

उजास अपनाये है। 


पावना इंद्रायणी की 

उच्छल तरंगे 

वीर मावलों की सैकड़ों 

कहानियां छुपाए हैं।। 


शिक्षा व संचार संग 

भव्य है गणेश चौथ, 

'मिसल-वडा' का स्वाद

मन को लुभाये है।


लोकमान्य,गोखले 

रानाडे व फुले की भूमि,

पुण्यक थी कभी 

आज पूना कहलाये है।। 


60D.

मिश्रित विचार  

चिंतना का है प्रतीक 

नागपुर मानवीयता की 

भव्य परछाई है।


भीमराव यहीं 

बौद्ध धारा अनुयाई बने,

केशव ने यहीं 

संघ चेतना जगाई है।। 


कला संस्कृति के प्रति 

प्यार है अपार 

नागपुरी संतरों ने

धूम ही मचाई है।


एक ओर तंग 

गलियों की है कतार,

दूजी ओर बड़ी कोठियों ने 

जन्नत बसाई है।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*इकसठवाँ दिन-*
*18.10.21 सोमवार*
**********************
*देश-दर्शन-13
*(अमृतसर-पानीपत-झांसी-*
*चित्तौड़-जैसलमेर)*

61A.
सांचा सतनाम
वाहे गुरु की कृपा से रचा
स्वर्णिम शहर की
अनोखी आन बान है।

गुरु रामदास ने बसाया
अमृत-सर जो 
सिख सेवा-धर्म की
विशेष पहचान है।।

गुरु-ग्रंथ सेवा में
लगे हैं सेवादार
बाग जलियां से मिटे नहीं
गोली के निशान हैं।

खाने पर रोक नहीं
रहने पे टोक नहीं,
तख्त श्री अकाल
दीन-सेवा ही विधान है।।

61B.
पांडवों के पांच
गांवों में से एक पानीपत,
युद्ध भूमि और
कर्म भूमि का प्रणेता है।

कितने ही युद्ध
इस भूमि पर हुए हैं किंतु
युद्ध-जेता ही तो बना
भारत विजेता है।।

सपनों से भी महीन
रेशमी कालीन बने,
रंगों में पुराण
इतिहास के प्रणेता हैं।

धर्म क्षेत्र भारत का
पानीपत है विशेष
मन को सहेज
निज ओर खींच लेता है।।

61C.
झांईं सी पड़ी जो देखी
राजा वीर सिंह ने तो,
झांसी नाम दिया ऐसा
लोग बतलाते हैं।

लक्ष्मी-बाई जो
मर्दानी कहलाई उस
वीरता पे शत्रु के भी
शीश झुक जाते हैं।

केशव से कवि,
चंद्रशेखर से वीर,
ध्यानचंद से खिलाड़ी,
पहचान बन जाते हैं

दस द्वार वाला किला
रानी का महल देख
रंग देश भक्ति के
नसों में घुल जाते हैं।।

61D.
वीर भूमि कर्म भूमि
शक्ति शौर्य की मिसाल,
अमर है कथा 
पद्मिनी के बलिदान की।

रक्त की नदी में
तैरती जवानियों ने लिखी,
पीढ़ियों के लिए गाथा
राष्ट्र स्वाभिमान की।।

गोरा और बादल की
वीरता का है प्रमाण,
बाजी थी लगाई
आन बान पर जान की।

धरती चित्तौड़ की
प्रताप सूर्य उगा जहां
कीर्ति पुष्प से सजी
धरा ये राजस्थान की।।

61E.
रेत के टीलों में
राव जैसल का कीर्ति गान
किलों औ हवेलियों की
रंगत निराली है।

बंजर औ प्यासी
मरू भूमि से घिरा प्रदेश
पटवा हवेली सजी
पत्थरों की जाली है।।

शीशे औ सितारों से
सजीली पाग बांधे लोग,
कपड़ों पे शीशों की
चमक उजियाली है।

जैसल-किला है मानो
सोने से बना, कि इस
किले की वजह से
रात लगती दिवाली है।। 

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*बासठवाँ दिन-*
*19.10.21 मंगलवार*
**********************
*देश-दर्शन-15*
*(अयोध्या-काशी-हरिद्वार-प्रयाग-चित्रकूट)*
62A. सरयू किनारे
प्रभु राघव की जन्मभूमि,
धाम श्री अवध
सूर्यवंश राजधानी है।

सब पुरियों में सिरमौर
दिव्य तीर्थभूमि
जैन धर्म की भी यहां
सैकड़ों निशानी हैं।

राम जन्मभूमि
हनुमंत की गढ़ी प्रसिद्ध
घाट गो-प्रतार
लगे सरयू सुहानी है।

सदियों का जो कलंक
वीरों ने मिटाया वहां
अब तो सवारी
रामलला की ही आनी है।।

62B.
बाबा विश्वनाथ के
त्रिशूल पे टिकी है काशी
नगरी की भैंरों सदा
करे रखवाली हैं।

पावन गंगा की
पुण्य धार का दरश मिले
काशी की अनोखी अदा
अलग निराली है।।

रेशम के वस्त्र
तंत्र-ज्ञान-सुरधारा बहे
यहां मृत्यु मिले
मोक्ष ही दिलाने वाली है।

तुलसी कबीर
रामानंद के भावों से भरी
काशी के घाटों पे रोज
मनती दिवाली है।।

62C.
पावन गंगा का द्वार
तीर्थ हरिद्वार
कुंभ मेले का स्वरूप
वाणी में नहीं समायेगा।

