गुरुवार, 11 जुलाई 2024
प्रभात किरण (41)जब आप दूसरों को प्रसन्न मुख से अपनी ओर बुलाते हों या बातचीत करते हों, तो अपने को पहचानें
जब आप दूसरों को प्रसन्न मुख से अपनी ओर बुलाते हों या बातचीत करते हों, तो अपने को पहचानें उससे हार्दिक प्रसन्नता और उत्साह होता है। प्रसन्नता दैवी आकर्षक तत्त्व है। आप सदैव प्रसन्नता से ही बातें कीजिए। जब आप दूसरे के पास मिलने जाएँ, तो भी आपको प्रसन्नता प्रदर्शित करनी चाहिए। प्रसन्नता से दूसरा व्यक्ति भी पुष्प की भाँति खिल उठता है।प्रसन्नता, प्रफुल्लता, हर्ष, खुशी, उत्साह, जिंदादिली, उल्लास और आनंद शब्द नहीं रत्न हैं। इन शब्दों के अंदर छिपे हुए भावों को जीवन में उतारिए और अपने स्वभाव का एक अंग बनाइए। लोगों के पास अपनी ही मुसीबत कम नहीं हैं। वे मुहर्रमी सूरत पसंद नहीं करते। उन्हें तो आपके हास्य, विनोद, उत्तम स्वभाव, प्रसन्न मुख, आकर्षक बातें, नई-नई चमत्कारपूर्ण उक्तियों की आवश्यकता है।
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