भारतीय परंपराओं में कर्तव्यों के प्रति अधिकार की अपेक्षा अधिक बल दिया गया है।यदि हम सब अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं तो हमें अपने अधिकार तलाशने नहीं पड़ते बल्कि वे हमें सहज ही प्राप्त होते है। यदि हमारे संविधान में नागरिकों के मूल अधिकारों की चर्चा है तो वही मूल कर्तव्य को भी सम्मिलित किया गया है। यह हमारी विडंबना है की हमारे मूल संविधान में न तो मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया गया है और ना उन्हें अनिवार्य बनाया गया है। संविधान ने हमें 6 मूल अधिकार दिए हैं जिन्हें लोकतांत्रिक सरकार द्वारा वैधानिक रूप से प्रत्येक नागरिक को उपलब्ध कराना आवश्यक है। किंतु साथ ही जो 10 मूल कर्तव्य है उन्हें स्वीकार करना एवं उनका पालन करना नागरिकों के विवेक पर छोड़ दिया गया है।संविधान के 42 वें संविधान संशोधन में 10 मूल कर्तव्य एवं 86 वें संविधान संशोधन में एक मूल कर्तव्य को शामिल किया गया। वास्तव में कर्तव्य शब्द सभी प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह है। उदाहरण के लिए वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण का प्रदूषण और जनसंख्या वृद्धि है।इन संकटों से निपटने के लिए जब तक नागरिक सहयोग प्राप्त ना हो तब तक कोई भी सरकार समर्थ नहीं है।सामूहिक रूप से प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह कानूनी, नीतिगत एवं व्यावहारिक रूप से पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत प्रयास करें।निश्चय ही इससे इस समस्या में सकारात्मक परिवर्तन लाए जा सकते हैं। जहां तक नैतिक कर्तव्यों का प्रश्न है तो यह व्यक्तिगत व्यवहार से संबंधित है।अच्छी शिक्षा प्रेरक और उत्साहवर्धक वातावरण तथा भविष्य की सुनिश्चित स्थिति प्राप्त करना बच्चों का अधिकार है, तो साथ ही अपने गुरुजनों का आदर करना माता पिता की सेवा करना उनका कर्तव्य है। इसी प्रकार शुद्ध एवं परिष्कृत खाद्य सामग्री जल एवं वायु प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है तो मिलावट कालाबाजारी भ्रष्टाचार एवं अन्य नकारात्मक गतिविधियों से दूर रहना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। रेलवे सड़क एवं अन्य जन सुविधाओं का उपयोग करना हमारा अधिकार है तो अपनी सांस्कृतिक विरासत महत्वपूर्ण इमारतें रेल बस इत्यादि सार्वजनिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि से दूर रहना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। हमें अच्छी सड़कें चाहिए तो ट्रैफिक के नियमों का पालन करना भी हमारा कर्तव्य है। बिजली पानी की उपलब्धता हम तक सरलता से हो और हमें इसके लिए दिक्कत न उठानी पड़े यह हमारा अधिकार है, तो बिजली और पानी की रक्षा करना और उसे बर्बादी से रोकना यह हमारा कर्तव्य है साफ-सुथरी गलियां एवं चौड़ी सड़कें प्राप्त करना हमारा अधिकार है तो कूड़े को उचित जगह पर डालना एवं सही तरीके से उसका निस्तारण करना हमारा कर्तव्य है। स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं हमारा अधिकार है तो सफाई के लिए जागरूक रहना एवं वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना हमारा कर्तव्य है।प्रदूषण मुक्त वातावरण तथा प्राकृतिक आपदा से मुक्त माहौल प्राप्त करने के लिए सरकार के अपने प्रयास तो है ही, लेकिन स्वेच्छा से समाज सेवा, नदियों की सफाई, बेकार पड़ी भूमि पर वन रोपण,वन संपदा का संरक्षण, पर्वतीय प्राकृतिक अंचलों की सुरक्षा एवं जनसंख्या पर नियंत्रण यह हमारे नागरिक कर्तव्य है। सरकार से अधिकार की मांग करना हमारा अधिकार है तो सरकार चुनने के लिए मतदान करना हमारा कर्तव्य भी है।कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना हमारा अधिकार है तो सही समय पर टैक्स का भुगतान करना हमारा कर्तव्य है। अर्थात जब तक हम कर्तव्य निष्ठा एवं दायित्व बोध के भाव से युक्त एक नागरिक संस्कृति को बढ़ावा नहीं देते तब तक संविधान की प्रस्तावना में दिए गए लक्ष्य एवं उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकते।वह चाहे हमारा कार्यस्थल हो कोई सार्वजनिक स्थान हो या हमारा अंतरमन हो, जब तक सर्वत्र हम कर्तव्य परायण जीवन शैली को अपनाने की दिशा में नहीं बढ़ते,तब तक नए भारत के निर्माण एवं उन्नत भविष्य की कल्पना केवल कल्पना ही रह जाएगी।
बुधवार, 16 सितंबर 2020
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