चंडी अंजना व
नीलकंठ महादेव
दिव्य दर्शनों को पा के
नीलधारा जो नहाएगा।।

हरि की पैड़ी में
एक बार जो भी आ के
पूज्य पूर्वजों की अस्थि
ब्रह्मकुंड बहाएगा।

पितरों की मुक्ति तो
कराएगा वो भाग्य-वीर
मोक्ष ही मिलेगा
फिर जन्म नहीं पाएगा।।

62D.
तीर्थराज नाम से
प्रयाग पहचाना गया
संगम किनारे दिव्य
नगर बसाया है।

ब्रह्मा ने किया था
सृष्टि पूर्णता का यज्ञ
गंगा यमुना ने इसे
लोक पावन बनाया है।।

भारत स्वतंत्रता की
क्रांति का प्रतीक
आश्र-मों व मंदिरों ने
देव-लोक सा सजाया है।

ऐसे वटवृक्ष का
दरश मिलता है यहां
सृष्टि अंत में भी
कभी नष्ट न हो पाया है।।

62E.
धाम चित्रकूट
मंदाकिनी के किनारे
भाव,प्रेम भक्ति निष्ठा के
सहज जाग जाते हैं।

धन्य हैं वे लोग
गुप्त गोदावरी में नहा के
कामद की नित्य जो
परिक्रमा लगाते हैं।।

रामघाट अत्रि-तीर्थ
फटिक शिला पे आ के,
जो भी रामभक्त
एक पल भी बिताते हैं।

भरत व राम के
पवित्र प्रेम का प्रतीक
चित्रकूट, जहां देव
मस्तक झुकाते हैं।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*तिरेसठवाँ दिन-*
*20.10.21 बुधवार*
**********************
*देश-दर्शन-16*
*(संक्षिप्त ब्रज आराधना)*

63A.
भादों काली रात
मथुरा में लियौ जन्म और
चढ़ी जमुना में है कें
गोकुल को आए हैं।

गोकुल में आय
क्रूर पूतना पछारी और
माटी के गोला हूँ
बड़ौ स्वाद लै कें खाए हैं।।

गोकुल में बढे उत्पात,
नंदगांव गए
नंदगाम जाय नित
माखन चुराए हैं।

नंद के कुमार
ग्वाल गैयन के प्यारे कान्हा
गोपिन्ह ने आंजुरी की
छाछ पे नचाए हैं।

63B.
बरसाने वारी के
अगारी औ पिछारी डोलै
जसुदा कौ लाल बनै
चतुर खिलारी है।

मोरपाँख शीश
गले फूलन की माल सोहै
वृंदावन कुन्ज कुन्ज
डोलै बनवारी है।।

खोर सांकरी में
दान मांगे ये दही कौ
याकूँ  जीत्यौ जाय प्रेम सों
ये प्रेम कौ पुजारी है।

जन्म जब दीजो
बृजवासी ही बनइयो हमें
नंद के दुलारे
यही अरज हमारी है।।

63C.
बलदाऊ भैया
बलदेव ग्राम में विराजे
दाऊजी को गांम
सदा रहै मनचंगा है।

मिसरी के मांट
दाऊ दादा कूँ परोसे जावैं
माखन के स्वाद संग
भंग की तरंगा है।।

छीर सागर के तट
सांझ कूँ छनै जो बूंटी,
'साठा' कौ हू मन
लेय 'पाठा' सी उछंगा है।

वस्त्रन कूँ फारि
कोड़ा भीगे से परैं जो पीठ,
भूल्यौ नांय जाय
बलदाऊ कौ हुरंगा है।।

63D.
होरी बरसाने
नंदगांम की अनोखी जहां
लट्ठ हूं परैं तो भक्त
राधे राधे गांवें हैं।

रंग की फुहार औ
गुलाल की बौछार देख
प्रेम की गली में भक्त
पंथ भूल जावें हैं।

गोपी बरसाने की औ
ग्वाल नंदगांम के
या रसभरी होरी कूँ
अनोखी ही बनावें हैं।

ग्वाल बरसाने के
रंगीली ब्रज नारिन सों
होली खेलिबे कूँ
फिर नंद गांव आवें हैं।।

63E.
ब्रज के विधाता
गिरिराज महाराज की तो
महिमा निराली पार
ब्रह्म हूं न पायौ है।

इंद्र कीन्हो कोप
ब्रज प्रलय मचाई
गिर-धारी ने यह मेरु
एक आंगुरी सधायौ है।।

गंग मानसी औ राधा-
श्याम कुंड की छटा कूँ
देख महादेव कौ 
जिया हू ललचायौ है।

धन्य ब्रजधाम
या की कहां लौं  बड़ाई करूँ
तीन लोक त्राता
गैया हाँकिबे कूँ आयौ है।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*चौंसठवाँ दिन-*
*21.10.21 गुरुवार*
**********************
*(क्रांतिवीर धर्मगुरु व सुधारक)*

63A. पुरखों का करने
उद्धार ऋषि शाप से
भागीरथ ने गंगा जी को
भूमि पे उतारा था।

गंगा ने धरा पे आके
भारत वसुंधरा को,
सस्य श्यामला के
शुद्ध रूप से संवारा था।।

भाई के लिए सुखों को
त्याग वीर लक्ष्मण ने
नींद जीत ली थी तब
मेघनाथ मारा था।

शकों को खदेड़ा
वीर विक्रम शकारि ने
चौहान ने गौरी को
शब्दभेदी से संहारा था।।

63B.
राणा परिवार की थी
शान मीराबाई जिसे
कृष्ण की छवि के आगे
कुछ ना सुहाता था।

ऐसी सती नारी थी
गांधारी, आंखें ढके रही
क्योंकि पति को ये जग
नजर न आता था।।

पन्ना ने बचाई
युवराज पे कुदृष्टि
चाहे नयनों के आगे
सोया पुत्र मारा जाता था।

युद्ध में निशानी
मांगने पे शीश दिया
ऐसी नारियों के आगे तो
सुमेरु झुक जाता था।।

63C.
वासुदेव फड़के
व कूका रामसिंह ने जो
क्रांति की मशाल
निज रक्त से जलाई थी।

लाला लाजपत और
धींगरा मदन लाल
के प्रयास से ये फिर
बुझने न पाई थी।।

जलियां का बदला
जो ऊधम ने लिया था
वो बदले की आग
बीस साल सुलगाई थी।

बंदा बैरागी की खाल
चिमटों से नोंची गयी 
धर्म की रक्षा में
बड़ी क्रूर मृत्यु पाई थी।।

