गुरुवार, 10 जनवरी 2019


परम वीर चक्र विजेता : इनके शौर्य, साहस और बलिदान के आगे दुश्मनों ने टेके घुटने

परमवीर चक्र देश का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। यह सैन्य सम्मान सैनिकों को युद्ध में उनके अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान के लिए दिया जाता है।
इस पुरस्कार की शुरुआत 26 जनवरी 1950 को हुई थी। इसके पहले सेना का सर्वोच्च सम्मान विक्टोरिया क्रॉस हुआ करता था, जब भारत ब्रिटिश सेना के अंतर्गत आती थी। अब तक 21 जवानों को यह सैन्य सम्मान मिल चुका है। आइए जानते हैं आखिर कौन-कौन हैं वह शूरवीर जिन्हें यह पुरस्कार मिल चुका है।

1. परमवीर चक्र पाने वाले पहले व्यक्ति

मेजर सोमनाथ शर्मा

चौथी बटालियन, कुंमाऊं रेजीमेंट के मेजर सोमनाथ शर्मा ने देश की आजादी के तुरंत बाद हुए हमले के दौरान दुश्मन का डटकर सामना किया। लड़ाई के दौरान 3 नवंबर 1947 को वे शहीद हुए। परमवीर चक्र पाने वाले वे प्रथम व्यक्ति हैं।

2. नायक यदुनाथ सिंह ने बचाई थी कई सैनिकों की जान

नायक यदुनाथ सिंह

पहली बटालियन, सिख रेजीमेंट के नायक यदुनाथ सिंह ने हमले के दौरान आगे आकर दुश्मनों से लोहा लिया। उन्होंने अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए अपने साथी सैनिकों की जान बचाई लेकिन गंभीर रूप से घायल नायक सिंह शहीद हो गए।

3. घायल होने के बावजूद नहीं मानी हार

सेकंड लेफ्टिनेंट रमा रघोबा राणे

इंडियन कार्प्स ऑफ इंजिनयर्स लेफ्टिनेंट रमा रघोबा राणे ने युद्ध के दौरान अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ तमाम लैंड माइंस का पता लगाया, बल्कि घायल होने के बावजूद सड़कों को खाली कराया जिससे साथी सैनिकों की जान बची।

4. अकेले ही दुश्मन की एक पोस्ट पर किया था कब्जा

कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह

छ्ठी बटालियन, राजपूताना राइफल्स के मेजर पीरू सिंह ने अकेले ही दुश्मन की एक पोस्ट पर कब्जा कर लिया। इस दौरान दुश्मन की ओर से फेंके गए ग्रेनेड से वे बुरी तरह घायल हुए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दुश्मन की एक और पोस्ट को तबाह कर शहीद हो गए।

5. दुश्मनों के हमले का दिया मुंहतोड़ जवाब

लांस नायक करम सिंह

दुश्मन के हमले के दौरान सिख रेजिमेंट के लांस नायक करम सिंह सैन्य पोस्ट का नेतृत्व कर रहे थे। सिख रेजिमेंट ने हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया और हमले के दौरान दो दुश्मन सैनिकों के पोस्ट के बेहद करीब आ जाने पर उन्होंने उन दोनों को भी मार गिराया।

6. अदम्य शौर्य और साहस का परिचय दिया

कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया

गोरखा राइफल्स के कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया अन्य सैनिकों के साथ कांगो में यूएन फोर्स का हिस्सा बनकर युद्ध ऑपरेशन में हिस्सा लिया। वहां उन्होंने बहादुरी से लड़ते हुए अदम्य शौर्य और साहस का परिचय दिया। युद्ध के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए कैप्टन सलारिया दुश्मन की ओर से किये गए एक हमले में शहीद हो गए।

