शनिवार, 4 अक्टूबर 2025

समाचार का व्रत रखिए

आजकल नकारात्मक समाचार ज्यादा बिकते हैं। हमारे समाज में ज्यादातर लोग एक प्रसिद्ध इन्सान के जुर्म का मुकदमा देखना किसी वास्तव में महान इन्सान की जीवनी देखने से ज्यादा पसन्द करते हैं। एक समाचार पत्र जिसकी मुख्य खबर किसी नवीनतम दुःखद घटना का खुलासा कर रही है उसकी प्रतियां उस खबर से जो एक नवीनतम वैज्ञानिक खोज के बारे में बता रही है, से ज्यादा बिकेंगी। 

असली परेशानी यह है कि नकारात्मक खबरें सुनने और देखने का नशा बड़ी आसानी से हो जाता है। हम लोगों में से अधिकांश के दिन की शुरुआत सिर्फ अपराध, दुर्घटनाओं और देर रात को हुई सनसनीखेज खबरों से होती है जिनसे किसी चरित्र निर्माण की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

यद्यपि कई समाचार पत्रों के जरिए अत्यन्त उत्तम किस्म की सूचनाएं और खबरें भी मिलती हैं तथा अनेक टी.वी. कार्यक्रमों से भी बहुत सी बुद्धिमत्ता की बाते सीखी जा सकती हैं किंतु यह लाभ अत्यंत अल्प है। सत्य तो ये है कि हम जिस समाचार पर आज अपने मस्तिष्क का ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं उसका चुनाव करने की आवश्यकता है। सुबह इससे पहले कि हम सुबह का अखबार पढ़े हमारे दिमाग में एक उद्देश्य होना चाहिए। इसको हम सिर्फ समय काटने का साधन नहीं बल्कि सूचना साधन की तरह उपयोग करें जो हमें ज्यादासमझदार बनाएगा।

स्वयं को समाचार के नशे से दूर करने के लिए हम सात दिन के लिए समाचार के व्रत का अनुसरण कर के देखें और कसम खाएँ कि हम समाचार पत्र की एक भी नकारात्मक कहानी नही पढ़ेंगे या एक भी नकारात्मक खबर टेलीविजन पर नहीं देखेंगे। 

हम लोग दो बातों पर ध्यान दें। पहली चीज़ वास्तव में सूचनाओं का ज्ञान न होने से हमें किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। हम इसके बाद भी उन अत्यधिक महत्वपूर्ण खबरों के बारे में अपने दफ्तर और घर में लोगों से मिलकर जान ही जाएंगे। दूसरी चीज़ हम बहुत शान्त और निश्छल महसूस करेंगे। इसके अलावा सात दिन का समाचार का उपवास एक और फायदा देता है वह है अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए समय का लाभ।  💐शुभम भवतु

मंगलवार, 23 सितंबर 2025

आचार्य चतुरसेन साहित्य अंश

हिंदी भाषा पर लघु कविता (हिंदी दिवस )

हिंदी दिवस पर बालकों हेतु अभ्यास हेतु कुछ लघु काव्य रचनाएं-:

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1.भारत की परिभाषा हिंदी।

जन-जन की अभिलाषा हिंदी।। 

ज्ञान कला विज्ञान समाहित,

जन गण मन की आशा हिंदी।।


पलती है संस्कृत अंचल में,

हर दिल में हिंदी खिलती है।

गर्व हमारा शान हमारी 

मन के भावों में मिलती है।।


हिंदी भारत की प्रिय बोली 

ज्यों माथे पर अक्षत रोली। 

हिंदी है मस्तों की टोली, 

जीवन के रंगों की होली।।


हिंदी से है अपना जीवन, 

हिंदी से सुरभित है तन मन।

हिंदी से विकसित है चिंतन, 

हिंदी ही अपना जीवन धन।। 


हिंदी को बढ़ कर अपनाएँ, 

हिंदी के सेवक बन जाएं।

नव चिंतन हिंदी में ला कर,

आओ इसका कोष बढ़ाएं।।

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2. सरल सहज मधुरिम बोली,

जैसे हो मीठी गोली।

मां के आंगन की यह माटी, 

ज्यों हो बिटिया की डोली।। 


मिलजुल कर यह सब को बांधे, 

जीवन का हर संकट साधे।

भारत की यह पूर्ण आत्मा, 

देश शक्ति को भव्य बना दे।। 


सरस्वती का सच्चा सुत वह,

जो अपनी भाषा को साधे। 

भाषा से मिलता सम्मान,

यही सत्य जीवन का ज्ञान।।


भाषा खोले मन के द्वार,

भाषा से ही जगें विचार।

अभिव्यक्ति का यह आधार, 

भाषा बहु गुण का विस्तार।।


भाषा पर रखिए अभिमान,

यह जीवन का दिव्य विधान।

भाषा रखे स्वरूप अनेक,

सभी एक से बढ़कर एक।।

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3. ज्ञान की ज्योत जलाती है हिंदी। आशा का भाव जगाती है हिंदी।।

