रविवार, 13 जनवरी 2019

स्वतंत्रता संग्राम के अनाम सेनापति...!! डॉक्टर श्री केशवराव बलिराम जी हेडगेवार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना किसी विशेष मजहब, जाति या दल के विरोध में नहीं हुई। भारत को स्वतंत्र करवाना और स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना संघ का एकमात्र लक्ष्य था और आज भी है। संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार ने बाल्यकाल से ही अंग्रेजी साम्राज्य का विद्रोह शुरु कर दिया था। उनके बचपन की तीन घटनाएं उनके द्वारा भविष्य में स्थापित होने वाले शक्तिशाली संगठन और उसके महान उद्देश्य का शिलान्यास थीं।
बालकेशव हेडगेवार द्वारा स्कूल में महारानी विक्टोरिया के जन्मदिन पर बंटने वाली मिठाई को यह कहकर कूड़ेदान में फैंक दिया गया- ‘‘मैंने अंग्रेजी साम्राज्य को कूड़ेदान में फेंक दिया है, विदेशी राजा के जन्मदिन पर बांटी गई मिठाई को मैं नहीं खा सकता’’।
नागपुर के सीताबर्डी किले पर लगे यूनियन जैक (अंग्रेजों का झंडा) के स्थान पर भगवा ध्वज लहराने के लिए घर के एक कमरे में ही अपने बाल सखाओं के साथ सुरंग खोदने का काम शुरु कर दिया। नागपुर के नीलसिटी हाई स्कूल में पढ़ते समय वंदे मातरम गीत पर लगे प्रतिबंध को तोड़कर सभी कक्षाओं में बच्चों द्वारा वंदे मातरम के उदघोष करवाना, उनके भीतर जन्म ले चुके अंग्रेज विरोध तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रत्येक प्रकार का बलिदान करने की दृढ़ता को दर्शाता है। वंदे मात्रम गायन पर लगे प्रतिबंध को तोड़ने की सजा मिली ‘स्कूल से निष्काष्न’। किसी तरह पुणे में जाकर विद्यालय की शिक्षा पूरी की। तत्पश्चात उस समय के राष्ट्रवादी नेताओं की योजना तथा व्यवस्थानुसार कलकत्ता के नेशनल मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया। उद्देश्य था उस समय के सबसे बड़े क्रांतिकारी संगठन ‘अनुशीलन समिति’ का सदस्य बनकर देश भर के सभी क्रांतिकारियों से संबंध स्थापित कर लेना। वे इस महान कार्य में सफल हुए और 6 वर्ष के बाद डॉक्टरी की डिग्री और सशस्त्र क्रांति का प्रशिक्षण व अनुभव लेकर नागपुर लौट आए। परन्तु डॉक्टरी का धंधा नहीं किया और न ही विवाह किया। अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।
उन दिनों अर्थात 1915 में प्रथम विश्व युद्ध के बादल मंडराने लगे थे। डॉक्टर हेडगेवार ने इस अवसर पर पूरे देश में विप्लव करके अंग्रेजों को उखाड़ फैंकने की योजना तैयार कर ली। देश भर में क्रांतिकारियों को तैयार करने, प्रत्येक स्थान पर हथियार भेजने एवं क्रांति का बिगुल बजाने की तैयारी हो गई। परन्तु उस समय के कांग्रेसी नेताओं का साथ न मिलने से यह योजना साकार नहीं हो सकी। तो भी देश की स्वतंत्रता के लिए उनका गहन चिंतन और परिश्रम जारी रहा। सभी मार्गों का अनुभव लेने, उनमें भागीदारी करने और उनके संचालन के लिए वे सदैव तत्पर रहते थे। डॉक्टर हेडगेवार कांग्रेस के अमृतसर अधिवेशन में भी गए, उन्हें मध्यप्रदेश कांग्रेस का सह सचिव का पद भी सौंपा गया। नागपुर में सम्पन्न हुए कांग्रेस के अखिल भारतीय अधिवेशन में वे मुख्य व्यवस्थापकों में भी थे। उन्होंने इस अधिवेशन में पूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव भी रखा गया था जो पारित नहीं किया गया।
अंग्रेजों के खिलाफ उग्र भाषण देकर गए थे जेल
डॉक्टर हेडगेवार ने कांग्रेस के भीतर रहकर अखंड भारत, सर्वांग स्वतंत्रता और शक्तिशाली हिन्दू संगठन की आवश्यकता का वैचारिक आधार तैयार करने का पूरा प्रयास किया था। वे कांग्रेस के मंचों पर अंग्रेजों के विरुद्ध धुआंधार भाषण देने लगे। इन भाषणों से समस्त देश ने डॉक्टर हेडगेवार का उद्देश्य जाना और उधर डॉक्टर हेडगेवार के इन तेवरों से अंग्रेजों के मन में भय भी उत्पन्न हुआ। ऐसे ही एक उग्र भाषण पर डॉक्टर हेडगेवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर मई 1921 में राजद्रोह का मुकद्दमा चलाया गया, एकतरफा फैसले में डॉक्टर जी को एक वर्ष के कठोर सश्रम कारावास की सजा दी गई। कारावास में भी पूर्ण स्वतंत्रता का चिंतन चलता रहा। जेल से लौटने के पश्चात भी वे पूज्य महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में आयोजित होने वाले सभी सत्याग्रहों एवं आंदोलनों में भाग लेते रहे।
डॉक्टर हेडगेवार ने विजयदशमी 1925 में नागपुर में संघ की स्थापना कर दी। उस समय संघ के स्वयंसेवकों को एक प्रतिज्ञा लेनी होती थी- ‘मैं अपने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए तन-मन-धनपूर्वक आजन्म और प्रमाणिकता से प्रयत्नरत रहने का संकल्प लेता हूं।’ डॉक्टर हेडगेवार ने घोषणा की- ‘हमारा उद्देश्य हिन्दू राष्ट्र की पूर्ण स्वतंत्रता है, संघ का निर्माण इसी महान लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए हुआ है।’ जब कांग्रेस ने अपने लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वाधीनता का प्रस्ताव पारित किया तो डॉक्टर हेडगेवार ने संघ की सभी शाखाओं पर 26 जनवरी 1930 को सायंकाल 6 बजे स्वतंत्रता दिवस मनाने का आदेश दिया। सभी शाखाओं के स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश पहनकर नगरों में पथ संचलन निकाले और स्वतंत्रता संग्राम में बढ़चढ़कर भाग लेने की प्रतिज्ञा दोहराई।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

समाचार का व्रत रखिए

आजकल नकारात्मक समाचार ज्यादा बिकते हैं। हमारे समाज में ज्यादातर लोग एक प्रसिद्ध इन्सान के जुर्म का मुकदमा देखना किसी वास्तव में ...