63D.
शची-जगन्नाथ सुत
चैतन्य का प्रेमभाव
भारत में कृष्ण भक्ति
की बना मिसाल है।

तुलसी के मानस ने
राम भक्ति चेतना को
द्वार-द्वार पहुंचाया
किया ये कमाल है।।

वेद मंत्र भैंसे की
जुबाँ से बुलवाए किंतु
ज्ञानेश्वर गर्व से
हुऐ नहीं बेहाल हैं।

मंडन से ज्ञानी
रंतिदेव जैसे दानी
शुकदेव से बैरागी
से माँ भारती निहाल है।।

63E.
मध्व ने प्रचार
विष्णु भक्ति का किया तो
विष्णु स्वामी शुद्धाद्वैत
भक्ति मत के विचारी हैं।

राम भक्ति रामानंद
स्वामी ने बढ़ाई और
निंबारक कृष्ण भक्त
चक्र अवतारी हैं।।

संत रामदास
शिवराज के गुरू समर्थ
हिंदवी स्वराज्य के
प्रणेता यशधारी हैं।

रामकृष्ण और
दयानंद रामतीर्थ जैसे
सैकड़ों सपूत
मां के साधक पुजारी हैं।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*पैंसठवाँ दिन-*
*22.10.21 शुक्रवार*
**********************
*(हिन्दू जीवन दृष्टि व संस्कार)*
65A.
कमल कलश दीप
स्वस्तिक गदा व चक्र
ध्वजा शंख हिंदुओं के
चिन्ह शुभ-कारी हैं।

धर्म अर्थ काम मोक्ष
पूजा और पुनर्जन्म
चार आश्रमों में व्याप्त
भाव अविकारी हैं।।

जननी जनम-भूमि
गीता गायत्री व गंगा
गाय की सेवा में पूरी
आस्था हमारी है।

सत्य शिव सुंदर
अनंत अपनत्व लिए
हिंदू चेतना ही
विश्वगुरु अधिकारी है।।

65B.
सत्य ब्रह्मचर्य
अपरिग्रह अहिंसा औ
अचौर्य पांच यम
हर हिंदू को बताए हैं।

शुद्धता तपस्या ईश-
प्राणिधान व स्वाध्याय
तुष्टि व संतोष के
नियम अपनाये हैं।।

प्राणायाम पूरक
कुंभक और रेचक से
श्वास के प्रसार के
स्वरूप समझाए हैं।

आसन की सिद्धि रहे
मन की निवृत्ति
ध्यान धारणा समाधि
अष्ट योग अंग गाये हैं।।

65C.
ब्रह्मचर्य श्रम
साधना व तप तेज से
शरीर मन प्राण बुद्धि
आत्म का विकास है।

ज्ञान और शक्ति के
अनोखे संस्कार
धर्म पालक गृहस्थी में
महेश का निवास है।।

वानप्रस्थ में
निवृत्ति काल अपनावें
सेवा धर्म के सहारे
मुक्ति का यही अभ्यास है।

जीवन का शेष
सन्यास में बितायें
चार आश्रमों का प्राणी को
संदेश यही खास है।।

65D.
ईश्वर की श्रेष्ठतम
सृष्टि है मनुष्य
मन प्राण संग तीव्र बुद्धि
चेतना भी पाई है।

पंचतत्व से बनी ये
देह है अनोखी,
राष्ट्र मानवता जीव
ये सभी को सुखदाई है।।

देव-ऋषि-पितृ ऋण
जिसने चुकाये नहीं
सींग पूँछ हीन
पशुओं में ही गिनाई है।

जीवन शतायु स्वस्थ
सबल ही पाऐं हम,
कामना यह हिंदुओं ने
चित्त में बिठाई है।।

65E.
कैसी हो आहार शुद्धि
कैसा खानपान रखें,
भोजन अकेले
मानो पाप को बढ़ाना है।

सात्विक सुपाच्य
स्वास्थ्य शक्ति को बढाए
ऐसा भोजन सभी को
मिल-बांट के ही खाना है।।

स्वच्छ भूमि और
सुख आसन पे बैठकर
जीवन बचाने योग्य
खाद्य अपनाना है।

भोजन का अर्थ
पेट भरना या स्वाद नहीं
भोजन तो आत्म तेज
ब्रह्म से मिलना है।।

अशेष
*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*छियासठवाँ दिन-*
*23.10.21 शनिवार*
**********************
66A.
सारे जग में है
परमेश का निवास
सृष्टि चेतना का तत्व
ईश ब्रह्म अविनाशी है।

ब्रह्म ज्ञान रूप
सत चित व आनंद
तीन शब्दों में समाए
तीर्थ हरिद्वार काशी हैं।।

उत्तम गुणों का पुंज
आत्म-सुख का निधान
देवता प्रकृति रूप
पूज्य सुख राशी हैं।

पूजक उपासक है
मानवीय भावना का,
सच्चा व सरल
मेरे भारत का वासी है।।

66B.
हिंदू परिवार
समरसता का रूप जहां
सारे ही घटक
एक दूजे को संभाले हैं।

जाति उपजाति
संप्रदाय मत औ विचार
भाषा बोली वर्ण वर्ग
सैकड़ों निकाले हैं।।

किंतु एक साथ
मिल-बैठ के मनाते पर्व
उत्सव हमारे
मन को मिलाने वाले हैं।

होली गुरु-पर्व ईद
मिल के मनाते हम
भारतीय दुनिया में
ऐसे ही निराले हैं।।

66C.
मिल के चलें सभी
सलाह बातें मिल के हों,
मिल के ही अपने
विचार सहभागी हों।

देवताओं जैसा
साथ मिल व्यवहार करें
एक आत्मभाव
अनुभूति अनुरागी हों।।

प्राणी मात्र में भी
मेरे प्राण ही विचरते हैं,
यही आत्म चेतना
सभी के चित्त जागी हो।

