हिंदी दिवस पर बालकों हेतु अभ्यास हेतु कुछ लघु काव्य रचनाएं-:
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1.भारत की परिभाषा हिंदी।
जन-जन की अभिलाषा हिंदी।।
ज्ञान कला विज्ञान समाहित,
जन गण मन की आशा हिंदी।।
पलती है संस्कृत अंचल में,
हर दिल में हिंदी खिलती है।
गर्व हमारा शान हमारी
मन के भावों में मिलती है।।
हिंदी भारत की प्रिय बोली
ज्यों माथे पर अक्षत रोली।
हिंदी है मस्तों की टोली,
जीवन के रंगों की होली।।
हिंदी से है अपना जीवन,
हिंदी से सुरभित है तन मन।
हिंदी से विकसित है चिंतन,
हिंदी ही अपना जीवन धन।।
हिंदी को बढ़ कर अपनाएँ,
हिंदी के सेवक बन जाएं।
नव चिंतन हिंदी में ला कर,
आओ इसका कोष बढ़ाएं।।
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2. सरल सहज मधुरिम बोली,
जैसे हो मीठी गोली।
मां के आंगन की यह माटी,
ज्यों हो बिटिया की डोली।।
मिलजुल कर यह सब को बांधे,
जीवन का हर संकट साधे।
भारत की यह पूर्ण आत्मा,
देश शक्ति को भव्य बना दे।।
सरस्वती का सच्चा सुत वह,
जो अपनी भाषा को साधे।
भाषा से मिलता सम्मान,
यही सत्य जीवन का ज्ञान।।
भाषा खोले मन के द्वार,
भाषा से ही जगें विचार।
अभिव्यक्ति का यह आधार,
भाषा बहु गुण का विस्तार।।
भाषा पर रखिए अभिमान,
यह जीवन का दिव्य विधान।
भाषा रखे स्वरूप अनेक,
सभी एक से बढ़कर एक।।
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3. ज्ञान की ज्योत जलाती है हिंदी। आशा का भाव जगाती है हिंदी।।
ज्ञान कथा कविता की यह गंगा।
सत्य की राह बताती है हिंदी।।
सूर के कान्हा का प्यार है हिंदी,
बालक की मनुहार है हिंदी।
मैया का प्यार दुलार है हिंदी,
प्यार भरा उपहार है हिंदी।।
वीरों की यह तलवार है हिंदी,
वाणी का वज्र प्रहार है हिंदी।
रसमय प्रेम सिंगार है हिंदी,
भावों की अमृत धार है हिंदी।।
हिंदी की ताकत, माने ये दुनिया।
हम ही नहीं, पहचाने ये दुनिया।।
कोटि कला सुविचार की वाहक,
भाषा है हिंदी ही, माने ये दुनिया
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4. हिंदी हमारी शान और पहचान दोस्तो।
सारी धरा पे गूंजता ये गान दोस्तो।।
मां भारती के कंठ में मणिमाल सी पड़ी,
भाषा है भारती का स्वाभिमान दोस्तो।।
तुलसी कबीर जायसी मीरा का गान है मांभारती के भाल पे बिंदिया समान है। हिंदीहै गद्य काव्य की सुंदर सी वीथिका, साहित्य में हिंदी का बड़ा योगदान है।।
भाषा ये धर्म कर्म की,जीवन के मर्म की, भाषा हमारी भावना पहचान बन गई। हिंदी हर एक योजना का शक्ति केंद्र है, हिंदी ही हर विकास का अनुमान बन गई।।
भाषा पे गर्व करते जो वो ही महान है, निज भाषा गर्व ही विकास का विधान है।
हिंदी को मान दे न सके यदि दिलों में हम,नादान ही रहे हम नहीं ज्ञानवान हैं।।
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5.बचपन में माँ ने सिखलाई,
पहली बोली पड़ी सुनाई।
पढ़ते पढ़ते गीत बनाये,
मन में मधुर भाव ले आए।।
मिलजुल कर यह सबको बांधे,
रिश्तो में रस भी ये साधे।
गूंजे भारत के कण-कण में,
सदा विराजे जन गण मन में।।
हिंदी कविता कथा कहानी,
हमको लिटा सुनातीं नानी।
हिंदी ने ही बोध कराया,
भला बुरा हमको समझाया।।
हिंदी से खुद को पहचाना,
हिंदी से हर सच को जाना।
हिंदी को पहचान दिलाएं,
चर्चा में हिंदी अपनाएं।।
हिंदी हस्ताक्षर जब करते,
तुच्छ भाव मन में क्यों भरते?
