मंगलवार, 16 जुलाई 2024

प्रभात किरण (46)अधूरे रिश्ते

हमारे दुःख की बहुत सी वजहें अधूरे रिश्तों से उत्पन्न होती हैं। ये रिश्ते आपके माता- पिता के साथ, प्रियजनों के साथ या मित्रों के साथ हो सकते हैं। जब रिश्ते अपूर्ण होते हैं, वे हमारे भीतर कुलबुलाते रहते हैं और वे कष्टप्रद विचारों या सपनों के रूप में उभरते हैं। कभी-कभार वे बार-बार आने वाले सपने बन जाते हैं। चाहे जो हो, जब हम पुरानी बातें याद करते हैं तो ये परेशान करनेवाले विचार हमें दुःखी बना जाते हैं।

ऐसा क्यों है ? इसलिए, क्योंकि हम सभी हर रिश्ते में एक निश्चयात्मकता, एक समापन की चाह रखते हैं।

समापन क्या है? यह एक भावनात्मक समझौता है। इसी वजह से मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि एक खराब शादी में, तकलीफदेह रिश्ते में रहने की अपेक्षा तलाक लेना बेहतर विकल्प है। क्योंकि तलाक एक अंत है। यह शादी से जुड़े सभी झगड़ों, तकलीफ और शिकायतों का अंत है। उसके बाद व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ सकता है।

यही तर्क अन्य नासूर बन चुके रिश्तों पर भी लागू होता है। कोई अपने पुरुष मित्र या महिला मित्र द्वारा अचानक ठुकराया जाना पसंद नहीं करता। हम रिश्ता टूटने की वजह जानना चाहते हैं। हम सभी रिश्तों को एक अंत देना चाहते हैं।

हम सभी को क्षमा करते हुए इन रिश्तों और व्यक्तियों से उबरने में सक्षम होना चाहिए। हमें पहले उनका दृष्टिकोण समझना चाहिए और तभी, अगर हमें लगता है कि वे सही हैं, हम उन्हें माफ कर सकते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

समाचार का व्रत रखिए

आजकल नकारात्मक समाचार ज्यादा बिकते हैं। हमारे समाज में ज्यादातर लोग एक प्रसिद्ध इन्सान के जुर्म का मुकदमा देखना किसी वास्तव में ...