वेद का बताया मार्ग
धारण करें व
हिंदू मात्र,अहंकार मद-
मोह मार्ग त्यागी हो।।

66D.
भारत है ऐसा देश
जहां राज-पुत्र
सर्व त्यागी बन
शांति सत्य पंथ अपनाता है।

सारे सुख त्याग
भोग वासना से मुक्ति पा के
जंगलों में वस्त्रहीन
जीवन बिताता है।।

रोगी-वृद्ध-मृत
प्राणियों को देख आहत हो
ज्ञान के प्रकाश हेतु
ध्यान में समाता है।

भूमिका प्रताप है,जो
भारत धरा का पूत
कोई बुद्ध, कोई महावीर
बन जाता है।।

66E.
सारे हिंदू बंधु हैं
न पतित यहां पे कोई
एकता की डोर से
सभी तो बंध जाते हैं।

वर्ण जाति भाषा प्रांत
भेद हैं परंतु हम
आपस में भेद-भाव
नहीं अपनाते हैं।।

तीर्थ कुम्भ पर्व जैसे 
मौके जब आते हैं तो,
खुशी में भिगो के
सारे भेद भूल जाते हैं।

मकर संक्रांति
गुड़ तिल की मिठास लिए
खिचड़ी बनाता कोई
सभी साथ खाते हैं।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*सरसठवाँ दिन-*
*24.10.21 रविवार*
**********************
*हिन्दू जीवन दर्शन*
67A.
आर्य सभ्यता के हम
आदि हैं  प्रणेता
सारे विश्व में मानवता के
ध्वज को उठाया है।

धरती ये सारी
परिवार है हमारा
अपनत्व का ये भाव
हिंदू मात्र में जगाया है।।

धर्म के अनंत रूप
मत है हजारों किंतु
भारत ने कभी द्वैध-भाव
न दिखाया है।

पारसी ईसाई
इस्लाम से अनेकों पंथ
भारत ने सबको
गले से ही लगाया है।।

67B.
जैन सिख बौद्ध सभी
पंथ हैं हमारे अंग,
हिन्दू भाव दृष्टि से
अलग नहीं मानें हम।

महावीर बुद्ध,गुरु
नानक गोविंद सिंह
हिंदुत्व पुरोधा का ही
रूप पहचानें हम।।

पंथ कोटि-कोटि किंतु,
जीवन की दृष्टि हिंदू
रही है, रहेगी सदा
सत्य एक जानें हम।

संगीत का सिंधु यदि
धर्म ये हमारा है तो,
बाकी संप्रदाय,मानें
'ताल व तराने' हम।।

67C.
अपने पराये का
विचार लघु चित्त करें
सब हों सुखी
सदा से चिंतन हमारा है।

सब हो निरोगी
कोई दुखी न नजर आए
विश्व का कल्याण
सदा मन में विचारा है।।

धरती आकाश जल
वायु अग्नि में ही नहीं,
शांति तीनों लोकों में
ये चिंतन की धारा है।

सागर की लहरों से
पंथ हैं अनेक किंतु
हिंदू धर्म दृष्टि
इस सिंधु का किनारा है।।

68D.
असमी बंगाली सिंधी
मलयाली औ तमिल
कन्नड़ मराठी
कश्मीरी गुजराती है।

उड़िया संथाली
कोकणी व तेलुगू पंजाबी
संस्कृत की बेटी
प्यारी हिंदी बन जाती है।।

मणिपुरी डोगरी
नेपाली भोजपुरी बोडो
उर्दू पुष्पों से भरा
बगीचा बनाती है।

अस्सी भाषाओं औ छह सौ
बोलियों से रची बसी
भारतीयता ही सारे
भारत की थाती है।।

68E.
भाषा भाव चेतना
विचार संपदा से सजा
साहित्य प्रणेता
एकमात्र मेरा देश है।

भिन्नता से भरा
अभिव्यक्ति में अनोखा
विश्वव्यापक  समग्र
संस्कृति का समावेश है।।

भारत ईरान मिस्र
रोम या यूनान सारी
सभ्यताओं का यही
निकास व प्रवेश है।

सभ्यता व संस्कृति का
विश्व को प्रकाश दिया
इसीलिए दुनिया में
भारत विशेष है।।

अशेष

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*अड़सठवाँ दिन-*
*25.10.21 सोमवार*
**********************
*हिन्दू जीवन दर्शन*

68A. वेद धर्म ग्रंथ ज्ञानी
गुणियों के आचरण
गुरुओं की वाणी में भी
धर्म ही समाया है।

