रविवार, 5 जनवरी 2025

(121-125) खरी बात कहिये मगर, रखिये इसका ध्यान ।

121.खरी बात कहिये मगर, 

रखिये इसका ध्यान । 

मधुर वचन से सत्य भी 

लगे नहीं अपमान ।। 

सत्य,मृदु सुमधुर कहिए, 

झूठ से बच कर रहिये ।। 


122.जीवन की इच्छा रहे, 

इसका आदि न अन्त। 

जिजीविषा में जीव की 

सम्भावना अनन्त।। 

न मरना कोई चाहे, 

अन्त तक इसे निबाहे ।। 


123.मिल जुल कर जीवन जिऐं, 

सुख दुःख दोनों साथ । 

बाँटे से सुख दो गुना, 

दुःख हो जाता आध।। 

किन्तु गम खुद ही सहिये, 

हर किसी से मत कहिये ।।


124.दम्भ मुक्त जीवन रखो, 

दम्भ पराभव द्वार । 

सत्य हेतु आभार है, 

दम्भ हेतु धिक्कार ।। 

दम्भ पैदा करता छल, 

छीन लेता नैतिक बल।। 


125.धन के बल से यदि खुशी, 

पाना चाहें आप। 

खुशी खरीदे ना मिले, 

मिलते बस सन्ताप ।। 

खुशी धन से कब मिलती, 

पराए सुख में फलती ।। 

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