मंगलवार, 2 अगस्त 2011

Mathadhish

आयोजन में अतिथि बनें वो  साधु संत या स्वामी /
यश लिप्सा काबू करने में जिन्हें मिले नाकामी //
माइक माला करतल ध्वनि का मोह त्याग न पावें 
हर उत्सव मीटिंग उदघाटन में चेहरा चमकावें //
आमंत्रण के लिए चार छः चमचे ये रखवाते /
महाराज की महिमा वो फिर बढ़ा चढ़ा कर गाते //
ट्रस्ट बना कर पैसे बाटें पेपर में छपवायें /
चेले ख़बरों की फाइल को मोटा करते जाएँ //
कुछ हज़ार रुपयों की खातिर संस्था इन्हें बुलातीं /
धन्यवाद   के साथ दुपट्टा और तस्वीर थमातीं //
एक समय था संत कंदराओं में पाए जाते /
बिना वजह वे गाँव शहर में चेहरे न दिखलाते //
एक वक़्त कुछ अन्न मांग कर उसे पेट में डालें /
शांत ह्रदय फिर भजन भाव में अपना समय निकालें //
उनके तप की शक्ति आज तक असर दिखाती अपना //
ढोंग दंभ बढ़ गया संत तो आज बन  गए सपना //
संत वेश में राजनीति को बना रहे जो डेरा /
वर्तमान दिखता सुखदाई पर भवितव्य अँधेरा // 
चोर  सुरक्षित बैठे मठ में आश्रम में व्यभिचारी /
अंध भक्ति सुख उठा रहे ये धर्म ध्वजा के धारी //
ये ' ईश्वरके दूत ' देश पर सबसे गहरा धब्बा /
सबसे पहले हमें बचाओ इनसे मेरे रब्बा // 
 सच्चे संतों से क्षमा चाहते हुए ये विचार रखे हैं / बुरे लगें तो सभी पाठकों से माफ़ी चाहता हूँ 

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