गीता ज्ञान माधव ने
दिया अर्जुन को तो
उसमें भी कर्म का
महत्व समझाया है।।

पंथ संप्रदाय मत
पूजा व उपासना में,
धर्म का ही तत्वज्ञान
मानव ने पाया है।

सत्य का आधार ले के
किया जाए कर्म
ऐसा कर्म ही तो भारत में
धर्म कहलाया है।

68B.
पूजा पाठ गुरुद्वारे
याकि मंदिर व मठ
चर्च मस्जिदों में धर्म
नहीं मिल पाएगा।

जीवों का कल्याण
करने का सच्चा भाव है तो
धर्म का स्वरूप भी
सहज मिल जाएगा।।

लोक में उन्नति
परलोक में कल्याण करे
आत्म तत्व को ये
परमात्म से मिलाएगा।

धर्म है प्रकाश पुंज
भारत से निकला जो
जीवन तमस
सारे जग से मिटाएगा।।

68C.
पुण्य भूमि भारत की
रक्षा है हमारा धर्म
प्राण दान देकर भी
इस को बचाएंगे।

बासठ में चीन जैसे
शत्रु ने सताया उस
घोर अपमान को
कभी नहीं भुलाएंगे।।

पैंसठ इकत्तर व
कारगिल में जो
पाकिस्तान को हराया
याद फिर से दिलाएंगे।

कितना भी एक दूसरे का
हम विरोध करें
संकट में साथ सब
मिल के निभाएंगे।।

68D.
मत्स्य कूर्म नृसिंह
वाराह राम कृष्ण बुद्ध
वामन परशुराम
रूप अवतारी हैं।

सृष्टि का अनादि रूप
इन में समाया हुआ
बार-बार भूमि
पाप-पंक से उबारी है।।

गंगाजल ला के
रामेश्वर पे चढ़ाना
सेतु-रज गंगा में मिलाना
परंपरा प्यारी है।

रामेश्वर जैसे
ज्योतिलिंग  हैं द्वादश
जहां एकता की शक्ति
भाव साधना हमारी है।।

68E.
द्वारिका व जगन्नाथ
बद्री और कांचीपुरी में
आदि शंकर के चार
मठ बड़े नामी हैं।

चारों मठ हिन्दू धर्म
की ध्वजा को थामे हुए,
गद्दी पे विराजें
महाज्ञानी गुण धामी हैं।।

मानस पुष्कर ब्रह्म
बिंदु से सरोवरों पे
संस्कृति में श्रद्धा लिए
आते अनुगामी हैं।

भारत के प्रति मातृ भाव
है हमारा हम
देश के ऋणी व
मातृभूमि के प्रणामी हैं।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*उनहत्तरवाँ दिन-*
*26.10.21 मंगलवार*
**********************
*हिन्दू जीवन दर्शन*

69A.
न्याय सांख्य योग
पूर्व-उत्तर मीमांसा और
वैशेषिक जैसे दिव्य
दर्शन हमारे हैं।

गौतम कपिल व
पतंजलि जैमिनि
बाद-रायण कणाद ने
ये साधे व सँवारे हैं।।

कार्य और कारण का
ज्ञान व प्रमाण भेद
द्रव्य गुण कर्म
समवाय भी प्रचारे हैं।

जीवन की रचना
विकास व विचार हेतु
ज्ञान के गगन में
चमकते ये तारे हैं।।

69B.
राष्ट्र परिवार व
समाज और समग्र सृष्टि
एक आत्मदृष्टि के
विचार में समाई है।

"मेरा पंथ सही औ
तुम्हारा पंथ ठीक नहीं"
सोच ये एकांगी
होती बड़ी दुखदाई है।।

भारत की आत्म-दृष्टि
जीवन के प्रति है कि
एक सृष्टि-कर्ता ने
सृष्टि ये बनाई है।

धरती ये सारी
परिवार है हमारा और
धरा के निवासी हम
सभी बंधु भाई हैं।।

69C.
व्यक्ति से यहां पे
परिवार बनता है
परिवार का विकास ही
समाज को बनाता है।

सक्रिय समाज
राष्ट्रभाव का विकास करे,
राष्ट्र का विकास
विश्व भाव में समाता है।।

विश्व एकीभाव
जड़ चेतन को जोड़ता है,
जहां तुच्छ कीट भी
महत्व पूरा पाता है।

भारत की एकता का
प्राण है एकात्म-दृष्टि
जहां जीव मात्र
ईश-अंश कहलाताहै।।

69D.
जागरण हेतु
ब्रह्म काल अपनाते और
काया-शुद्धि को भी
आत्म शुद्धि से मिलाते हैं।

वट आंवला व नीम
पीपल सरीखे वृक्ष,
रोपण व रक्षण के
साथ पूजे जाते हैं।।

ऋतु अनुसार
मिताहार उपवास व्रत
सक्रिय बनाते औ
विकार को हटाते हैं।

यज्ञ होम अग्नि
द्रव्य शुद्धि को क्रिया से जोड़
हिंदू ज्ञान चेतना को
व्यापक बनाते हैं।।

69E.
भूमि हवा पानी
प्राणतत्व मिले ईश्वर से
वेद ग्रंथ इसे देव-ऋण
बतलाते हैं।

विद्या ज्ञान संस्कृति
धरोहर के रूप मिली,
ऋषि-ऋण मान
इसे शीश पे चढ़ाते हैं।।

काया मन बुद्धि
पितृ-ऋण का स्वरूप बने
पूर्वजों की कृपा से ही
स्वस्थ तन पाते हैं।

देश व समाज
परिवार के ऋणी हैं हम
इनकी सेवा से हम
ऋण ये चुकाते हैं।।

अशेष💐💐


*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*सत्तरवाँ दिन-*
*27.10.21 बुधवार*
**********************
70A.
चैत नवरात्रि
रामनवमी की धूम तो
वैशाख में परशुराम
जयंती मनाते हैं।

ज्येष्ठ वट सावित्री व
गंगा दशमी आषाढ़
व्यास पूजा श्रावण में
राखी बन्धवाते हैं।

भाद्रपद जन्म
अष्टमी से है पवित्र
क्वार नवरात्रि
दशमी को रावण जलाते हैं।

कातिक दिवाली
मार्गशीर्ष गीता की जयंती
पौष सिखों द्वारा
दशमेश पूजे जाते हैं

70B.
माघ में संक्रांति
खिचड़ी व तिल दान करें
शारदे के चरणों में
मस्तक नवाते हैं।

पंचमी बसंत
रितुराज के पधारने की
फागुन में शंभू
भोलेनाथ को मनाते हैं।।

होली का रंगीला पर्व
फागुन में आता तो
गुलाल के उछाल में
बूढ़े भी रंग जाते हैं।।

बारह महीने
साल भर के हैं ऐसे
जहां रोज मेले पर्व
औ त्योहार आते जाते हैं

70C.
विश्वामित्र पृथु व
दधीचि प्रहलाद ध्रुव
अर्जुन वशिष्ठ भृगु
भीष्म की कहानी है।