ज्ञान कथा कविता की यह गंगा।

सत्य की राह बताती है हिंदी।। 


सूर के कान्हा का प्यार है हिंदी,

बालक की मनुहार है हिंदी। 

मैया का प्यार दुलार है हिंदी,

प्यार भरा उपहार है हिंदी।।


वीरों की यह तलवार है हिंदी, 

वाणी का वज्र प्रहार है हिंदी।

रसमय प्रेम सिंगार है हिंदी,

भावों की अमृत धार  है हिंदी।। 


हिंदी की ताकत, माने ये दुनिया।

हम ही नहीं, पहचाने ये दुनिया।।

कोटि कला सुविचार की वाहक,

भाषा है हिंदी ही, माने ये दुनिया

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4. हिंदी हमारी शान और पहचान दोस्तो। 

सारी धरा पे गूंजता ये गान दोस्तो।। 

मां भारती के कंठ में मणिमाल सी पड़ी, 

भाषा है भारती का स्वाभिमान दोस्तो।। 


तुलसी कबीर जायसी मीरा का गान है मांभारती के भाल पे  बिंदिया समान है। हिंदीहै गद्य काव्य की सुंदर सी वीथिका, साहित्य में हिंदी का बड़ा योगदान है।। 


भाषा ये धर्म कर्म की,जीवन के मर्म की, भाषा हमारी भावना पहचान बन गई। हिंदी हर एक योजना का शक्ति केंद्र है, हिंदी ही हर विकास का अनुमान बन गई।। 


भाषा पे गर्व करते जो वो ही महान है, निज भाषा गर्व ही विकास का विधान है। 

हिंदी को मान दे न सके यदि दिलों में हम,नादान ही रहे हम नहीं ज्ञानवान हैं।।

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5.बचपन में माँ ने सिखलाई,

पहली बोली पड़ी सुनाई।

पढ़ते पढ़ते गीत बनाये, 

मन में मधुर भाव ले आए।। 


मिलजुल कर यह सबको बांधे,

रिश्तो में रस भी ये साधे।

गूंजे भारत के कण-कण में, 

सदा विराजे जन गण मन में।। 


हिंदी कविता कथा कहानी,

हमको लिटा  सुनातीं नानी। 

हिंदी ने ही बोध कराया,

भला बुरा हमको समझाया।। 


हिंदी से खुद को पहचाना, 

हिंदी से हर सच को जाना।

हिंदी को पहचान दिलाएं, 

चर्चा में हिंदी अपनाएं।। 


हिंदी हस्ताक्षर जब करते,

तुच्छ भाव मन में क्यों भरते? 

भाषा व्यवहारों में लाओ,

अब हिंदी से मत शरमाओ।।

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6.हिंदी जोड़े दिल से दिल को,

यह भारत भाषा का संगम। 

उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम, 

सभी दिशाओं में यह कायम।।


भाषाओं की बगिया, जिसमें 

हिंदी खिला गुलाब है प्यारा। 

भाईचारे की खुशबू से 

महकाती है आंगन सारा।। 


भाषा का संसार विशेष, 

यह व्यापक है देश विदेश।

भाषा संस्कारों की माता,

भाषा मैया का जगराता।।


भाषा पीरों की कव्वाली 

भाषा नहीं विचार खयाली।

भाषा ने अब पर फैलाये, 

अब यह सही उड़ान दिखाये।।


इस उड़ान को हम पहचानें 

हिंदी की महिमा को जानें।।

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7.सत्यम शिवम सुंदरम की 

परिभाषा है प्यारी हिंदी।

संस्कृत शील प्रमाण रूप 

भाषाओं में न्यारी हिंदी।।

ऋषि मुनियों की संस्कृति की ध्वनि लगती है उजियारी हिंदी। 

भाषाओं के पुष्प उगाने, 

बनी हुई  है क्यारी हिंदी।।

जीवन की सच्चाई, 

अपनी भाषा हमें बताती है। 

हम भटके तो भाषा ही तो, 

सही राह दिखलाती है।।

भाषा से अस्तित्व हमारा 

भाषा भारत की पहचान।

भाषा से समृद्ध बनेंगे 

हिंदी हिंदू हिंदुस्तान।।

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8.ये कविता उपन्यास नाटक जो सारे। बने आज भाषा के अंतिम सहारे।। 


मधुर धार गीतों की तू भी बहा रे!

सुगढ़  छंद गंगा में तू भी नहा रे!!


