आइसक्रीम की शुरुआत कब व कैसे हुई यह निश्चित रूप से मालूम नहीं है। 2000 साल पहले रोमन सम्राट नीरों ने अपने गुलामों से कहा कि वो पास के पहाड़ों से बर्फ ले आएं।
नीरो ने उस बर्फ में फलों का रस व शहद मिलाया और उसका आनंद लिया।
धीरे-धीरे लोग बर्फ में अन्य स्वादिष्ट चीजें मिलाकर खाने लगे और सन 1600 तक आइसक्रीम अत्यंत लोकप्रिय हो गई ।इसके बाद अनेक प्रकार के प्रयोग करके इसे नया नया रूप आकार व स्वाद देकर और लोकप्रिय बनाते चले गए।
धीरे-धीरे लोग बर्फ में अत्यंत स्वादिष्ट चीजें मिलाकर खाने लगे।
एक बार रॉबर्ट ग्रीन नामक व्यक्ति,जो पार्टियों में वेटर का काम करता था, ने मजबूरी वश एक प्रयोग कर डाला। उस समय क्रीम और कार्बोनेटेड पानी मिलाकर एक पेय बनाया जाता था जो एक शताब्दी से खासा लोकप्रिय था।
एक पार्टी में उस पेय के लिए क्रीम कम पड़ गया। ग्रीन ने उसकी जगह वनीला आइसक्रीम डाल दी। आइसक्रीम फोम के रूप में गिलास में ऊपर तक भर गई तथा यह घोल अत्यंत स्वादिष्ट था और शीघ्र ही लोकप्रिय हो गया।
इसे आइसक्रीम सोडा के नाम से पुकारा जाने लगा।
इसी तरह के मजबूरी वश किये गए प्रयोग ने एक अन्य प्रकार की आइसक्रीम को जन्म दिया।
स्मिथ सन नामक व्यक्ति के पास एक छोटा सा रेस्त्रों था, जिसमें लोग आइसक्रीम खाने के लिए आया करते थे।1890 का एक रविवार था और उस दिन उसके रेस्तरों में आइसक्रीम कम पड़ने लगी। दूसरी चीजें जैसे फल विभिन्न प्रकार की चॉकलेट क्रीम आदि काफी थी। रविवार को आइसक्रीम की आपूर्ति नहीं होती थी इसलिए स्मिथसन ने इसमें आइसक्रीम की मात्रा कम कर दी तथा उसके ऊपर फल चॉकलेट सिरप और दूसरी गाढ़ी क्रीम डालना आरम्भ कर दिया।
जब ग्राहकों ने इसकी तारीफ करना शुरू किया तो उसने इसका नाम सन्डे आइसक्रीम रख दिया।अब वह हर रविवार को सन्डे आइसक्रीम देने लगा। ईसाई लोग रविवार को ईश्वर का विशेष दिन मानते हैं और कुछ धार्मिक लोगों ने संडे नाम का विरोध किया तो स्मिथसन ने संडे की स्पेलिंग बदल दी। कुरकुरे कोन में आइसक्रीम खाने का अलग ही आनंद है।इसकी शुरुआत भी मजबूरी में ही हुई।
1904 में सैंटलुइ के मेले में दो व्यक्ति खाने की वस्तुओं के काउंटर पर अगल-बगल खड़े थे। एक पेपर की प्लेटों में आइसक्रीम बेच रहा था, और दूसरा पेस्ट्री जैसा लगने वाला वेफल बेच रहा था, जिसके ऊपर चीनी के दाने चिपके हुए थे।
अगस्त का महीना था और लोग धड़ाधड़ आइसक्रीम ले रहे थे। फल बेचने वाला मुंह ताक रहा था कि तभी अचानक कागज की कमी पड़ गई और आइसक्रीम वाले को लगा कि उसे अपना काउंटर बंद करना पड़ेगा। तभी वेफल बेचने वाला उसकी मदद के लिए आगे आया। उसने वेफल से कोन बनाया, और दोनों उसमें आइसक्रीम भर कर बेचने लगे। लोगों को कुरकुरा वेफल आइसक्रीम के साथ बहुत भाया और अब वह खूब बिकने लगा।
1920 तक एक तिहाई आइसक्रीम कोन में बिकने लगी।एक बार क्रिश्चियन नेल्सन नामक व्यक्ति आयोवा स्थित अपनी दुकान पर आइसक्रीम व चाकलेट बेच रहा था 1 दिन एक बालक हाथ में सिक्के लिए दुकान में आया और आइसक्रीम की फरमाइश की। फिर उसने इरादा बदल दिया और चॉकलेट की फरमाइश कर डाली।
नेल्सन को लगा कि यह बालक तभी संतुष्ट हो पाएगा जब उसे दोनों साथ मिलेंगे।उसने आइसक्रीम की एक स्लाइस काटी और उसके दोनों ओर चॉकलेट की पतली परत चिपका दी। अब नेल्सन नई चॉकलेट वाली आइसक्रीम जमाने लगा।उसने इस दिशा में अनेक प्रयोग भी कर डाले ताकि चॉकलेट उसकी आइसक्रीम से भली प्रकार चिपक जाए। उसे सफलता आसानी से नहीं मिल रही थी ।
तभी उसको एक सेल्समैन ने सलाह दी कि वह कोको बटर का प्रयोग करें। अब नेल्सन ने नए सिरे से प्रयोग प्रारंभ किये। 1920 में एक रात उसने आइसक्रीम की एक स्लाइस चॉकलेट के मिश्रण में डाली। कुछ देर बाद चॉकलेट ठंडी होकर आइसक्रीम के चारों ओर जम गया।
इसके साथ ही चॉकलेट लगीआइसक्रीम अच्छी खासी लोकप्रिय हो गई और क्रिश्चियन नेलसन शीघ्र ही एक धनवान व्यक्ति बन गया