बुद्ध महावीर
रामानुज तुलसी कबीर,
चैतन्य पतंजलि से
योगी महा ज्ञानी हैं।।

भोज भर्तृहरी
हरिश्चंद्र और विक्रम की
कीर्ति विश्वव्यापी
नई पीढ़ी को बतानी है।

भीम अभिमन्यु जैसे
योद्धाओं का देश यह
आंखों में रखे जो आग
किंतु मन पानी है।।

70D.
ब्रह्मगुप्त जीवक
चरक धन्वंतरि से
औषधि के ज्ञाता
वैद्य संपदा हमारी हैं।

अंतरिक्ष में भी
इतिहास हैं बनाये कई
मंगल व चंद्र पे भी
जीत की तैयारी है।।

विश्व को दिया है
ज्ञान-गंगा का प्रवाह,
स्वर्ण पाखी था अतीत
तो भविष्य की भी बारी है।

भारत जो प्रेम भरी
बांसुरी बजाता और
शत्रुओं के लिए
काल रूप चक्र धारी है।।

70E.
भारत स्वतंत्रता के
कर्णधार गांधी
देशबंधु चित्तरंजन
सुभाष बोस प्यारे हैं।

लाजपत तिलक
विनायक श्यामा प्रसाद
ठाकुर रविंद्र
जनगण के दुलारे हैं।।

अब्दुल कलाम जैसे
देश के अनोखे रत्न,
अग्नि नाग व त्रिशूल
सीमा के 'सहारे हैं।

पांच बार जांची
परखी है अणु शक्ति किंतु
विश्व शांति रक्षा
लक्ष्य सदा से हमारे हैं।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*इकहत्तरवाँ दिन-*
*28.10.21 गुरुवार*
**********************
71A.
इंद्र,ताम्रवर्ण,नाग
सिंहल कटाह द्वीप
वारुण कुमार व
कशेरुमान जानिए।

नौवां था गभस्तिमान
दिव्य नवों द्वीपों पर
भारत के शासन का
सत्य पहचानिए।।

बौद्धमत लंका में
अशोक ने बढ़ाया
हिंद-चीन में कौण्डिन्य का
प्रताप व्याप्त मानिए।

सभ्यता का पाठ
सारे विश्व को पढ़ाया
अब फिर से भारत
विश्व गुरु होना ठानिये।।

71B.

कंबुज जो आज
कहलाताहै कंबोडिया
वहां पे भव वर्मा का
शासन विशाल था।

चंपा द्वीप सदियों
रहा था हिंदू धर्म केंद्र
इंडोनेशिया में भी
प्रभाव बेमिसाल था।।

सिंहबाहु पिता को
सिंहल द्वीप दिया,
सिंहपुर का प्रतापी
विजय ऐसा नौनिहाल था।

हिंदू राज्य शासन की
गरिमा अक्षुण्य रखी
हिंदू धर्म विश्व में
प्रभावी तीनों काल था।।

71C.
ब्रह्मा के तनय
विश्वकर्मा ने बनाया विश्व
श्रमिकों की कार्यशालाओं में
पूजे जाते हैं।

कर्दम व देवहुति
पुत्र थे कपिल मुनि
सांख्य शास्त्र प्रथम
प्रणेता कहलाते हैं।।

जैन तीर्थंकर थे
ऋषभदेव पहले जो
त्याग तप तेज का
चरम दिखलाते हैं।

भारत की भूमि
अभिनंदनीय है जहां पे
संत ऋषि ज्ञानी ही
समाज को चलाते हैं।।

71D.
विक्रमोर्वशीय
रघुवंश मेघदूत
अभिज्ञान शाकुंतल सी
साहित्य संपदा हैं हम।

ज्ञान की पिपासुओं को
ज्ञान सिंधु की सुधा से
सींचने को फैलाए
रहे हैं सदा बाहें हम।।

एकता के शत्रुओं को
रक्त का स्नान देते
राष्ट्रों घातियों के लिए
बड़ी आपदा हैं हम।

साहित्य कला व
स्वर साधना की सिद्धि हेतु
भारती वागीश्वरी की
दिव्याराधना हैं हम।।

71E.
संहिता ब्राह्मण
उपनिषद् व आरण्यक
श्रुति नामधारी
चार वेद ये हमारे हैं।

सृष्टि का उत्थान व
विनाश बतलाने वाले
अठारह पुराणों में भी
ज्ञान के नजारे हैं।।

मनु याज्ञवल्क्य व
बृहस्पति की स्मृति में
न्याय और जीवन के
सत्य ही उचारे हैं।

ब्रह्मगुप्त आर्यभट्ट
भरद्वाज भास्कर से
ज्ञानी औ विज्ञानी
भारती के नैन-तारे हैं।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*बहत्तरवाँ दिन-*
*29.10.21 शुक्रवार*
**********************
72A. अंबिका की साधना के
नौ दिन विशेष
चैत क्वार में दो बार
बड़ी धूम से मनाते हैं।

जेठ की अमावस
या सप्तमी को सावित्री की
साधना में वट शुभ
वृक्ष पूजे जाते हैं।।

आषाढी एकादशी से
कार्तिक एकादशी के
चार मास वर्षा के
शांति से बिताते हैं।

फागुन की कृष्ण पक्ष
चौदस को महादेव
महाशिवरात्रि पे
आशीष बरसाते हैं

72B.
भादों शुक्ल अष्टमी को
चार पुरुषार्थ और
कामना की सिद्धि हेतु
रखें उपवास है।

कातिक चतुर्थी
कृष्ण पक्ष की विशेष जब
पति के सौभाग्य हेतु
प्रेम की उजास है।।

अष्टमी अहोई
मां मनाती निज पुत्र हेतु
पुत्र का विकास
मां के लिए सदा खास है।

गांव या शहर
देश का कोई भी भाग रहे,
व्रत उपवास भाव
भक्ति का प्रकाश है।।

72C.
विष्णु,पद्म, मत्स्य,
ब्रह्मवैवर्त व लिंग,कूर्म
वामन,वराह,शिव,
अग्नि नारदीय हैं।