7. बिना किसी हथियार के ही दुश्मन को मार गिराया

मेजर धन सिंह थापा

चीन की ओर से किए गए हमले के दौरान गोरखा राइफल्स के मेजर धन सिंह थापा ने वीरता के साथ दुश्मनों का सामना किया। कई सैनिकों को उन्होंने बिना किसी हथियार के हाथापाई में ही मार गिराया। हमले के बाद उन्हें शहीद मान लिया गया था लेकिन बाद में पता चला कि उन्हें दुश्मन सेना ने बंदी बनाया है। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था।

8. घायल होने के बावजूद नहीं मानी हार

सूबेदार जोगिंदर सिंह

सिख रेजिमेंट के सूबेदार जोगिंदर सिंह ने चीन की ओर से किए गए हमले के दौरान अरुणाचल प्रदेश में उनका डटकर सामना किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया और अंत में लड़ते हुए शहीद हो गए।

9. चीन की विशाल सेना का डटकर किया सामना

मेजर शैतान सिंह

चीनी आक्रमण के दौरान रेजांग ला जैसी महत्वपूर्ण पोस्ट संभाल रहे कुमाऊं रेजिमेंट मेजर शैतान सिंह ने चीन की विशाल सेना का डटकर सामना किया। घायल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अंत में साहस के साथ लड़ते हुए वे शहीद हो गए।

10. युद्धक टैंकों के बीच बहादुरी से दुश्मन का सामना किया

लेफ्टिनेंट कर्नल एबी तारापुरे

पूना हॉर्स रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल तारापुरे को पाकिस्तान स्थित फिलौरा पोस्ट पर हमला करने का आदेश मिला था। जहां उन्होंने युद्धक टैंकों के बीच बहादुरी से दुश्मन का सामना किया। गंभीर रूप से घायल होने पर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अंत में बहादुरी के साथ लड़ते हुए शहीद हो गए।

11. मरणोपरान्त परमवीर चक्र से हुए विभूषितबाम्बे 

ग्रेनेडियर्स हवलदार अब्दुल हामिद

चौथी बटालियन, बाम्बे ग्रेनेडियर्स हवलदार हामिद 10 सितंबर, 1965 को पाकिस्तानी सैनिकों के खेमे कारन सेक्टर पर किए गए हमले का सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उन्हें मरणोपरान्त सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से विभूषित किया गया।

12. अंतिम सांस से पहले दुश्मनों के कई बंकर किए नष्ट

लायंस नायक अल्बर्ट एक्का

चौदहवीं बटालियन, बिहार रेजीमेंट के लायंस नायक अल्बर्ट एक्का 1971 के भारत-पाक य़ुद्ध के दौरान भारतीय क्षेत्र पर दोबारा कब्जा करने का आदेश मिलने पर अदम्य वीरात का परिचय दिया। अंतिम सांस लेने से पहले लांस नायक एक्का ने दुश्मनों के बंकर को नष्ट कर दिया। उन्हें मरणोपरान्त परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

13. दुश्मनों के दो विमानों को किया था नष्ट

फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखोन























18, फ्लाइंग बुलेट स्क्वांड्रन ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखोन भारत-पाक युद्ध के दौरान 14 दिसंबर, 1971 को दुश्मनों के दो विमानों को नष्ट कर दिया। लेकिन इस दौरान उनका विमान भी हादसे का शिकार हो गया। उनके पराक्रम को सलाम करते हुए उन्हें मरणोपरान्त परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

14. मरणोपरांत परमवीर चक्र से हुए सम्मानित

लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल

पूना हॉर्स, 47 इनफेंटरी ब्रिग्रेड के सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल भारत-पाकिस्तान युद्ध में विरोधी सेना से लोहा लेते हुए 16 दिसंबर, 1971 को वीरगति को प्राप्त हुए। सेकेंड लेफ्टिनेंट खेत्रपाल के शौर्य तथा बलिदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

15. घायल होने के बावजूद संघर्ष विराम तक मैदान नहीं छोड़ा

मेजर होशियार सिंह

ग्रेनेडियर रेजिमेंट के मेजर होशियार सिंह ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 17 दिसंबर को घायल होने के बावजूद संघर्ष विराम तक मैदान नहीं छोड़ा। उनके पराक्रम के लिए उन्हें परमवीर चक्र से विभूषित किया गया।

