सोमवार, 12 नवंबर 2012

Azadi Ki Lavani

जब हुई भयानक मार काट बर्बादी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।
जब वीरों ने प्राणों की ज्योत जला दी,तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
लाखों वीरों ने अपने प्राण गंवाये, लाखों ने अपने नामोनिशां मिटाये।
कितने अपनों से बिछडे,हुए पराये, कितनों ने अपनों ही से धोखे खाये।।
कितनों ने घर को खुद ही आग दिखा दी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
उनके भी सपनों का था प्यारा भारत,जिसकी उन सबने खूं से लिखी इबारत।
अब देश प्रेम की बातें हुईं नदारद, पीछे वालों ने कर दी मेहनत गारत।।
मां के आंचल की चिन्दी आज उडा दी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
अपने अतीत को सीने से चिपकाए,हम फूले फिरते अपना स्वर्ग बनाए।
पर वर्तमान को घेरे काले साए,अन्धे भविष्य का हाल कौन बतलाए।।
भारत महान की थोथी टेर लगा दी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
वे गुजराती हों या कश्मीरी भाई,किसने सीनों पर ये मशाल दहकाई।
रसखान सूर की राह कहीं भरमाई, घर के चिराग ने घर को आग दिखाई।।
इस प्रेम भूमि की ये कैसी बरबादी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
सरकार बदलती यहां एक ही पल में, अखबार चमकते नित्य नई हलचल में।
नेता गरदन तक धंसे घोर दलदल में,जनता बेचारी भटक रही जंगल में।।
अनपढ भूखी सोती आधी आबादी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
रक्षक तक्षक बन हमें निगलते जावें, अब किसको जा कर अपने घाव दिखावें।
मरते भारत को कैसे आज जिलावें, वो संजीवन फिर आज कहां से लावें।।
अन्तर्मन सडते, उपर टोपी खादी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
घर वर्गभेद और जातिभेद से टूटा, हमको अपनों ने ही जी भर कर लूटा।
हो गया धर्मनिरपेक्ष सबक सब झूठा, साझे का घट था,चौराहे पर फूटा।।
सहकार प्रेम सम्पदा कहां बिखरा दी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
निज संस्कृति का सम्मान आज सिखला दो,हम क्या हैं यह दुनियां को आज बता दो।
आतंकवाद को कोसों दूर भगा दो,भारत है जग किरीट ये आज बतला दो।।
उस राह चलो जो दे गए गौतम गांधी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
भारत की ताकत भारत के जन गण में, यहां आग भरी है वीरों के तन मन में।
हर फूल अनोखी खुशबू भरे चमन में, देवता उतरते आ कर इस नंदन में।।
हर वाद हटा पहले हैं भारत वादी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
अधिकार चाहते हो कर्तव्य निभाओ, सहयोग तथा सेवा पर हक जतलाओ।
तन मन धन भारत मां पर आज लुटाओ,खुद को सच्चा भारतवासी कह पाओ।।
यदि फिर इसकी खोई गरिमा लौटा दी,तब कह पाऐं हमने पाई आजादी।।
जब तक भटकेगी युवा शक्ति बेचारी, जब तक अपमानित होगी घर पर नारी।
जब तक बच्चों की आंखों में बेजारी, जब तक शासक ही होंगे भ्रष्टाचारी।।
जब तक न हो सके परिवर्तन बुनियादी,तब तक न कहें हमने पाई आजादी।।
हर कौशल से ये अपनी बात सुना दी, सोचो, कैसे मिल पाई ये आजादी।।
जब हुई भयानक मार काट बर्बादी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।
जब वीरों ने प्राणों की ज्योत जला दी,तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।
जब हुई भयानक मार काट बर्बादी, तब जा कर पाई हमने ये आजादी।
जब वीरों ने प्राणों की ज्योत जला दी,तब जा कर पाई हमने ये आजादी।।

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