फिर से आज हवाएं गर्म
आज एक भारत का धर्म।
लटकी है सर पे तलवार
गीदड़ करते छुपके वार।।
पहले वाला नहीं निजाम
अब तो है आराम हराम।
अब देना है ऐसा दर्द
छाती पीटें ये नामर्द।।
हिन्दू मुस्लिम नहीं सवाल
अब तो रखना यही खयाल।
जो भी भारत के गद्दार।
उनकी गर्दन पर तलवार।।
भारत माता रही पुकार
हर जवान थामे हथियार।
रावी को फिर कर दो लाल
अब के कट जाये जंजाल।।
भारत का जन गण है एक
देश भक्ति ही सबकी टेक।
जैश मुहम्मद या लश्कर
अबके है तगड़ी टक्कर।।
अब न प्रेम के हैं उपहार
अब तो चौतरफा फटकार।
अब निपटेंगे अपने आप
गधे न बन पाएंगे बाप।।
--------!!बाकी अगली बार
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