सोमवार, 12 नवंबर 2012

Face Bookiya Mitron Ko Dipotsav Ki Mangal Kamna

फ़ेसबुक के सभी मित्रों को  कौशल किशोर की ओर से दीपावली की हार्दिक  मंगलकामना

फ़ेन सिन्धु का जितना विस्तृत उतनी खुशियॉ  पाये आप ।
सदा सर्वदा कोसों भागे तुमसे कष्टों  का अभिशाप ॥
बुरी बलायें कभी न घेरें हर पल खुशियों भरा रहे ।
कण कण  घर का सुरभित हो आनन्द प्रेम की नदी बहे ॥
मित्र सुखों के नहीं ,दुखों के भी मिल पायें ,सदा तुम्हें ।
त्रस्त दुखी पीडित जन सारे तुमको अपना बन्धु कहें ॥
परम मधुर जीवन तुम सबका हो खुशियों का ही प्रतिरूप ।
रिमझिम करती सुख वर्षा से, पूरित हो जाये मन कूप ॥
वाम विधाता अनुकूलित हों,तन मन में छाये सन्तोष ।
रत्नाकर सा गहन सुपूरित, रहे ग्यान धन बल का कोष ॥
कोलाहल से दूर शान्ति में ,ज्यों मिलता मन को विश्राम ।
दीप कर्म निष्ठा से जल कर, सुख पाता अनुपम अभिराम ॥
पावन प्रभु से एक विनय है, सदा आपका हो मंगल ।
वन उपवन घर बाहर प्रतिपल, भाग्य आपका रहे प्रबल ॥
ली न रहें कर्तव्य कर्म में हो, सबके मुख पर मुसकान ।
कीर्तिपताका जग में फ़हरे, मिले विरोधी से भी मान ॥
हास तथा परिहास सुरों से, गुन्जित रहे आपका घर ।
रजत स्वर्ण  की झंकारें हों, अनुदिन हो धन व्रष्टि प्रखर ॥
दिया जले घर घर में ऐसा, हो आलोक न जिसका मन्द ।
कमल खिले सबके ह्रदयों, का मन पाये अनुपम आनंद ॥
शुभ संकल्प उदित हों मन में, स्वयं सिध्द  हों सारे काज ।
भग्न चित्त में भी अनुगुंजित, रहें नेह वीणा के साज ॥
कादम्बरी ह्रदय की हर 'कौशल' से करती यही पुकार ।
मनुज श्रष्टि जब तक है जग में, सुखी रहे सबका परिवार ॥
नाथ जगत के करें क्रिपा सब सिध्दि मिलें अणिमा महिमा ।
है मन में बस भाव यही प्रिय, बढे आपकी गुण गरिमा ॥


ऊपर दिए गये छन्द की
प्रत्येक पंक़्ति के प्रथम अक्षर को
ध्यानपूर्वक देखें।
वहां भी आपसे कुछ कहने का प्रयास किया है ।
धन्यवाद!!




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