ब्रह्म भागवत
मारकण्डेय गरुड़ स्कंद
ब्रह्मांड भविष्य
सदा सदा नमनीय हैं।।

अठारह यह पुराण
मर्म बतलाते हमें,
किसे त्यागना है और
क्या-क्या करणीय हैं।

आत्म-अनुशासन को
साधते स्वयं
इसी कारण तो
भारतीय,विश्व वंदनीय हैं।।

72D.
पुंसवन सीमंत-उन्नयन
व जातकर्म
पंचम संस्कार नाम
शिशु का रखाते हैं।

निष्क्रमण अन्न-प्राशन
व चूड़ाकर्म कर्ण-वेध
उपनयन
संस्कृति को बचाते हैं।।

वेद ज्ञान पा के
समावर्तन करें जो द्विज
करके विवाह वो
गृहस्थ अपनाते हैं।

वन को प्रस्थान व
सन्यास औ अंत्येष्टि पूर्ण
सोलह विशेष
संस्कार कहलाते हैं।।

72E.
कुप्रथा अज्ञान व
समाज की कुरीतियों को
कोई दयानंद आ के
जड़ से हटाता है।

दीन दुखियों का कोई
सेवक विवेकानंद
मानव की सेवा को ही
मिशन बनाता है।।

हिंदू जाति संगठन
चेतना का लक्ष्य लिए,
केशव सा कोई त्यागी
जीवन खपाता है।

भारत की शक्ति
विश्व व्यापक बनाने हेतु
एक बलिदान दे तो
दूजा आगे आता है।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*तिहत्तरवाँ दिन-*
*30.10.21 शनिवार*
**********************
73A. अंधकार से प्रकाश
की दिशा पे चलते व
असत् को त्याग
सत्य मार्ग अपनाते हम।

मृत्यु से अमरता का
लक्ष्य साध लेते और
आत्म शक्ति साधना से
मृत्यु जीत जाते हम।।

भूमि सूर्य वायु
सभी सत्य के सहारे चलें
सत्य की प्रतिष्ठा हेतु
खुद बिक जाते हम।

राष्ट्र देव साधना में
जीवन का करें होम
यूं ही नहीं सारी
दुनिया में पूजे जाते हम।।

73B.
चीन अफगान थाई
गंधार बलूच
ब्रह्म देश व मलाया में भी
हिंद के निशान है।

मिस्र सूर्यवंशी
आंध्र-आलय ऑस्ट्रेलिया
असीरिया अमेरिका में
व्याप्त पहचान है।।

मानव की जाति का
विकास भी यहीं से हुआ
विश्व ने यहीं से पाया
ज्ञान औ विज्ञान है।

आज भी तो लोकतंत्र
सबसे बड़ा है और
सबसे विशाल ये
लिखित संविधान है।।

73C.
भारत के वासी
भारतीयों का संकल्प
इस भारत की संप्रभुता
शक्ति को बढाना है।

धर्म की स्वतंत्रता
समाजवाद का विकास
लोकतंत्र शक्ति में
भरोसा भी जगाना है।।

राजनीति न्याय
अर्थनीति अभिव्यक्ति धर्म
पूजा की स्वतंत्रता 
समानता दिलाना है।

रखें गरिमा का ध्यान
महिमा बढ़ाएं सदा,
एकता अखंडता को
दुष्टों से बचाना है।।

73D.
भारत का संविधान
राष्ट्रध्वजा राष्ट्र-गान
राष्ट्र के प्रतीक
पूजनीय साधिकार हैं।

जिनको हृदय में ला के
मिली है आजादी हमें,
ऐसे उच्च भाव
वंदनीय बार-बार हैं।।

एकता अक्षुण्य हो
अखंडता पे चोट न हो,
देश रक्षा हेतु
प्राणदान भी स्वीकार हैं।

समरसता व भ्रातृ भावना
बढाते चलें
संस्कृति का गौरव
हमारा कंठ हार है।।

73E.
प्रकृति की रक्षा व
विकास नदी वृक्षों का हो,
निर्मल आकाश
भूमि उर्वरा हमारी हो।

ज्ञान अर्जना का लक्ष्य
दृष्टि में हमेशा रहे
बुद्धि तीव्र,मन मृदु
काया बलधारी हो।।

देश संपदा को
नष्ट करने से बचें सदा
रक्षा ऐसे करें मानो
संपदा हमारी हो।

पालन करें जो कर्तव्य
राष्ट्र-सेवा हेतु
घोर विघ्नों में भी सदा
विजय हमारी हो।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*चौहत्तरवाँ दिन-*
*31.10.21 रविवार*
**********************
74A.
प्राण बलिदान दे के
राष्ट्र को बचाया
ऐसे वीर बलिदानियों को
नमन हमारा है।

स्वाभिमान रक्षा हेतु
शीश न झुकाया
ऐसे मानी स्वाभिमानियों को
नमन हमारा है।।

ज्ञान प्राप्ति हेतु
कष्ट भीषण उठाया
ऐसे साधक व ज्ञानियों को
नमन हमारा है।

दीन सेवा हेतु
सर्वस्व था लुटाया
ऐसे संत महादानियों को
नमन हमारा है।।

74B.
भोगते स्वतंन्त्रता जो
आज हम देशवासी,
घोर त्याग बलिदानों
का ये परिणाम है।

कर दी निछावर
जवानी परिवार सुख,
दीपक सा जीवन
जलाया निष्काम है।।

योगी वीतरागियों सी
ज़िंदगी बिताई सदा,
एक पल को भी
मिला नहीं, विश्राम है।

आज़ादी की नींव
जिन ईंटों पे टिकी है,
धन्य मौन बलिदानी
अभिनंदन प्रणाम है।।

74C.
भाषा वर्ग जाति-पाँत
घृणा के विषैले नाग,
डंसने को ताक रहे
इनको भगाएं हम।

पंथ मत सम्प्रदाय
भेद, कमज़ोर करें
राष्ट्र रचना के लिए
इन्हें भूल जाएं हम।।

आपस की कटुता को
कोसों दूर फेंक दें व
प्रेम एकता का
सुधा रस बरसाएं हम।।

राष्ट्र का विकास,यदि
लक्ष्य है हमारा, इस
लक्ष्य पूर्ति हेतु
हाथ साथ में मिलाएं हम।