भाषा व्यवहारों में लाओ,
अब हिंदी से मत शरमाओ।।
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6.हिंदी जोड़े दिल से दिल को,
यह भारत भाषा का संगम।
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम,
सभी दिशाओं में यह कायम।।
भाषाओं की बगिया, जिसमें
हिंदी खिला गुलाब है प्यारा।
भाईचारे की खुशबू से
महकाती है आंगन सारा।।
भाषा का संसार विशेष,
यह व्यापक है देश विदेश।
भाषा संस्कारों की माता,
भाषा मैया का जगराता।।
भाषा पीरों की कव्वाली
भाषा नहीं विचार खयाली।
भाषा ने अब पर फैलाये,
अब यह सही उड़ान दिखाये।।
इस उड़ान को हम पहचानें
हिंदी की महिमा को जानें।।
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7.सत्यम शिवम सुंदरम की
परिभाषा है प्यारी हिंदी।
संस्कृत शील प्रमाण रूप
भाषाओं में न्यारी हिंदी।।
ऋषि मुनियों की संस्कृति की ध्वनि लगती है उजियारी हिंदी।
भाषाओं के पुष्प उगाने,
बनी हुई है क्यारी हिंदी।।
जीवन की सच्चाई,
अपनी भाषा हमें बताती है।
हम भटके तो भाषा ही तो,
सही राह दिखलाती है।।
भाषा से अस्तित्व हमारा
भाषा भारत की पहचान।
भाषा से समृद्ध बनेंगे
हिंदी हिंदू हिंदुस्तान।।
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8.ये कविता उपन्यास नाटक जो सारे। बने आज भाषा के अंतिम सहारे।।
मधुर धार गीतों की तू भी बहा रे!
सुगढ़ छंद गंगा में तू भी नहा रे!!
हिंदी हमारे विचारों की थाती।
हिंदी हमारी है अंतिम संगाती।।
कला साधना को सुगम ये बनाती।
बुझे मन को खुशियोंसे यहहै सजाती।।
सदा अपनी भाषा से गर्वित रहें हम।
हैं बिखरे जो मोती वो संचित करें हम।।
यह हिंदी ही चिंतन को अद्भुत बनाए।
जो सोएं तो रंगीन सपने दिखाए।।
बनें राष्ट्रभाषा के हम सब पुजारी।
रहे शीर्ष पर कल्पना ये हमारी।।
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9.सबका गौरव सबका आदर
अमर प्यार है ये हिंदी।
मां की मधुर नेह छाया,
शिशु का दुलार है ये हिंदी।।
छोटी तुतलाती जुबान की
प्यारी बोली है हिंदी।
सत असत्य सुख दुख में सच्चे,
सुख की टोली है हिंदी।।
संस्कृत भाषाओं की मां
तो उसकी बेटी है हिंदी।
तत्सम शब्दों की शैया पर,
सुख से लेटी ये हिंदी।।
हिंदी हर भाषा को पल में
अपने साथ मिला लेती।
अपने दामन में ये,हर भाषा के
फूल खिला लेती।।
हिंदी भाषा मात्रा नहीं,
वह तो है जीवन का व्यवहार।
भाषा ही साहित्य प्रेमियों
को है भारत का उपहार।।
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10.प्रगति पंथ पर हमें चलाकर
आगे ले आये हिंदी।
अवसर आए तो शब्दों से
देश जगाए यह हिंदी।।
टूटे अरमानों को जीवन
गीत सुनाए यह हिंदी।
एक साल बस इसी दिवस
क्यों पूजी जाए ये हिंदी।।
हिंदी का हर दिवस हमें
थोड़ा नीचे ले जाता है।
भाषा के आडंबर को यह
आइना दिखलाता है।।
अंग्रेजी में परिचय देते
हिंदी से शरमाते हम।
विडंबना है फिर भी हिंदी
के सेवक कहलाते हम।।
हिंदी को अपने तन मन में
खुशबू बना बसाएं हम।
हर दिन तो हिंदी का है,
क्यों हिंदी दिवस मनाएं हम।।
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11.हिंदी सबका प्राण है
हिंदी है पहचान।
बसी हुई हिंदी हृदय,
भारत का सम्मान।
भारत का सम्मान,
गगन पर ध्वजा रूप लहराए।
संस्कृत सुता हमारी हिंदी
