बंदनवार में लगे फूलों से प्रक्षेपित गंध - लहरियाँ देवताओं का स्वागत करती हैं, जिससे देवता प्रसन्न होते हैं, जिससे उनकी सात्त्विकता का हमें लाभ प्राप्त होता है। आम के पत्तों में अन्य वृक्षों के पत्तों की अपेक्षा देवताओं की लहरियों को खींचने तथा प्रक्षेपित करने की क्षमता अधिक होती है । इस कारण बंदनवार में आम के पत्तों का प्रयोग होता है। गेंदे के फूल अधिक समय के लिए ताजा रहते हैं । इस दृष्टि से उनका उपयोग भी प्रायः होता है। परंतु बंदनवार में लगे पत्ते व फूल स्वच्छ होने चाहिए, इसलिए उन्हें पहले स्वच्छ जल से धोकर व पोंछकर साफ करना चाहिए। बंदनवार लगाते समय उसके पत्तों की डंठल आगे की ओर होनी चाहिए। पत्तों की संख्या भी जगह की रचनानुसार होनी चाहिए ।
मुरझाए व अपवित्र फूल-पत्ते प्लास्टिक के फूलों जैसे ही होते हैं, जिनमें दैविक सूक्ष्म - लहरियों को अपनी ओर खींचने की क्षमता नहीं होती। इसलिए बासी, मुरझाए व प्लास्टिक के फूल-पत्तियों का प्रयोग पूजा आदि में वर्जित है। वास्तुशास्त्र व 'फेंगशुई के अनुसार भी घरों में प्लास्टिक के फूलों का लगाना वर्जित है।
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