हिंदी हमारे विचारों की थाती। 

हिंदी हमारी है अंतिम संगाती।। 


कला साधना को सुगम ये बनाती। 

बुझे मन को खुशियोंसे यहहै सजाती।। 


सदा अपनी भाषा से गर्वित रहें हम। 

हैं बिखरे जो मोती वो संचित करें हम।। 


यह हिंदी ही चिंतन को अद्भुत बनाए। 

जो सोएं तो रंगीन सपने दिखाए।।


बनें  राष्ट्रभाषा के हम सब पुजारी। 

रहे शीर्ष पर कल्पना ये हमारी।।

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9.सबका गौरव सबका आदर 

अमर प्यार है ये हिंदी।

मां की मधुर नेह छाया, 

शिशु का दुलार है ये हिंदी।। 


छोटी तुतलाती जुबान की 

प्यारी बोली है हिंदी।

सत असत्य सुख दुख में सच्चे, 

सुख की टोली है हिंदी।।


संस्कृत भाषाओं की मां 

तो उसकी बेटी है हिंदी। 

तत्सम शब्दों की शैया पर,

सुख से लेटी ये हिंदी।। 


हिंदी हर भाषा को पल में 

अपने साथ मिला लेती।

अपने दामन में ये,हर भाषा के 

फूल खिला लेती।।


हिंदी भाषा मात्रा नहीं,

वह तो है जीवन का व्यवहार।

भाषा ही साहित्य प्रेमियों 

को है भारत का उपहार।।

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10.प्रगति पंथ पर हमें चलाकर 

आगे ले आये हिंदी।

अवसर आए तो शब्दों से 

देश जगाए यह हिंदी।।


टूटे अरमानों  को जीवन 

गीत सुनाए यह हिंदी।

एक साल बस इसी दिवस 

क्यों पूजी जाए ये हिंदी।।


हिंदी का हर दिवस हमें 

थोड़ा नीचे ले जाता है।

भाषा के आडंबर को यह 

आइना दिखलाता है।। 


अंग्रेजी में परिचय देते 

हिंदी से शरमाते हम।

विडंबना है फिर भी हिंदी 

के सेवक कहलाते हम।।


हिंदी को अपने तन मन में 

खुशबू बना बसाएं हम।

हर दिन तो हिंदी का है,

क्यों हिंदी दिवस मनाएं हम।।

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11.हिंदी सबका प्राण है 

हिंदी है पहचान।

बसी हुई हिंदी हृदय,

भारत का सम्मान।

भारत का सम्मान,

गगन पर ध्वजा रूप लहराए।

संस्कृत सुता हमारी हिंदी 

तन मन को सरसाये।। 

देश-विदेश हमारी हिंदी 

प्रतिदिन बढ़ती जाए।

नए प्रयोग समेत नित्य यह 

नए रूप दिखलाइए।।

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12.हिंदी भाषा है महान 

ज्ञान बुद्धि का विधान 

भारती के भाल का अनोखा श्रृंगार है।

गगन में गूंजते हैं 

भाषा के ही शब्द यहां 

हिंदी ही हमारी अभिव्यक्ति का आधार है।। 

गौरव बढ़ाना भाषा भारती का भावना से भाषा प्रेमियों को हिंदी दिवस त्यौहार है।

विश्व के पटल पर हिंदी को सजाना और ऊंचे ला बैठना यही उत्तम विचार है।।

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छोटी कविताओं के निर्माण के लिए कुछ प्रारूप -:


13.हिंदी से जीवन की, बनती है गाथा। हिंदी के आगे झुकाएंगे माथा।। 

हिंदी से भारत की पहचान यारो। मिलजुल के हिंदी का स्तर सुधारो।। 

हिंदी को अपने हृदय में उतारें।

हिंदी से जीवन या अपना समझ 


हिंदी है जीवन में अमृत का प्याला 

हिंदी का हर रूप सबसे निराला।।

हिंदी ने भारत के किस्मत सवारी 

हिंदी है मां भारती की दुलारी।।

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14.हिंदी है जीवन की आभा निराली, 

ये हिंदी है चारों दिशा का उजाला। 

हिंदी से गुंजित हैं चारों दिशाएं, 

तो हिंदी ने शब्दों को अमृत में ढाला।। भारत की प्राचीन गरिमा वचन है 

नए शब्द गढ़ने का रस्ता निकाला। 

यही तो वजह है कि अब तो विदेशों में भी हिंदी का अब बढ़ रहा बोलबाला।।

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15.हिंदी से जग की शान बढ़ी, 

हिंदी से गूंजे गली गली।

हिंदी से सबका मेल हुआ,

पढ़ना लिखना तो खेल हुआ।।

हिंदी ने दी पहचान हमें,

दे रही ज्ञान विज्ञान हमें।।

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16.भाषा धरोहर भावना की 

शक्ति का भंडार है।

जीवन सँवारे मनुज का, 

अभिव्यक्ति का आधार है।।

भाषा रहे जीवंत तो, 

अस्तित्व भी जिंदा रहे, 

भाषा बिना ये ज़िन्दगी 

ढहती हुई दीवार है।।

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17.नदियों की कल कल 

झरनों का छल छल।

पंछी मधुर स्वर,विहरें हृदय पर।

मैया की लोरी,माखन कटोरी।

कविता का मंथन माथे का चंदन।। 

ब्रह्मा का अक्षर,आता उतरकर, 

हिंदी वो प्यारी, भाषा हमारी।।

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18.हिंदी गगन की ध्वनि बनी,

यह राष्ट्र का सम्मान है।

हिंदी के चरणों में झुका 

इतिहास और विज्ञान है।।

हिंदी से व्यापक जगत में 

इस देश की मुस्कान है। 

हिंदी है जीवन दायिनी 

हिंदी से हिंदुस्तान है।।

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19.हिंदी के शब्द कुसुम झरते 

तब तन-मन पुलकित होता है।

हिंदी धागा है माला का 

जो लाखों पुष्प पिरोता है।

हिंदी ने चमक बिखेरी है, 

हर भाषा इससे चमकी है।

बाकी सब फीके पड़ जाते, 

हिंदी बिजली सी दमकी है।।

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20.इतिहास के पन्ने खुले 

विज्ञान की अंगड़ाइयां। 

सबको दिलों से जोड़ती 

हिंदी की कुछ रुबाइयां।।

भाषा जहां फीकी पड़ी, 

साहित्य भी मैला हुआ।

भाषा परिष्कृत यदि रही 

साहित्य ने नभ को छुआ।।

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(स्वरचित) दिनांक 14 सितम्बर 2025



शनिवार, 20 सितंबर 2025

सौ बातें...एक बात की..!!!

