*शारदीय नवरात्र प्रथम दिवस की
हार्दिक मंगल कामना (7.10.21)
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1.पर्वतराज
हिमालय तनया
जगन्मातु महामाई।
प्रथम दिवस
मां पार्वती ही
शैलपुत्रि कहलाईं।।
वृष-वाहन
कर में त्रिशूल
मां मस्तक चंद्र विराजे
वाम हस्त में
पुष्प सुशोभित
मुख अनुपम
छवि राजें।।
धर्म अर्थ अरु मोक्ष
लक्ष्य पर
दृष्टि रहे संचारित।
मूलाधार चक्र में अवचेतन की
ताकत संचित।।
जग में सदा
कमलवत रहकर
जीवन शांत बिताएं।
अंत समय
छवि रहे आपकी
पद रज में
मिल जायें।।
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शारदीय नवरात्र द्वितीयदिवस की
हार्दिक मंगल कामना (8.10.21)
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2.ब्रह्मचारिणी
रूप अंबिका
द्वितीय दिवस सम्पूजित।
सच्चरित्रता
जीवन की निधि आत्मशक्ति संचारित।।
जपमाला
दक्षिण कर राजे
वाम कमण्डल सोहे।
श्वेत वसन
तेजस मुख मंडल,
सहज रूप मनमोहे।।
सत-चित-आनन्दरूप ब्रह्म की
प्राप्ति सुगम हो जाए
सदाचरण युत
भक्ति करे वो
कृपा आपकी पाए।।
कठिन समय आए तो शुभ पथ से
न कहीं डिग जाएं।
जीवन-सुख को
प्राप्त करें
फिर,शरण
आपकी पायें।।
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शारदीय नवरात्र तृतीय दिवस की
हार्दिक मंगल कामना 9.10.21
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3.मन चिन्तन को
करें नियंत्रित
माता आदि भवानी।
तृतीय दिवस में रूप चंद्रघंटा का है वरदानी।।
चन्द्र हमारे भावों का परिवर्तित रूप दिखाता।
घंटे का कंपन
ऊर्जा को
संचारित कर जाता।।
दश भुज में धनु
खड्ग गदा,
तिरशूल कमंडल राजे।
व्याघ्र-वाहिनी
मां के सन्मुख
द्वेष कष्ट भय भाजे।।
ज्ञान-कर्म
इन्द्रिय द्वारा
हों कर्म सरल
उपकारी।
निर्भय साहस
और विनम्रता
दो, हे जगदाधारी!!
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शारदीय नवरात्र चतुर्थ दिवस की
हार्दिक मंगल कामना 10.10.21
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4.चौथे दिवस
मातु कूष्मांडा
जग पावन कल्याणी।
करें कृपा
निज भक्त जनों पर दयामयी वरदानी।।
प्राणशक्ति
बल बुद्धि
अंड में जीव समान समाईं।
वृक्ष बीज के
अंतर्गत
पर देता नहीं
दिखाई।।
अष्टभुजी माँ
कर-कमलों में
अमृत कलश को धारे।
अंधकूप से
सकल सृष्टि को
जननी तुही उबारे।।
आद्य अजन्मा
शक्ति, आप
रवि-लोक निवासिनि माता।
कृपा करो माँ
सकल जीव पर,
शांति शक्ति की दाता।।
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*शारदीय नवरात्र पंचम दिवस की
हार्दिक मंगल कामना 10.10.21
(तिथि-क्षय)
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5.पंचम रूप
भवानी की छवि
दिव्य षडानन माता।
मातृ-शक्ति आधार
भक्त जन के
संकट की त्राता।।
सुत कुमार स्कंद
मातु के हिय
उत्सङ्ग विराजे।
रूप चतुर्भुज
सौम्य दृष्टि
कर पुष्प कमल
शुभ साजे।।
जन्म प्रणय
शुभ परम्परा की
तुम ही आदि प्रणेता।
मातृ रूप स्मरण
भक्तजन को
निर्भय कर देता।।
पद्मासना
सिंहवाहिनि माँ
कृपा सुधा बरसाओ।
मन के तारक-हनन हेतु
हिय में
स्कंद जगाओ।।🙏🏼
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शारदीय नवरात्र षष्ठ दिवस की
हार्दिक मंगल कामना 11.10.21
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6. षष्ठ दिवस माता कात्यायनि
मंगल रूप पधारो।
दिव्य चार भुज खड्ग हस्त
निज जन के कष्ट निवारो।।
ऋषि कात्यायन सुता
अंबिका महिष विदारण हारी।
भाव-पुष्प स्वीकारो माता!
करके सिंह सवारी।।
यमुना तट पर गोपीजन ने
कात्यायनि को पूजा।
कृष्ण मिलें पति रूप
और वरदान न चाहा दूजा।।
एक हाथ में कमल
अभय मुद्रा में माँ वरदानी।
कृपा करो ब्रज अधीश्वरी
जगदम्बा शिवा भवानी।।
💐शारदीय नवरात्र सप्तम दिवस की
हार्दिक मंगल कामना 12.10.21
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7. कालरात्रि भैरवी मृडानी
चामुंडा महाकाली।
दुष्ट विनाशक रूप
चंडिका रुद्राणी कंकाली।।
प्रेत पिशाच असुर
माँ तेरे सुमिरन से थर्राते।
तेरी शरण गहे जो
उस पर
कभी न दृष्टि उठाते।।
मुंडमाल त्रय-नेत्र
रूप विकराल
वर्ण है काला।
श्वासों में है अग्नि ज्वाल
भक्तों को सौम्य निराला।।
गर्दभ वाहन
अभय हस्त
दूजे में खड्ग उठाये।
वह निर्भय हो जाय जिसे,
माँ शुभंकरी अपनाए।।
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शारदीय नवरात्र अष्टम दिवस की
हार्दिक मंगल कामना 13.10.21
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8. वृषभासना महागौरी
अष्टम दिन तुमको ध्यावें।
सकल पाप हों नष्ट
और मन वांछित
फल हम पावें।।
चारभुजा
कर में त्रिशूल
डमरू मनभावन सोहे।
शांत सौम्य शुभ-रूप
सर्वदा
भक्तजनों को मोहे ।।
शिव के हेतु
कठिन तप साधा
पड़ा शुभ्र वपु काला।
शिव दर्शन से हुआ
महागौरी का रूप
उजाला।।
गौरी पूजन हो विधि से
कन्याएं प्रिय-वर पातीं।
सुखदायक
परिवार मिले
जो मां गौरी को ध्यातीं।।
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शारदीय नवरात्र नवम दिवस की
हार्दिक मंगल कामना 14.10.21
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8. सिद्धि मोक्ष
वरदायिनी दुर्गा
सिद्धि-दात्री माता।
नवम दिवस
जो करे साधना
अक्षय शुभ
फल पाता।।
शंख चक्र और
गदा पद्म युत,
मंगल रूप
सम्हारा।
नारायणि यह
सकल सृष्टि
तव शक्ति तत्व
विस्तारा।।
कन्या-भोजन से माता,
पल में प्रसन्न
हो जातीं।
अपनी वरद सम्पदा
भक्तों, के हित
सहज लुटातीं।।
यश बल शक्ति
सकल सुख माँ,
तव चरणों में
हम पावें।
तेरे चरणों की
रज तज
हम कहीं और
ना धावें।।
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शारदीय नवरात्र पर्व आप सभी को मंगलकारी हो। हार्दिक प्रार्थना..!!
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