सोमवार, 28 जनवरी 2019

कैसे बनी भारत की पहली फीचर फिल्म..?😊 (भाग 5)

......(भाग-4 से आगे)

अब बात आई कहानी की..., तय यह हुआ कि सत्य प्रिय राजा हरिश्चंद्र की सत्वपरीक्षा वाली कहानी पर फिल्म बनाऐं और फिर इन्होंने (दादा साहब ने)सारी गृहस्थी बीवी बच्चे दांव पर लगा दिए थे।
 उनकी, स्वयं की, सबकी स्वत्व परीक्षा शुरू हुई । ठीक है जैसी हरि की इच्छा...!!
 साने  जी दाबके नाम के एक खासे डील डौल वाले सुंदर पुरुष को ले आये,उन्हें ₹40 पर रख लिया। त्रंबकेश्वर स्थित इन के बचपन के दोस्त तैलंग को भी यह मुंबई ले आए और इन्होंने उसे कैमरामैन बनाकर सब कुछ सिखा दिया। ट्रिक्स सीन्स फिल्माना सिखाया। उस समय 'नाट्य कला कंपनी' मुंबई में थी। उसमें स्त्री भूमिका में करने वाले पांडुरंग गदाधर साने हमारे यहां आ गए और साथ ही पांच सात लोग आ गए। इस तरह हमने 10-15 लोगों का गुट बनाया। हरिश्चंद्र पर फिल्म बनाना तय हो ही गया था। अब कौन सा काम किस को दें? गजानन वासुदेव साने को विश्वामित्र की भूमिका दी गई, दाबके को हरिश्चंद्र की भूमिका एवं पांडुरंग साने को तारामती की भूमिका और रोहिताश्व की भूमिका हमारे बेटे बाबा राय को दी गई। अब कपड़ों के सीन सीनरी आदि का प्रबंध कैसे करें? उस जमाने में चौड़े किनारों और पल्लू वाली रेशमी साड़ियां आती थीं। लाइट के हिसाब से उचित साड़ियां चुनकर उन पर नक्काशी करवाई गई और कीमती राजसी साड़ियां बनाई गई। ।तारामती,हरिश्चंद्र और रोहिताश्व के लिए बालों के विग हमने अपने पैसों से खरीद लिए और बाकी सामान यहां वहां से जुटा लिया।उस समय 'राजापुरकर नाटक मंडली' 'सरस्वती नाटक मंडली' और मेरे भाई साहब की 'बेलगांवकर स्त्री संगीत मंडली' मुंबई में नाटक खेल रही थी। इन लोगों ने बड़ी उदारता से हमारी मदद की। गहने कपड़े हम इन्हीं लोगों से ले आए ।जुटाए गए लोगों में से किसी को फोटोग्राफी सिखा कर किसी को मैनेजर बना कर  और किसी को कुछ काम सौंप कर जिस किसी तरह हमने अपना गुट बनाया फिर दो-तीन बढ़ई और दो तीन कारीगर रोजगारी पर रख लिए और उनसे मनचाहे सेट बनवा लिए। हम जहां रहते थे वहां खुली जगह थी इसलिए वही स्टूडियो बनवाया। इन्होंने 4000 फीट लंबी हरिश्चंद्र की स्टोरी तैयार की। स्टोरी राइटर यह खुद थे, निर्देशक भी यही, थे, मेकअप मैन भी यही, और लैबोरेट्री में भी यही काम किया करते थे।  कुल मिलाकर यह सिनेमा के प्राण थे। यह एकमात्र जीव थे जो हर काम जानते थे। वास्तव में यह हरफनमौला थे।...(जारी)


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