सौ बातें, एक बात की******!!


भगवान हम सभी को समान रूप से अमीर, शक्तिशाली या महान नहीं बनाता है, लेकिन वह हम सब को मित्र बनने से तो नहीं रोकता है।



(सौ बातें, एक बात की**!!)


1.जिसे करें, अभी करें ।


2.भविष्य वर्तमान ही है।


3.सकारात्मक दृष्टिकोण से हमेशा लाभ ही होता है।


4.स्वास्थ्य ही प्रसन्नता है।


5.कर्मचारी, अधिकारी की गति के अनुसार ही कार्य करते हैं।

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6.केवल अलग दिखने वाला व्यक्ति ही नेता होता है।


7.अगर आप किसी में कोई अच्छाई देखें तो उसे अपना लें।


8.अपने समय का धन की तरह प्रबंधन करें।


9.अपने आपको जानना ही सफलता की कुंजी है।


10. आत्मविश्वास खोना सबसे बड़ी हानि है।

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11. जो धनुष बहुत मुश्किल से मुड़ते हैं वे स्वयं चटककर टूट जाते हैं।


12.आप बिना कुछ किए अनुभव प्राप्त नहीं कर सकते।


13. बिना सोचे पढ़ना उसी तरह है, जैसे बिना पचाये खाना।


14. हमारी समस्या अज्ञानता नहीं, बल्कि निष्क्रियता है।


15. आदमी का मस्तिष्क और पैराशूट खुलने पर ही काम करते हैं।

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16. अपने सपनों को सच्चा करने का सर्वोत्तम साधन जाग जाना है।


17. विचारों से धन कमाया जा सकता है धन से विचार नहीं पनप सकते। 


18. किसी भी आदमी के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात अपनी इज्जत व अपना चरित्र बनाना है।


19. सर्वोत्तम विचार की प्रतीक्षा न करें। बेहतर विचार को क्रियान्वित करें । इसी विचार को ही और बेहतर बनाएं तो यह अपने आप ही सर्वोत्तम हो जाएगा। 


20. प्रतिदिन तल्लीनता से आठ घंटे काम करके आप बॉस के रूप में तरक्की पा सकते हैं और प्रतिदिन बारह घंटे काम कर सकते हैं।

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21. जो लोग जल्दबाजी करते हैं वे सामान्यतः घंटे बर्बाद करके कुछ मिनट ही बचाते हैं।


22. डेढ़ पाव वस्तु एक पाव वाले बर्तन में नहीं आ सकती, यदि ऐसा होता तो इससे हर काम की आशा की जा सकती है।


23. माचिस की तीली, चलती-फिरती और जेब में रखी जा सकने वाली आग है। इसके आविष्कार से पहले लोग इस कल्पना पर इसी तरह हंसते थे जैसे आज किसी के द्वारा पैन के आकार के एयरकंडीशनर की बात को लेकर हंसते हैं।


24. यदि आपके पास एक रुपया है और मेरे पास भी है और हम एक-दूसरे से ये रुपए बदल देते हैं तो हम दोनों के पास ही एक-एक रुपया हो जाता है। यदि आपके पास कोई बेहतर विचार है और मेरे पास कोई दूसरा विचार है और हम आपस में ये विचार बदल लेते हैं तो हम दोनों के पास दो-दो बेहतर विचार हो जाते हैं।


25. अगर आप निर्णय नहीं लेते तो आप बॉस या नेता दोनों में से कुछ भी नहीं बन सकते हैं।

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26.प्रत्येक व्यक्ति वही काम करना चाहता है जो उसे पसंद है, लेकिन वह ऐसा काम नहीं करना चाहता जो किया जाना चाहिए।


27. बेहतर विचारों के आदान-प्रदान के लिए मीटिंग्स का प्रयोग करें। 


28.एक साथ आना शुरुआत है, एक साथ रहना प्रगति है और एक साथ काम करना सफलता है।


29. मनुष्य की पूछ इसलिए गिर गई, क्योंकि इसकी आवश्यकता नहीं रही थी, आप और मैं भी इसी तरह अलग किए जा सकते हैं।


30. एक साथ काम करने से केवल हम सब का सर्वोत्तम कार्य ही सामने नहीं आता, बल्कि हम में से प्रत्येक की सर्वोत्तम सोच भी बाहर आती है।

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31. किसी भी व्यक्ति को अपने बॉस द्वारा ईमानदारी से किया गया एक दिन का कार्य जो प्रेरणा देता है, वह प्रेरणा किसी और तरीके से नहीं मिल सकती।