16. पाकिस्तानी घुसपैठियों से कराया था इलाके को खाली

नायब सूबेदार बाना सिंह

नायब सूबेदार बाना सिंह 23 मई, 1987 को पाकिस्तानी घुसपैठियों के कब्जे वाले इलाके को खाली कराने के लिए उन्होंने अपनी टीम का शानदार नेतृत्व किया। उनके इस कुशल नेतृत्व के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया

17. गोली लगे होने के बावजूद दिखाया अदम्य साहस

मेजर रामास्वामी परमेश्वरम

माहर रेजीमेंट के मेजर रामास्वामी परमेश्वरम ने 25 नवंबर, 1987 को श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान छाती में गोली लगे होने के बावजूद अदम्य साहस दिखाते हुए एक आतंकवादी का राइफल छीन लिया और उसे मार डाला। इस अभियान में वह वीरगति को प्राप्त हुए, उन्हें मरणोपरान्त परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

18. गोली लगने के बावजूद ग्रेनेड दागा

ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव

अठारहवीं बटालियन, द ग्रेनेडियर्स योगेंद्र ने करगिल युद्ध के दौरान 3-4 जुलाई, 1999 तीन गोलियां लगी होने के बावजूद दुश्मनों के बंकर तक पहुंचने के लिए 60 फुट की ऊंचाई पार की और वहां ग्रेनेड दाग दिया, जिसमें दुश्मन सेना के 4 जवान मारे गए। उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें परमवीर चक्र से विभूषित किया गया।

19. दुश्मनों की बंदूक से ही उन्हें मार गिराया

राइफलमैन संजय कुमार

तेरहवीं बटालियन, जम्मू कश्मीर राइफल्स के राइफलमैन संजय कुमार करगिल युद्ध के दौरान 4 जुलाई, 1999 को उन्होंने लद्दाख क्षेत्र में दुश्मन सेना के जवान का मशीनगन छीन कर उनके तीन जवानों को मार गिराया। राइफलमैन संजय की वीरता को सम्मानित करने के लिए उन्हें परमवीर चक्र दिया गया।

20. सैन्य अधिकारी की जान बचाने के दौरान दुश्मनों की गोली लगी

कैप्टन विक्रम बत्रा

तेरहवीं बटालियन, जम्मू कश्मीर राइफल्स के कैप्टन विक्रम बत्रा करगिल युद्ध के दौरान सात, जुलाई 1999 को उन्हें अपने साथी सैन्य अधिकारी की जान बचाने के दौरान दुश्मनों की गोली लगी। शहीद कैप्टन बत्रा को उनकी वीरता के लिए सम्मानित करते हुए मरणोपरान्त परमवीर चक्र दिया गया।

21. भारत का झंडा दोबारा लहराने के लिए अंतिम दम तक लड़े

लेफ्टिनेंट मनोज पांडे

गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे करगिल युद्ध के दौरान 2-3 जुलाई को लेफ्टेघुसपैठियों को बटालिक सेक्टर छोड़ने पर मजबूर कर दिया और खालाबुर क्षेत्र में भारत का झंडा दोबारा लहराने के लिए अपने प्राण त्यागने तक संघर्षरत रहे। उनके शौर्य तथा पराक्रम के लिए उन्हें मरणोपरान्त परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

परमवीर चक्र से जुड़ी कुछ खास बातें :

परमवीर चक्र को सावित्री बाई खालोनकर ने डिजाइन किया था। मेजर सोमनाथ शर्मा को मरणोपरांत पहला परमवीर चक्र का सम्मान मिला था। सबसे ज्यादा सेना के 20 और एयरफ़ोर्स के एक जवान को यह सम्मान मिला है। नेवी के अब तक किसी भी जवान को यह सम्मान नहीं मिला है।


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