मित्र बन्धु परिचित शुभ चिंतक
साथी और परिवारी।
विजय-पर्व पर बन्धु जनों को
शुभ कामना हमारी।
1.क्षमा दया सद्भाव सत्य का
मुझ पर सेतु बनाओ।
करुणा के शाश्वत प्रतीक
हे राम हृदय में आओ।।
मेरे मन को शुद्ध करो
अपना आवास बनाओ।
करुणा के शाश्वत प्रतीक
हे राम हृदय में आओ।।
2.मेरा मन मारीच
सुखों के हेतु मुझे ललचाता।
आलस रूपी कुंभकरण
हावी हो मुझे लुभाता।।
व्याकुल होता, विपदा में
जब पंथ नजर ना आता।
देखूं जो अन्याय,
विभीषण बना
न कुछ कर पाता।।
कायरता का ताप मिटे
वह कृपा दृष्टि बरसाओ।
करुणा के शाश्वत प्रतीक
हे राम हृदय में आओ।।
3.मुकुट त्याग कर तुमने
वन का कंटक-पथ अपनाया।
जो भी पीड़ित मिला,उसे
बढ़कर के गले लगाया।।
शोषित जन की शक्ति बने
फिर उन्हें सशक्त बनाया।
अहंकार को काट सत्य को
सिंहासन दिलवाया।।
पशु-बल व्यापक हुआ उसे
अब उचित जगह दिखलाओ।
करुणा के शाश्वत प्रतीक
हे राम हृदय में आओ।।
4.प्रेम तुम्हारे जैसा अब
भाई मैं नजर ना आए।
आज्ञा पालन हेतु पुत्र भी
बार-बार सकुचाये।।
अब न सिया सी तिया
संकटों में जो साथ निभाए।
कहां मिले हनुमान
शरण में जो सर्वस्व लुटाये।।
अट्टहास करता रावण
स्थायी मौन कराओ।
करुणा के शाश्वत प्रतीक
हे राम हृदय में आओ।।
5.वंचित जन की सेवा हित
स्वर्गिक-सुख को ठुकराते।
स्वार्थ हीन सहयोगी बन,
फिर तुम आगे बढ़ जाते।।
आश्रयहीन मिला तो तुम
अंतिम आश्रय बन जाते।
तुम ने सिखलाया हमको
कैसे निभते हैं नाते।।
अपने इस सेवक की
कुटिया का दीपक बन जाओ।
करुणा के शाश्वत प्रतीक
हे राम हृदय में आओ।।
6.भील निशाचर वानर केवट
सबको पास बिठाया।
अहंकार का सिंधु बांध
सच का पत्थर तैराया।
शासन दिया दूसरों को
खुद निर्वासन अपनाया।
खुद निर्मोही बन, सबको
उनका अधिकार दिलाया।।
मैं 'गुण-कौशल' हीन
एक लघु दृष्टि इधर भी लाओ।
करुणा के शाश्वत प्रतीक
हे राम हृदय में आओ।।
💐💐💐
विजय दशमी पर्व की हार्दिक मंगलकामना
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