32. अपने कर्मचारियों द्वारा कही गई बातों पर ध्यान दें। कई बार उनके विचार सुलगते अंगारों की तरह होते हैं। आप उन्हें अपने निर्णय रूपी ठंडे पानी की कुछ बूंदें डालकर राख बना सकते हैं या उन्हें आग के रूप में अच्छी सोच रूपी फूंक मारकर प्रज्वलित भी कर सकते हैं।


33.अपने मित्र की भावनाओं को मजाक में भी ठेस न पहुंचाएं।


34. अपने दोस्त के लिए जान दे देना इतना मुश्किल नहीं है जितना मुश्किल ऐसे दोस्त को ढूंढ़ना, जिस पर जान दी जा सके।


35. दोस्तों के बीच छोटी सीधी बातचीत कई बार दोस्ती बनाए रखने का सर्वोत्तम तरीका होती है।

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36.नए मित्र बनाएं, लेकिन पुराने मित्रों को साथ रखें; अगर वो चांदी हैं तो ये सोना हैं।


37. यदि दो व्यक्ति एक-दूसरे की छोटी-छोटी गलतियों को क्षमा नहीं कर सकते तो वे लंबे समय तक दोस्ती नहीं निभा सकते।


38.ज्यादा बेचने के लिए सबसे अच्छा तरीका है ज्यादा काम और कम आराम। यदि पहली बार में आपको सफलता नहीं मिलती तो आप केवल औसत दर्जे से काम कर रहे हैं।


39.किसी काम में सफलता तभी मिलती है जब उसे करने में आनंद आए। असंभव के पीछे भागते-भागते आप वो भी खो बैठते हैं जो संभव है।


40.क्रोध वह खर्चीली विलासिता की वस्तु है, जिसे केवल एक निश्चित आय के लोग ही भोग सकते हैं।

ग्राहक ही 'बॉस' है। उससे बातें करते समय अपने से ज्यादा उसे अहमियत दें।

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41. चमचागिरी करना धोखा देना है और बेईमानी से हासिल किए गए धन की तरह यह तब-तब आपको मुसीबत में डालता रहेगा, जब-जब आप इसे खर्च करने की कोशिश करेंगे।


42. मेरे पास जूते नहीं थे तो मैं दुखी था, लेकिन तब तक, जब तक मैंने सड़क पर उस आदमी को नहीं देखा था जिसके पैर नहीं थे।


43. दस गरीब आदमी एक कंबल में आराम से सो सकते हैं, पर दो राजा एक ही राज्य में इकट्ठे नहीं रह सकते।


44. इस बात की चिंता मत करो कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोच रहे हैं। वे इस चिंता में व्यस्त हैं कि आप उनके बारे में क्या सोच रहे हैं। 


45. चिकित्सक सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वो दिमाग का इलाज किए बिना शरीर का इलाज करने की कोशिश करते हैं। दिमाग और शरीर एक-दूसरे से घनिष्ठता से जुड़े हैं और उनका अलग-अलग इलाज नहीं किया जा सकता।

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46. थोड़ी सी व्यावहारिक बुद्धि के साथ ईमानदारी अभी भी सबसे अच्छी नीति है।


47.ज्यादा बेचने के लिए सबसे अच्छा तरीका है ज्यादा काम और कम आराम। 


48.पुराने खरीदार के मुकाबले एक नया खरीदार बनाना छह गुना महंगा होता है।


49.यदि पहली बार में आपको सफलता नहीं मिलती तो आप केवल औसत दर्जे से काम कर रहे हैं।


50. मैंने बिक्री तीन गुना की इसलिए नहीं कि ग्राहक खरीदने के लिए उत्सुक थे, बल्कि इसलिए कि मैं बेचने के लिए उत्सुक था।

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51. जिनके अपने घर के पायदान गंदे होते हैं उन्हें अपने पड़ोसियों की छत पर 'जमी धूल के बारे में शिकायत नहीं करनी चाहिए।


52. उनकी आलोचना न करें, वे केवल वही काम कर रहे हैं जो ऐसी ही परिस्थितियों में हम स्वयं करते।


53. कोई भी बेवकूफ एक बुरा विज्ञापन लिख सकता है, परंतु एक बुद्धिमान ही अच्छे विज्ञापन से दूर रह सकता है।


54. महान कार्य पूरा करने के लिए हमें केवल काम ही नहीं करना चाहिए, बल्कि स्वप्न भी देखने चाहिए, केवल योजना ही नहीं बनानी चाहिए, बल्कि विश्वास भी रखना चाहिए।


55. आंकड़े प्रायः इसी तरह इस्तेमाल किए जाते हैं जैसे एक शराबी बिजली के खंभे का उपयोग केवल सहारे के लिए करता है न कि रोशनी के लिए। 

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56. बिक्री करना व्यावहारिक ज्ञान हो सकता है परंतु इसके लिए व्यावहारिक ज्ञान के प्रशिक्षण की और उसका उचित उपयोग करने की आवश्यकता है। 


