एक राजा अपने गले में सुन्दर मोतियों की माला पहना करता था। वह माला उसे बहुत प्रिय थी।
सामने गले में लटकी तथा सीने पर झूलती माला को देख कर राजा को अपार आनंद का अनुभव
होता था।एक दिन वह माला खिसक कर पीठ की ओर चली गयी। इससे वह राजा की आँखों से ओझल हो गयी। राजा ने सोचा की वह खो गयी इसलिए उसे खोजने का आदेश दिया।
बहुत खोजबीन के बाद जब माला का पता नहीं लगा तब राजा को बड़ा दुःख हुआ।तब एक व्यक्ति आगे आया और
उसने राजा के कंधे पर हाथ रख कर माला सामने सीने की ओर खींच दी।माला देख कर राजा प्रसन्न हो गया।
इसी प्रकार आत्मा हमारे अन्दर है तथा हम आत्मसुख को बाहर खोजते हैं और उसके न मिलने पर दुखी भी होते हैं।
यह समझने का विषय है की हम साधारण जीव नहीं हैं। हमें आत्मा की शक्ति को पहचानना चाहिए।
यही वेदांत का सार रूप है।
सामने गले में लटकी तथा सीने पर झूलती माला को देख कर राजा को अपार आनंद का अनुभव
होता था।एक दिन वह माला खिसक कर पीठ की ओर चली गयी। इससे वह राजा की आँखों से ओझल हो गयी। राजा ने सोचा की वह खो गयी इसलिए उसे खोजने का आदेश दिया।
बहुत खोजबीन के बाद जब माला का पता नहीं लगा तब राजा को बड़ा दुःख हुआ।तब एक व्यक्ति आगे आया और
उसने राजा के कंधे पर हाथ रख कर माला सामने सीने की ओर खींच दी।माला देख कर राजा प्रसन्न हो गया।
इसी प्रकार आत्मा हमारे अन्दर है तथा हम आत्मसुख को बाहर खोजते हैं और उसके न मिलने पर दुखी भी होते हैं।
यह समझने का विषय है की हम साधारण जीव नहीं हैं। हमें आत्मा की शक्ति को पहचानना चाहिए।
यही वेदांत का सार रूप है।

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