सोमवार, 25 दिसंबर 2017

ब्रज महिमा 2

आनन्द उपासी ब्रजवासी बड़ भागी यहाँ
कनुआ के संग नित्य धेनु हैं चरामते।
कान्हा थकि हारि बैठें कहूँ कदंबन के तरे
सखा ह्वै प्रसन्न स्याम कांधे पै उठामते।।
डमरू अरु सिंगी संग बांसुरी बजावै कान्ह
सखा वृन्द सिगरे तहाँ घूमें इतरामते।
भूल्यो कोउ दनुज तहाँ आवै डरपाइबे कूँ
नन्द के दुलाल ताकूँ मोक्ष ही पठामते।।

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