भेस बदल कर हो रहे नित्य वार पर वार /
और सनरक्षण दे रही ये हिजड़ी सरकार //
ये हिजड़ी सरकार लगे है बात ज़रा सी /
छः बरसों से लटक रही अफज़ल की फाँसी //
अब वो जौहर नहीं .. भस्म सतियाँ जल जल कर /
अब पहचानो घूम रहे जो भेस बदल कर //
आजकल नकारात्मक समाचार ज्यादा बिकते हैं। हमारे समाज में ज्यादातर लोग एक प्रसिद्ध इन्सान के जुर्म का मुकदमा देखना किसी वास्तव में ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें