बुधवार, 3 अगस्त 2011

Kya Hae Kavita

कविता केवल वर्णों का उच्चार नहीं है /
 कविता केवल छंदों की भरमार नहीं है //
कविता है मन के भावों की तरल चांदनी /
कविता केवल तुक्कों की बौछार नहीं है //

कविता है भावों का दर्पण /कविता है मन का आकर्षण //
कविता चिंतन का प्रवाह है / कविता सोई हुई चाह है //
कविता है  अंतस की पीड़ा / कविता है अवसर की क्रीडा //
कविता मृदु स्वप्नों का नर्तन /कविता तो अनुभव का  नंदन //
कविता है खिलती अमराई / कविता  प्रकृति की अंगड़ाई //
कविता है समाज का चित्रण / कविता है विचार का वर्षण//
कविता तो खिलता गुलाब है / कविता प्रश्नों का जवाब है //
कविता  नहीं मनोरंजन है / कविता चिंतन का स्यंदन है //
कविता देती नई राह है / कविता कवि की मुखर आह है //
कविता पहला  स्पंदन है / कविता स्मित अभिनन्दन है //

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