परमवीर वाटिका के दूसरे पुष्प.....!!
नायक जदुनाथसिंह- 1948 ....
सादर नमन...!!
211 नवंबर 1916 को उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर जिले के खजूरी गांव में जन्मे नायक जदुनाथसिंह 1941 में भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में भर्ती हुए। जनवरी 1948 में कबाइली आक्रमण के समय उन्होंने नौशेरा इलाके में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व किया।
एक-एक कर जदुनाथ के सिपाही कम होते गए, लेकिन उनके हौसले बुलंद थे। जब सभी सिपाही घायल हो गए तो जदुनाथ ने अकेले ही स्टेनगन से गोलियों की बौछार कर दुश्मनों का सामना किया। उन्होंने दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। जब तक पैरा राजपूत की 3 अन्य टुकड़ियां मोर्चे पर पहुंचतीं, जदुनाथ लड़ाई में डटे रहे। लेकिन, अचानक कहीं से एक गोली आकर उनके सिर में लगी और वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनके अद्भुत शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
नायक जदुनाथसिंह- 1948 ....
सादर नमन...!!
211 नवंबर 1916 को उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर जिले के खजूरी गांव में जन्मे नायक जदुनाथसिंह 1941 में भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में भर्ती हुए। जनवरी 1948 में कबाइली आक्रमण के समय उन्होंने नौशेरा इलाके में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व किया।
एक-एक कर जदुनाथ के सिपाही कम होते गए, लेकिन उनके हौसले बुलंद थे। जब सभी सिपाही घायल हो गए तो जदुनाथ ने अकेले ही स्टेनगन से गोलियों की बौछार कर दुश्मनों का सामना किया। उन्होंने दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। जब तक पैरा राजपूत की 3 अन्य टुकड़ियां मोर्चे पर पहुंचतीं, जदुनाथ लड़ाई में डटे रहे। लेकिन, अचानक कहीं से एक गोली आकर उनके सिर में लगी और वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनके अद्भुत शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

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