74D.
भ्रष्ट आचरण से
स्वयम को बचाएं और,
देश सेवा हेतु कुछ
कष्ट भी उठाएं हम।

भारत हमारा,
विश्व-गुरु,सिरमौर बने,
इस हेतु, सोयी हुई
शक्ति को जगायें हम।।

कृष्ण जैसे नीति साधकों
की है,ये दिव्य भूमि,
कर्मयोग गीता का
स्वयं बन जाएं हम।

राम-राज्य,कोरी बातों से
न मिल पाएगा तो
आओ निज अन्तस्
में 'राम' को सधायें हम।।

74E.
लोकतंत्र सबसे
विशाल है हमारा,किन्तु
चेतना विचार शक्ति
अभी परतंत्र है।

राष्ट्र भाव अभी
आत्म-भाव से जुड़ा ही नहीं,
कैसे हम मानें ? हम
हो गए स्वतंत्र हैं!!

चारों ओर शत्रुओं के
जाल हैं बिछे, जहां से
भारत को तोड़ने के
होते षड्यंत्र हैं।

सिंधु से नगेन्द्र तक
भूमि भाव एक रहें,
'भारतीय एक'
यही एकता के मंत्र हैं।।

अशेष💐💐

*वंदे-मातरम (मातृ आराधना)*
*स्वतंत्रता अमृत महोत्सव*
*पिचहत्तरवाँ दिन-*
*1.11.21 सोमवार*
**********************
(*अंतिम पुष्पांजलि से  श्रृंखला समापन*)

75A.
रंग है अनेक और
ढंग भी अनेक किंतु
एक राष्ट्र एक भाव
भारत की शान हैं।

जनता की शक्ति
एकमत में छिपी है यहां
देश का विकासक भी
एक संविधान है।

जाति धर्म पंथ वेश
भिन्न खान-पान किंतु,
राष्ट्र के प्रतीक गीत
एक राष्ट्रगान हैं।

हमले आतंक घृणा
द्रोह से घिरे हों किंतु
चोट हो तिरंगे पे तो
देते प्राणदान हैं।।

75B.
भारत हमारा
सारे जग का गुरु है
यहां, ऋषि-मुनियों ने
सिद्धि साधना जगाई है।

देवता दनुज ज्ञानी
ध्यानी महादानियों को,
भारत की भूमि
बार-बार मन भाई है।।

हरि अवतार
गंगा-यमुना की धार यहां,
सुषमा अपार
हर ओर ही दिखाई है।

ऐसे देश में जो जन्म
मिला है जिसे भी, उसे
देवता भी देते,
जन्म लेने की बधाई है।।

75C.
भारत की शक्ति
जन-गण में समाई हुई,
जनता यहां की
अस्मिता की पहचान है।

जनता के लिए
जनता ही यहाँ शासक है,
जनता की शक्ति
लोकतंत्र का विधान है।।

जनता जनार्दन का
रूप है हमेशा यहां
जनशक्ति का नहीं
किसी को अनुमान है।

जनता के प्रतिनिधि
जनता के हैं प्रतीक,
जनता जो जागे
तोड़ डालती गुमान है।।

75D.
भारत धरा का रत्ना
भारत विशेष देश
भारत ने सदा
सत्य मार्ग ही दिखाया है।

भारत की भूमि पे
हुए हैं अवतार और,
ज्ञानी गुणी सुधियों ने 
मान भी बढ़ाया है।।

भारत रहा है पोत-वाहक
जगत का तो
शक्ति शील सत्य का
महत्व समझाया है।

भारत मिसाल बना
राष्ट्र भावना के लिए,
समता का भाव
सारे जग को सिखाया है।।

75E.
सिर पर हिमराज मुकुट चरणों तल सिंधु धार,
गंगा हैं हृदय हार प्रकृति उपहार है।

कहीं शंख घंटों की
गर्जना सुहानी लगे,
कहीं मेले पर्व
कहीं अनोखे त्यौहार हैं।।

मरुथल में कहीं रेत
सागर सी लहर रही,
कहीं खेत सरसों,
बसंत की बहार है।

देवभूमि रत्नभूमि
ज्ञान भूमि कर्मभूमि
मेरा भारत महान
स्वर्ग मुक्ति द्वार है।।

💐💐भारत माता की जय💐💐

[ बन्धुवर...!! सादर वन्दे मातरम..!!भारतीय स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के उपलक्ष  में 18 अगस्त से माँ भारती की 75 दिनों तक दैनिक काव्य आराधना का संकल्प लिया था। इसमें पंद्रह पंद्रह दिनों के खंड करते हुए प्रथम से पंचम खण्ड तक क्रमशः 1-2-3-4-5 घनाक्षरियों को प्रस्तुत किया गया।इस प्रकार कुल 225 घनाक्षरियों की रचना हुई। आज अंतिम प्रस्तुति के साथ इसे समाप्त कर रहे हैं। त्रुटियों को क्षमा करते हुए सुधि जन अपने सुझाव व प्रतिक्रियाओं से अवगत कराएंगे तो बहुत आभारी रहूंगा।
💐वन्दे मातरम💐











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