हनुमत सदा राम गुण गावैं ।।
तैंतीस कोटि देव हैं सबके ढंग निराले
भिन्न-भिन्न निज भक्तोंको वर देने वाले।।
पवनतनय की करोसाधना सब सध जाते आञ्जनेयके भक्त सभीको प्रिय बनजाते
तुम्हें जगत में सदा राम का नाम सुहावै। भजनतुम्हारा करें, राम के मन को भावै।।
कोई देता धन वैभव कोई सुख देता।
कोई शक्ति निधान शक्ति का बने प्रणेता।
एकतुम्हारी भक्ति रामकी कृपा दिलाती।। रामभक्ति जीवनकी सुखऔषधि बन जाती ।।
यहप्रभाव बस एक आपका भजन दिलाए।
सियराघव मनबसे कि जो जन तुमको ध्याए।
राघव मन जो भाया उसको लक्ष्मण चाहें। भरत शत्रुहन बड़भागी के भाग सराहें।।
माँसीता की कृपा सहजही वो पा जाता। एकनिष्ठ हो जो प्राणी हनुमत गुण गाता।।
रामचरित सुनि लेय परम आनन्द मनावै ।
भजन तुम्हारा सदा रामकी शरण दिलावै
जनम जनम के दुःख बिसरावैं।
राम कथा कलि कलुष मिटावैं।।
जाने कितने जन्म जगत में हमने पाए। जाने क्या क्या बन कर जग में चक्कर खाए।।
हाथी घोड़े श्वान सिंह बहु रूप बनाया। तब जा कर मानव का यह शुभ जीवन पाया।।
वही बन्धु जो राम सिया की कथा सुनावै। ध्यान तुम्हारा कोटि जन्म के कष्ट भुलावै
यहजीवन साकार तभी जब रामसम्हाले। हाथ बढ़ाकर भव वारिधि से स्वयं निकाले।।
माता की जो कोख प्रथम गृह हर प्राणी का ।
रामनाम से जुड़ा जन्म जीवन है नीका।।
जन्म-मरण के कोटि-कोटि दु:ख हम हैं पाते।
इसी चक्र में बार बार उलझे रह जाते ।।
हे दयालु हनुमन्त, पराएदु:ख पर कातर। एक दृष्टि पड़ जाय दूर हो जावैं सब डर।
सारे दुःके फन्द सहज में ही कट जाते। महाबली के बल से भय संकट हट जाते
भक्त हृदय से अहंकार को आप मिटावैं । जनम-जनम के दुःख-संकट पल में बिसरावैं।।
(क्रमश:)
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