शनिवार, 27 अक्टूबर 2012

एक दिन खेलते समय एक बालक ने अपनी परछाई देखि।उसे बड़ा आश्चर्य हुआ।उसे छूने  के लिए वह अपनी खोपड़ी पर हाथ न रख कर उसके पीछे भागने लगा। वह जितना उसके पीछे दौड़ता उतना ही वह परछाई उससे दूर भागती।
अंत में उसकी माँ ने उसे रोका और कहा कि अगर परछाई के सर पर हाथ रखना है तो अपने सर पर हाथ रखो।उसने जैसे ही अपने सिर पर हाथ रखा , उसके हाथ में परछाई का सिर आ गया।
इसी प्रकार सैकड़ों देवी देवता स्वर्ग नरक आदि सभी हमारे अंतर्मन में ही हैं। यदि सत्य को पाना चाहते हो तो परछाइयों को भूल जाओ और अपने भीतर के आत्मतत्व को जानने की कोशिश करो।
जब तुम अपने बारे में सोचने लगोगे तो सत्य का साक्षात्कार अवश्य होगा।

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