21. ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव 1999 (कारगिल) (जीवित)
ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव का जन्म 10 मई 1980 को बुलंदशहर के औरंगाबाद अहीर गांव में हुआ था। 27 दिसंबर 1996 में उन्होंने 18 ग्रेनेडियर बटालियन में शामिल हो भारतीय सेना में प्रवेश किया। मात्र 19 वर्ष की आयु में उन्होंने परमवीर चक्र सम्मान प्राप्त किया। 1999 की लड़ाई में उनका विशेष पराक्रम था टाइगर हिल पर तिरंगा लहराना, जो एक कठिन और संघर्षपूर्ण मिशन था।
टाइगर हिल में घुसपैठियों की 3 चौकियां थीं। मुठभेड़ के बाद पहली चौकी पर कब्जा करने के बाद केवल 7 कमांडो वाला दल आगे बढ़ा। दुश्मन की ओर से अंधाधुंध गोलीबारी में 2 सैनिक शहीद हो गए और आगे बढ़े 5 सैनिकों में से भीषण मुठभेड़ में दुर्भाग्य से 4 शहीद हो गए। अंत में सिर्फ ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव बचे जिनके बाएं हाथ की हड्डी टूटने से उनके हाथ ने काम करना बंद कर दिया था।
योगेन्द्र सिंह ने हाथ को बेल्ट से बांधकर कोहनी के बल चलना आरंभ किया और एके-47 राइफल से 15-20 घुसपैठियों को मार गिराया। अब दूसरी चौकी पर भी भारत का कब्जा हो गया। 17,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित तीसरी चौकी पर कब्जा करने के लिए वे धुआंधार गोलीबारी करते हुए आगे बढ़े जिससे डरकर दुश्मन भाग खड़े हुए तो कुछ चौकी में ही छिप गए। योगेन्द्र सिंह यादव ने बहादुरी से आगे बढ़कर घुसपैठियों को भी मार गिराया और तीसरी चौकी पर कब्जा जमा लिया और अंतत: योगेन्द्र सिंह यादव टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने में सफल रहे।

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