नीरो ने उस बर्फ में फलों का रस व शहद मिलाया और उसका आनंद लिया।
धीरे-धीरे लोग बर्फ में अन्य स्वादिष्ट चीजें मिलाकर खाने लगे और सन 1600 तक आइसक्रीम अत्यंत लोकप्रिय हो गई ।इसके बाद अनेक प्रकार के प्रयोग करके इसे नया नया रूप आकार व स्वाद देकर और लोकप्रिय बनाते चले गए।
धीरे-धीरे लोग बर्फ में अत्यंत स्वादिष्ट चीजें मिलाकर खाने लगे।
एक बार रॉबर्ट ग्रीन नामक व्यक्ति,जो पार्टियों में वेटर का काम करता था, ने मजबूरी वश एक प्रयोग कर डाला। उस समय क्रीम और कार्बोनेटेड पानी मिलाकर एक पेय बनाया जाता था जो एक शताब्दी से खासा लोकप्रिय था।
एक पार्टी में उस पेय के लिए क्रीम कम पड़ गया। ग्रीन ने उसकी जगह वनीला आइसक्रीम डाल दी। आइसक्रीम फोम के रूप में गिलास में ऊपर तक भर गई तथा यह घोल अत्यंत स्वादिष्ट था और शीघ्र ही लोकप्रिय हो गया।
इसे आइसक्रीम सोडा के नाम से पुकारा जाने लगा।
इसी तरह के मजबूरी वश किये गए प्रयोग ने एक अन्य प्रकार की आइसक्रीम को जन्म दिया।
स्मिथ सन नामक व्यक्ति के पास एक छोटा सा रेस्त्रों था, जिसमें लोग आइसक्रीम खाने के लिए आया करते थे।1890 का एक रविवार था और उस दिन उसके रेस्तरों में आइसक्रीम कम पड़ने लगी। दूसरी चीजें जैसे फल विभिन्न प्रकार की चॉकलेट क्रीम आदि काफी थी। रविवार को आइसक्रीम की आपूर्ति नहीं होती थी इसलिए स्मिथसन ने इसमें आइसक्रीम की मात्रा कम कर दी तथा उसके ऊपर फल चॉकलेट सिरप और दूसरी गाढ़ी क्रीम डालना आरम्भ कर दिया।
जब ग्राहकों ने इसकी तारीफ करना शुरू किया तो उसने इसका नाम सन्डे आइसक्रीम रख दिया।अब वह हर रविवार को सन्डे आइसक्रीम देने लगा। ईसाई लोग रविवार को ईश्वर का विशेष दिन मानते हैं और कुछ धार्मिक लोगों ने संडे नाम का विरोध किया तो स्मिथसन ने संडे की स्पेलिंग बदल दी। कुरकुरे कोन में आइसक्रीम खाने का अलग ही आनंद है।इसकी शुरुआत भी मजबूरी में ही हुई।
1904 में सैंटलुइ के मेले में दो व्यक्ति खाने की वस्तुओं के काउंटर पर अगल-बगल खड़े थे। एक पेपर की प्लेटों में आइसक्रीम बेच रहा था, और दूसरा पेस्ट्री जैसा लगने वाला वेफल बेच रहा था, जिसके ऊपर चीनी के दाने चिपके हुए थे।
अगस्त का महीना था और लोग धड़ाधड़ आइसक्रीम ले रहे थे। फल बेचने वाला मुंह ताक रहा था कि तभी अचानक कागज की कमी पड़ गई और आइसक्रीम वाले को लगा कि उसे अपना काउंटर बंद करना पड़ेगा। तभी वेफल बेचने वाला उसकी मदद के लिए आगे आया। उसने वेफल से कोन बनाया, और दोनों उसमें आइसक्रीम भर कर बेचने लगे। लोगों को कुरकुरा वेफल आइसक्रीम के साथ बहुत भाया और अब वह खूब बिकने लगा।
1920 तक एक तिहाई आइसक्रीम कोन में बिकने लगी।एक बार क्रिश्चियन नेल्सन नामक व्यक्ति आयोवा स्थित अपनी दुकान पर आइसक्रीम व चाकलेट बेच रहा था 1 दिन एक बालक हाथ में सिक्के लिए दुकान में आया और आइसक्रीम की फरमाइश की। फिर उसने इरादा बदल दिया और चॉकलेट की फरमाइश कर डाली।
नेल्सन को लगा कि यह बालक तभी संतुष्ट हो पाएगा जब उसे दोनों साथ मिलेंगे।उसने आइसक्रीम की एक स्लाइस काटी और उसके दोनों ओर चॉकलेट की पतली परत चिपका दी। अब नेल्सन नई चॉकलेट वाली आइसक्रीम जमाने लगा।उसने इस दिशा में अनेक प्रयोग भी कर डाले ताकि चॉकलेट उसकी आइसक्रीम से भली प्रकार चिपक जाए। उसे सफलता आसानी से नहीं मिल रही थी ।
तभी उसको एक सेल्समैन ने सलाह दी कि वह कोको बटर का प्रयोग करें। अब नेल्सन ने नए सिरे से प्रयोग प्रारंभ किये। 1920 में एक रात उसने आइसक्रीम की एक स्लाइस चॉकलेट के मिश्रण में डाली। कुछ देर बाद चॉकलेट ठंडी होकर आइसक्रीम के चारों ओर जम गया।
इसके साथ ही चॉकलेट लगीआइसक्रीम अच्छी खासी लोकप्रिय हो गई और क्रिश्चियन नेलसन शीघ्र ही एक धनवान व्यक्ति बन गया

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