तन मन को सरसाये।।
देश-विदेश हमारी हिंदी
प्रतिदिन बढ़ती जाए।
नए प्रयोग समेत नित्य यह
नए रूप दिखलाइए।।
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12.हिंदी भाषा है महान
ज्ञान बुद्धि का विधान
भारती के भाल का अनोखा श्रृंगार है।
गगन में गूंजते हैं
भाषा के ही शब्द यहां
हिंदी ही हमारी अभिव्यक्ति का आधार है।।
गौरव बढ़ाना भाषा भारती का भावना से भाषा प्रेमियों को हिंदी दिवस त्यौहार है।
विश्व के पटल पर हिंदी को सजाना और ऊंचे ला बैठना यही उत्तम विचार है।।
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छोटी कविताओं के निर्माण के लिए कुछ प्रारूप -:
13.हिंदी से जीवन की, बनती है गाथा। हिंदी के आगे झुकाएंगे माथा।।
हिंदी से भारत की पहचान यारो। मिलजुल के हिंदी का स्तर सुधारो।।
हिंदी को अपने हृदय में उतारें।
हिंदी से जीवन या अपना समझ
हिंदी है जीवन में अमृत का प्याला
हिंदी का हर रूप सबसे निराला।।
हिंदी ने भारत के किस्मत सवारी
हिंदी है मां भारती की दुलारी।।
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14.हिंदी है जीवन की आभा निराली,
ये हिंदी है चारों दिशा का उजाला।
हिंदी से गुंजित हैं चारों दिशाएं,
तो हिंदी ने शब्दों को अमृत में ढाला।। भारत की प्राचीन गरिमा वचन है
नए शब्द गढ़ने का रस्ता निकाला।
यही तो वजह है कि अब तो विदेशों में भी हिंदी का अब बढ़ रहा बोलबाला।।
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15.हिंदी से जग की शान बढ़ी,
हिंदी से गूंजे गली गली।
हिंदी से सबका मेल हुआ,
पढ़ना लिखना तो खेल हुआ।।
हिंदी ने दी पहचान हमें,
दे रही ज्ञान विज्ञान हमें।।
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16.भाषा धरोहर भावना की
शक्ति का भंडार है।
जीवन सँवारे मनुज का,
अभिव्यक्ति का आधार है।।
भाषा रहे जीवंत तो,
अस्तित्व भी जिंदा रहे,
भाषा बिना ये ज़िन्दगी
ढहती हुई दीवार है।।
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17.नदियों की कल कल
झरनों का छल छल।
पंछी मधुर स्वर,विहरें हृदय पर।
मैया की लोरी,माखन कटोरी।
कविता का मंथन माथे का चंदन।।
ब्रह्मा का अक्षर,आता उतरकर,
हिंदी वो प्यारी, भाषा हमारी।।
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18.हिंदी गगन की ध्वनि बनी,
यह राष्ट्र का सम्मान है।
हिंदी के चरणों में झुका
इतिहास और विज्ञान है।।
हिंदी से व्यापक जगत में
इस देश की मुस्कान है।
हिंदी है जीवन दायिनी
हिंदी से हिंदुस्तान है।।
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19.हिंदी के शब्द कुसुम झरते
तब तन-मन पुलकित होता है।
हिंदी धागा है माला का
जो लाखों पुष्प पिरोता है।
हिंदी ने चमक बिखेरी है,
हर भाषा इससे चमकी है।
बाकी सब फीके पड़ जाते,
हिंदी बिजली सी दमकी है।।
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20.इतिहास के पन्ने खुले
विज्ञान की अंगड़ाइयां।
सबको दिलों से जोड़ती
हिंदी की कुछ रुबाइयां।।
भाषा जहां फीकी पड़ी,
साहित्य भी मैला हुआ।
भाषा परिष्कृत यदि रही
साहित्य ने नभ को छुआ।।
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(स्वरचित) दिनांक 14 सितम्बर 2025
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