बुधवार, 9 जनवरी 2019

परमवीर वाटिका के तीसरे पुष्प....!!

परमवीर-वाटिका के तीसरे पुष्प...
श्री राम राघोबा राणे .....सादर नमन ...!!😊

26 जून 1918 कर्नाटक के धारवाड़ स्थित हवेली गांव में जन्मे रामा राघोबा राणे को जीवित रहते हुए सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। जुलाई 1940 को बांबे इंजीनियर में आने के बाद उन्हें नायक के रूप में पदोन्नति मिली और वे 26 इंफेंट्री डिवीजन की 28 फील्ड कंपनी में आए। रामा ने अपनी सूझबूझ, बहादुरी, नेतृत्व क्षमता से सबको प्रभावित किया और उन्हें सेकंड लेफ्ट‍िनेंट बनाकर जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया।<br>
कश्मीर में कबाइली हमले के समय नौशेरा की फतह के बाद भारतीय सेना द्वारा दुश्मन के खिलाफ बनाई गई नीति के तहत बारवाली रिज, चिंगास और राजौरी पर कब्जा करने के लिए नौशेरा-राजौरी मार्ग की भौगोलिक रुकावटों और दुश्मनों की सुरंगों को साफ करना जरूरी था। घुमावदार रास्तों, सुरंगों और कई रुकावटों वाले इस मोर्चे पर रामा राघोबा व उनकी सेना द्वारा 8 अप्रैल 1948 को बहादुरी और सूझबूझ के साथ काम किया गया और 10 अप्रैल तक वे लगातार संघर्ष में डटे रहे। 11 अप्रैल 1948 तक उन्होंने चिंगास का रास्ता साफ कर दिया और इस दिन भी रात 11 बजे तक आगे के रास्ते की सभी बाधाएं हटा दीं। भारत की जीत के लिए सेकंड लेफ्टि‍नेंट रामा राघोबा का यह योगदान बेहद महत्वपूर्ण था। सौभाग्य की बात तो यह है कि यह सम्मान उन्होंने स्वयं प्राप्त किया।

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