करना चाहें राज ।
नभ में महल बना रहे,
सिद्ध न होगा काज ।।
शक्ति जब मिले प्रजा की,
न फिर कुछ होगा बाकी ।।
52.जब न रहूँ संसार में,
याद रहे यह टेक ।
प्रेम बाँटता ही रहा,
काम किए कुछ नेक।।
भले जग जीत न पाया,
न छोड़ा सच का साया ।।
53.पहले करें प्रयास हम,
साधें लघु पाषाण।
गिरि लंघन के हेतु तब,
हम कर सके प्रयाण ।।
नाप लें छोटी दूरी,
बड़ी खुद होगी पूरी।।
54.सहन शीलता है उचित,
साधें चित्त विवेक ।
बात अगर अन्याय की,
ना चलने दें एक।।
गलत को गलत बताना,
नहीं तुम चुप रह जाना ।।
55.लगता भले सशक्त वह,
पर असत्य कमजोर ।
बिना सत्य आधार के,
चले न उसका जोर ।।
झूठ बस चमक दिखाए,
नहीं वो सच बन पाये।।
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