126.जितनी प्रतिभा आप में,
उस पर दीजै ध्यान ।
केवल बोलें कोकिला,
वन भी लगै मसान ।।
सभी अनमोल यहाँ पर,
न किंचित हो मन में डर ।।
127.मन के श्रेष्ठ विचार जो,
बनें न सिर पर भार ।
नौका बन कर ले चलें,
मोह द्वन्द्व के पार ।।
विचारों की हो नौका,
न चूके अच्छा मौका।।
128.सूक्ष्म राह से ना खुलें,
जीवन की हर गाँठ ।
आदि मध्य और अन्त तक,
सदा अधूरा पाठ ।।
गाँठ मन की तुम खोलो,
मधुर शुभ वाणि बोलो।।
129.हँसना सीखो कष्ट में,
रखों हृदय समझाय ।
चढ़े बुढ़ापे का जहर,
फिर न जीव हँस पाय ।।
हँसी में खिले जवानी,
न फिर जो वापस आनी ।।
130.मन समझाने के लिये
शत शत रचें विधान ।
फर्ज गुलामी को कहें,
कितना है आसान ।।
गुलामी कभी न करिए,
फर्ज से कभी न डरिए । ।
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