57.अगर आपकी चूहेदानियां दूसरों से बेहतर हैं तो लोग उसमें अवश्य फंसेंगे,

चाहे आप जंगल में ही क्यों न हों।


58.जो विजेता होते हैं वे काम करने की आदत बना लेते हैं, जबकि पराजित

होने वाले व्यक्ति ऐसा नहीं करते।


59.व्यवसाय की उत्तम स्थिति ऐसी होती है जैसे मुर्गी के बच्चे को दाने-दाने

के लिए यहां-वहां चोंच मारनी पड़ती है।


60.किसी व्यवसाय में लगा हर व्यक्ति ग्राहकों से बातचीत करता है, इसलिए अपने प्रत्येक कर्मचारी को श्रोता बनने, सहनशील होने और स्पष्ट रूप से

समझाने वाला बनाने के लिए प्रशिक्षित कीजिए।

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61. यदि सफलता का कोई राज है तो वह यह है कि आप अपने साथ-साथ

दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण से सोचने और चीजों को उसके नजरिये से

देखने की योग्यता से निहित हैं।


62. ग्राहक से बातचीत करना ग्राहक की अच्छी सेवा का मूल मंत्र है। 63. काम करने वालों के लिए काम कभी खत्म नहीं होता, हमेशा एक नया काम तैयार रहता है।


64. भविष्य की उन्नति के लिए वर्तमान का बलिदान देने को तैयार रहें। 


65. फल से भरे हुए और सर्वोत्तम पौधे धरती की तरफ झुक जाते हैं। 

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66. प्रशिक्षित व्यक्ति आवाज को भी संगीत का रूप दे सकता है। प्रशिक्षण अनिवार्य है।


67. ज्ञान और लकड़ी का इस्तेमाल बिना मौसम या मौके के ज्यादा नहीं करना चाहिए।


68. अपने विचारों पर ध्यान दें, वे आपके शब्द बन जाते हैं। अपने शब्दों पर ध्यान दें, वे आपकी क्रियाएं बन जाते हैं। अपनी क्रियाओं पर ध्यान दें, वे आपकी आदतें बन जाती हैं। अपनी आदतों पर ध्यान दें, वे आपका चरित्र बन जाती हैं।


69. व्यापार ठीक साइकिल चलाने जैसा है, या तो आप चलते रहते हैं या फिर आप गिर जाते हैं। इन दोनों के बीच की कोई स्थिति नहीं है। 


70. लाभ के बारे में जितना हो सके देर से सोचें, खर्चों के बारे में जितना

हो सके, उतना जल्दी सोचें।

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71. प्रतिभा से धन कमाया जा सकता है, लेकिन धन से प्रतिभा नहीं । 


72. आधा सेर सीखने के लिए 5 सेर व्यावहारिक ज्ञान की जरूरत पडती है।


73. कोई भी व्यक्ति किसी भी कीमत पर उस चीज को हासिल कर लेता है जिसके प्रति उसके मन में असीमित उत्साह होता है।


74.स्वार्थी बनिए लेकिन अपने, अपने परिवार, अपने काम, अपने संगठन और अपने राष्ट्र के प्रति ईमानदार बनिए ।


75. जो व्यक्ति कदम दर कदम चल कर चोटी पर पहुंचता है वह उस व्यक्ति से कहीं ज्यादा सम्मान पाता है जो चोटी पर हेलीकॉप्टर से पहुंचता है।

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76. व्यस्त लोग ऐसे कामों के लिए 5 मिनट लगाना पसंद नहीं करते जिसमें केवल 1 मिनट लगाना चाहिए।


77. एक अधिकारी सफल या असफल इस बात से नहीं होता कि वह स्वयं क्या करता है, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि वह किसी और से काम करा सकने के योग्य है या नहीं।


78. लोग समय व्यर्थ नहीं गंवाते वे उसे सिर्फ ऐसे कामों में लगाते हैं


79. एक अच्छा श्रोता सिर्फ हर जगह लोकप्रिय ही नहीं होता, बल्कि थोड़ी देर में वह कुछ न कुछ अवश्य जान जाता है।

80. वे लोग जो अच्छी किताबें नहीं पढ़ते, वे उनसे कतई बेहतर नहीं हैं जो पढ़ नहीं सकते।

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81. वर्तमान में जिएं और इसे इतना खूबसूरत बना लें कि याद रखा जा सके। अहंकार सफलता के लिए रेत के महल के समान है।


82.कीमती पत्थर, कालीन और फानूस मिलकर एक सुंदर भवन बनाते हैं पर सिर्फ उसमें रहने वालों की मुस्कुराहट ही उसे एक घर बनाती है। 


83. चोटी (शिखर) पर बहुत जगह है, लेकिन वहां बैठने के लिए कोई स्थान नहीं है।


84. यदि पहली बार में आपको सफलता नहीं मिलती है तो एक बार और कोशिश करें और इसके बाद किसी और काम को करने की कोशिश करें ।


85. अपने करिअर की शुरुआत में आपका सीखना, आपकी कमाई से अधिक महत्वपूर्ण है।

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86. हमारा मुख्य काम यह नहीं है कि थोड़ी दूरी पर क्या चीज अस्पष्ट दिख रही है, वरन अपने नजदीक की चीज को स्पष्ट रूप से देखना है। 


