रविवार, 21 जुलाई 2024

वर्तमान में जिएं और जीवन को विस्तार दें

'जीवन तूफान से बचने का नाम नहीं है, वह बारिश में नाचने का नाम है।' हर पल को जीते हुए, हमें दुःख के समय दुःख और सुख के समय खुशी का अनुभव करना चाहिए।

दुःख का एक मुख्य कारण यह है कि हममें से अधिकतर लोग अतीत या भविष्य के बारे में चिंतित रहते हैं या उसके बारे में सोचते रहते हैं। हम वर्तमान में जीते हुए उसका अधिकांश लाभ नहीं उठाना चाहते। हम ऐसी बीती घटनाओं को याद करते रहते हैं, जिन्होंने हमारे जीवन को प्रभावित किया, अधिकांश ने नकारात्मक रूप में और फिर लगातार खुद से कहते रहते हैं— 'अगर ऐसा होता, तो कैसा होता?'

यदि हम अतीत को प्रेमपूर्वक याद नहीं करते, तो हम अपने साथ घटी घटनाओं के लिए दूसरों को दोषी ठहराने की कोशिश करते हैं। हमें बहुत से ऐसे लोग मिलते हैं, जो अपने अतीत को स्वीकार नहीं कर पाए; चाहे वह टूटे रिश्तों के संबंध में हो या गए धन के बारे में। दुर्भाग्यवश, वे अपने वर्तमान के लिए कुछ खास नहीं कर पाते, क्योंकि उनका अतीत हमेशा उसमें दखल देता है। ऐसे लोगों के दिमाग में अवसाद आसानी से घर बना लेता है। और फिर स्थितियाँ बिगड़ती जाती हैं।

कृपया याद रखें कि अतीत बदला नहीं जा सकता और भविष्य अनिश्चित होता है। हमारे पास सिर्फ वर्तमान होता है। और वर्तमान ही भविष्य को बदलने में मदद कर सकता है। इसलिए बेहतर यह है कि हम एकाग्र रूप से वर्तमान में जीते हुए अपने पास उपलब्ध हर पल का लाभ उठाएँ।

ऐसी एकाग्रता कैसे प्राप्त की जाए? उत्तर है .....ध्यान से!  

हममें से कई लोग यह नहीं जानते कि ध्यान कई सत्रों में किया जानेवाला मन को शांत करनेवाला अभ्यास ही नहीं है। ध्यान उस हर क्रिया के बारे में सजग रहना है, जो हम अपनी चेतनावस्था में करते हैं। दूसरे शब्दों में, ध्यान का अर्थ हर क्षण को जीना है। आपका 90 फीसदी जीवन आपकी प्रतिक्रिया से प्रेरित होता है।अब समय है कि हम समझें कि हमारी प्रतिक्रियाएँ बेहतर या बदतर नतीजों को प्रेरित करती हैं। वे हमारा जीवन बना सकती हैं; या बिगाड़ सकती हैं। इसी कारण यह कहा जा सकता है कि हमारी नियति अकसर हमारे ही हाथों में होतीहै।


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