रविवार, 10 फ़रवरी 2019

ग्यारहवां दिन...!! अकेला चलो..!! 😊😊 11th day...Do not dipendra on others..!!😊

महान व्यक्ति सदैव अकेले चले हैं और इस अकेलेपन के कारण ही दूर तक चले हैं।
अकेले व्यक्तियों ने अपने सहारे ही संसार के महानतम कार्य संपन्न किए हैं। उन्हें अपनी ही एकमात्र प्रेरणा प्राप्त हुई है और वे अपने ही आंतरिक सुख से सदैव प्रफुल्लित रहे हैं।
दूसरे से दुख मिटाने की उन्होंने कभी आशा नहीं रखी। मृतकों में ही उन्होंने सहारा देखा।
अकेलापन जीवन का परम सत्य है किन्तु अकेलेपन से घबराना जी तोड़ना कर्तव्य पथ से हतोत्साहित या निराश होना सबसे बड़ा पाप है। अकेलापन आपके निजी आंतरिक प्रदेश में छुपी हुई महान शक्तियों को विकसित करने का साधन है।अपने ऊपर आश्रित रहने से आप अपनी उच्चतम शक्तियों को खोज निकालते हैं...!!😊😊

The day you develop faith in the strength of your own hands, feet, and heart, your soul will tell you to go forth alone.
 Keep high expectations of others is like building castles in the air, Unreal and worthless pinning your hopes on others cripples your own originality and courage. The person who centers his life around another person becomes alone very quickly.
Putting your life in another person's hands is like setting sail without  knowing where you are going...!!😊😊


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