87. नेतृत्व हमेशा उस व्यक्ति की ओर लपकता है जो उठ कर वही कह सके जो कि वह सोचता है।


88. हीरे को बिना घर्षण के चमकाया नहीं जा सकता, इसी तरह आदमी बिना संघर्षों के संवर नहीं सकता।


89. प्रबंधन पूंजी को आकर्षित करता है और पूंजी लोगों को, इसे किसी और तरीके से नहीं किया जा सकता।


90. हर व्यक्ति को अपने अधिकारियों के साथ इसी तरह रहना चाहिए जैसे आग के साथ रहा जाता है। न तो इतना नजदीक कि जल जाएं और न इतना दूर कि जम जाएं।

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91. केवल नम्रता भरे शब्दों के बजाय नम्रता भरे शब्द और एक बंदूक (थोडी कठोरता) से आप ज्यादा कार्य हासिल कर सकते हैं। 


92. दोस्ती हमारे आनंद को दुगुना करके और दुखों को कम करके खुशी को बढ़ाती है और मनहूसियत को कम करती है। 


93. भगवान हम सभी को समान रूप से अमीर, शक्तिशाली या महान नहीं बनाता है, लेकिन वह हम सब को मित्र बनने से तो नहीं रोकता है। 


94. अपने मित्र से 3 वर्ष तक प्रतिदिन एक घंटे तक बातचीत करने की अपेक्षा, किसी वाहन में 3 दिन का साथ आपको एक-दूसरे को जानने में अधिक सहायक होगा।


95. एक अच्छे दिन की शुरुआत एक अच्छे रात्रि विश्राम के बाद ही होती है।

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96.जितना ज्यादा लोग आप पर विश्वास करेंगे उतना ज्यादा वे आप से माल खरीदेंगे।


97. लोग प्रायः 60 प्रतिशत वही चीजें दूसरों पर देख कर ले लेते हैं, जिनकी उन्हें कोई आवश्यकता नहीं होती है।


98. लोग चीजें नहीं खरीदते, उन चीजों द्वारा प्राप्त होने वाले फायदों को खरीदते हैं।


99.अपने शत्रु से प्यार करें, यह उसे पागल कर देगा; उसकी आलोचना मत करें, वह वही है जो ऐसे हालात में आप होते।


100. वे लोग जो पारिश्रमिक से ज्यादा काम नहीं करते, उन्हें काम से

ज्यादा पारिश्रमिक कभी नहीं मिलता।

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सोमवार, 3 मार्च 2025

लौट आओ प्यारी गौरैया..!!

लौट आओ प्यारी गौरैया 

(20मार्च विश्व गौरैया दिवस)

गौरैया रोज़ आती। घर आंगन में सुबह से चींचीं करती, फुदकती, दाना चुगती और ज़रा-सी आहट पर फुर्र हो जाती। फिर एक दिन वह नहीं लौटी। आख़िर क्यों दूर हो गई हमसे.....

मैं गौरैया हूं। हां, वही छोटी-सी फुदकती हुई चिड़िया, जो कभी तुम्हारे आंगन, बालकनी और खेतों में बेफिक्र उड़ती थी। याद है चुगती थी? पर अब मैं कहां हूं? क्या तुम्हें मेरी कमी महसूस होती है? तुम इंसानों से मेरी दोस्ती बहुत पुरानी है। जब तुमने खेतों में हल चलाना शुरू किया था, मैं वहीं थी। मिट्टी के घरों की छतों पर मेरा बसेरा था और तुम्हारी कहानियों, लोकगीतों तथा मंदिरों के आंगन में मेरी मौजूदगी थी। मेरी चहचहाहट से सुबह की ताज़ी हवा में एक नई उमंग भर जाती थी। लेकिन अब तेज़ी से बदलते माहौल ने मुझे असहाय बना दिया है। शहरीकरण, प्रदूषण और आधुनिक तकनीकी विकास ने मेरे प्राकृतिक आवास को सिकोड़ दिया है।

पर्यावरण की सेहत का पैमाना में....

मैं सिर्फ़ एक छोटी चिड़िया नहीं हूं, बल्कि मैं उस जटिल पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हूं जिसे तुम अक्सर अनदेखा कर देते हो हर दिन मैं औसतन 500 छोटे कीड़ों का सेवन करती हूं जिससे खेतों में हानिकारक कीड़ों की संख्या नियंत्रण में रहती है। कई छोटे पौधों के परागण में मेरी भूमिका होती है, जिससे पौधों की वृद्धि और फलों का उत्पादन बेहतर होता है। मेरी मौजूदगी पर्यावरण की सेहत का पैमाना है। अगर मेरी संख्या घटने लगे तो समझ लो कि आसपास का पर्यावरण बिगड़ रहा है।

