मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

Bharashtachar ke khilaf Zang ka elan

भ्रष्टों की सरकार है भ्रष्ट बने दीवान / पैसे के हाथों बिका दीन धरम ईमान/
दीन धरम ईमान बैंक में खुलते खाते / हमको मिलती छाछ मलाई ये खा जाते //
इन्हें देश की फ़िक्र न जनता के कष्टों की / देखें कौन उठाता अर्थी इन भ्रष्टों की  

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