घोंसला आख़िर कहां बनाऊं 

आज के शहरों में जहां ऊंची इमारतें, शीशे की दीवारें और कंक्रीट के जंगल बन गए हैं, मेरे जैसी प्रजातियां कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। कुछ शोधों के अनुसार, पिछले 30-40 वर्षों में शहरी इलाक़ों में हमारी आबादी में 70% से अधिक गिरावट देखी गई है। परंपरागत घरों और खुली छतों का अभाव मेरे लिए सुरक्षित घोंसला बनाने के स्थानों को कम कर देता है। ध्वनि, वायु और विद्युत चुंबकीय विकिरण मुझे परेशान करते हैं। मोबाइल टावरों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तरंगें मेरी उड़ान को बाधित कर देती हैं।

मेरी कमी की वजह : 

कृषि के आधुनिक तरीक़े ने खेती को सुविधाजनक तो बनाया है, लेकिन इसके साथ ही प्राकृतिक संतुलन को भी हिलाकर रख दिया है। कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मेरे भोजन के स्रोत यानी छोटे कीड़े-मकोड़े तेज़ी से ख़त्म हो रहे हैं। भारत के कुछ हिस्सों में कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण हम गौरैयों की संख्या में पिछले एक दशक में लगभग 40% तक कमी आई है। कीटनाशकों का इस्तेमाल मिट्टी, पानी और हवा को ज़हरीला बना देता है जिससे न सिर्फ़ जीव-जंतुओं, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

मुझे बचा पाना तुम्हारे ही हाथ में है.....

कुछ क़दम उठाने होंगे तुम्हें ताकि मैं फिर से तुम्हारे आंगन लौट सकूं और तुम्हारी सुबह मेरी चहचहाहट से खिल उठे। 

1.प्राकृतिक आवास बनाएं अपनी बालकनी या छत पर छोटे- छोटे नेस्टिंग बॉक्स या सुरक्षित कोने बनाएं। 

2.बाग़-बाग़ीचों में ऐसे पौधों का चयन करें, जिससे मुझे खाद्य और आश्रय दोनों मिल सकें।


3.खाद्य और पानी की व्यवस्था पानी के कटोरे और अनाज, जैसे बीज या चावल के दाने अलग से रखें ताकि मेरी और अन्य छोटी चिड़ियों की मदद हो सके। 

4.मौसम के अनुसार खाद्य सामग्री का ध्यान रखें जिससे मुझे हर मौसम में सहारा मिल सके। 

रासायनिक पदार्थों का कम से कम उपयोग : 

1.कृषि में जैविक और प्राकृतिक तरीक़ों को अपनाएं। 

2.कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग न्यूनतम करें ताकि न केवल मेरी, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा हो सके।

3.पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाएं: अपने मित्रों, परिवार और समुदाय में इस बारे में जागरूकता फैलाएं कि एक छोटी-सी चिड़िया भी पर्यावरण की सेहत का पैमाना होती है। 

4.सोशल मीडिया, स्कूलों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से मेरी कहानी सुनाएं ताकि हर कोई इस परिवर्तन का हिस्सा बन सके।


1. नर और मादा की पहचान ■

नर गौरैया चमकीले रंग के पक्षी होते हैं जिनके सिर भूरे, गाल सफ़ेद और गर्दन लाल होती है। मादा पूरी तरह से भूरी नज़र आती है। इनका निचला हिस्सा धूसर भूरा होता है जबकि पीठ पर स्पष्ट रूप से भूरी और काली धारियां होती हैं।

2. गौरैया के अंडे ....■ 

गौरैया हर प्रजनन के मौसम में (मार्च से अगस्त) में आमतौर पर 4-6 छोटे, धब्बेदार अंडे देती है। इन अंडों का आकार लगभग 12-16 मिमी तक होता है और इन पर मौजूद हल्के धब्बे प्राकृतिक परिवेश में छिपने में मदद करते हैं।

3.चीन का अनुभव क्या कहता है? 

1950 के दशक में चीन ने 'स्मैश स्पैरो' नामक अभियान के तहत गौरैयों को मारना शुरू किया, यह मानते हुए कि वे फ़सलों को नुकसान पहुंचाती हैं। लेकिन गौरैयों के नष्ट हो जाने से कीड़ों की संख्या में उछाल आया, जिससे फ़सलों पर अप्रत्याशित प्रभाव पड़ा और चीन में खाद्यान्न संकट और भुखमरी जैसी गंभीर समस्या देखने को मिली।

4.कबूतरों का दबदबा है.....

■ शहरी क्षेत्रों में ऊंची इमारतों और कंक्रीट की संरचनाओं में कबूतर तेज़ी से अपना विस्तार कर लेते हैं। गौरैया और अन्य छोटे पक्षी उनकी बढ़ती मौजूदगी के कारण भी शहरों से दूर चले जाते हैं, चूंकि उन्हें पर्याप्त दाना-पानी नहीं मिल पाता।


मैं थी, मैं हूं... क्या मैं रहूंगी? 

मेरी कहानी सिर्फ़ एक गौरैया की नहीं है, बल्कि ये धरती, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की कहानी भी है। अगर हम आज क़दम उठाएंगे तो न सिर्फ़ मुझे, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखा जा सकेगा। दुनिया का संतुलन तुम्हारे हाथ में है और मैं उम्मीद करती हूं कि तुम मुझे बचाने के लिए आवश्यक क़दम उठाओगे ।


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