1. फ्रैंच- फ्राइस-:
सन 1830 में बेल्जियम में एक रसोईया एक सब्जी तैयार करने में जुटा हुआ था। इसके लिए उसने आलू के पतले-पतले लंबे टुकड़े काटे और उन्हें दूसरे बर्तन में रखने जा रहा था।लेकिन गलती से उसने आलू के टुकड़े गरम घी वाली कड़ाही में डाल दिए।घबराए रसोइए ने सोचा कि वह इन आलुओं को फैंक कर दूसरे आलू काट लेगा। पर उस समय रसोई में और आलू नहीं थे।
तभी उसकी घबराहट दूर हो गई क्योंकि आलू से बहुत अच्छी खुशबू आने लगी। उसने देखा कि तले हुए आलू तो अत्यंत स्वादिष्ट है। उसने उन्हें नमक मिर्च डालकर अतिथियों को परोसा।
अतिथियों को यह तले हुए कुरकुरे पतले पतले आलू बहुत स्वादिष्ट लगे इसके बाद तले हुए आलू खाने का रिवाज़ ही चल पड़ा और लोग इन्हें फ्रेंच फ्राइस के नाम से पुकारने लगे।
2. सैंडविच-:
18 वीं सदी में इंग्लैंड में जॉन मोंटेग्यू नाम का एक बडा जुआरी था जो घंटों तक जुआ खेलता रहता था।
इस प्रक्रिया में कई बार तो वह सोना खाना सब भूल जाता था।
सन 1762 के एक दिन की बात है, वह ताश के पत्तों में ऐसा डूबा कि खाने-पीने का भी होश नहीं रहा। 24 घंटे बीत गए।उसे काफी भूख लगी थी मगर उसका मन जुए से उठने का नहीं हो रहा था।
उसने अपने नौकर से कहा कि वह एक मांस का टुकड़ा और ब्रेड के दो टुकड़े ले आए। नौकर ले आया।
मोंटेग्यू ने मांस का टुकड़ा दोनों ब्रेड के बीच रखा और हाथों से दबा लिया, और फिर एक हाथ से उसे खाने लगा दूसरे हाथ से खेलता भी रहा।
दोस्तों ने उसे इस तरह खेलते-खेलते खाते हुए देखा तो उन्होंने भी ऐसा ही किया, और इस प्रकार जुआरी मोंटेग्यू सैंडविच का आविष्कारक बन गया।
आज यह डिश अत्यंत लोकप्रिय हो चुकी है।
3. पिज़्ज़ा-:
पिज़्ज़ा का नाम सुनते ही लोगों को लगता है कि यह इटली का व्यंजन होगा पर इसका आविष्कार प्राचीन काल में यूनान के निवासियों ने किया था।
वे ब्रैड बनाकर उसके ऊपर सब्जियां,मिर्च-मसाले और अन्य खाद्य सजाकर रखते थे और फिर उसे खाते थे।
सन 1889 में इसमें टमाटर डालना प्रारंभ किया गया।राफेल एस्पेसिटो ने ने इटली की महारानी मार्गेरीटा के सम्मान में विशेष पिज्जा तैयार किया।
इटली के झंडे के सफेद और हरे रंग को दर्शाने के लिए उन्होंने पिज़्ज़ा के ऊपर चीज़ तथा बेसिल डाला।
लाल रंग का टमाटर भी डाला गया और इस तरह उन्होंने एक रंगबिरंगा पिज़्ज़ा तैयार किया, जो कि शीघ्र ही लोकप्रिय हो गया।
4.पॉपकॉर्न-:
पुरातत्ववेत्ताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार पॉपकॉर्न आदिकाल से खाया जाता रहा है।
विश्व के अनेक भागों में मक्के के दाने विभिन्न रूपों में भूने जाते थे और बड़े चाव से खाए जाते थे।
जैकब बेरेसिन नामक एक व्यक्ति ने, जो कि फिलाडेल्फिया के एक मेट्रोपॉलिटन ओपेरा हाउस में काम करता था, अतिरिक्त धन कमाने के लिए मध्यांतर में पॉपकॉर्न तथा अन्य खाद्य पदार्थ बेचना प्रारंभ कर दिया।
लोगों को यह बहुत अच्छा लगा, धीरे धीरे फिलाडेल्फिया के सभी थियेटरों में इंटरवल के दौरान पॉपकॉर्न बिकने लगे और यह व्यापार तेजी से बढ़ता गया और गर्म हवा मैं पके या बाद में माइक्रोवेव ओवन में पके पॉपकॉर्न लोगों की प्रिय वस्तु बन गए।
5.गेटोरेड -:
हम अक्सर देखते हैं कि फुटबॉल खेलने के दौरान काफी पसीना आता है और खेल के आखिरी क्वार्टर में कई खिलाड़ी बुरी तरह हांफने लगते है तथा उनकी शक्ति क्षीण हो जाती है।
ऐसे में टेनिस प्लेयर , शटलर्स, फुटबॉलर आदि एक पेय पदार्थ पीते हैं। यह पेय गेटोरेड कहलाता है। इसके बारे में यह कहानी मशहूर है।
फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता ने जो कि किडनी (गुर्दे) पर शोध कर रहा था, पसीने का विश्लेषण किया। उसने पाया कि इसमें पानी के अलावा सोडियम पोटेशियम व अन्य खनिज पदार्थ भी होते हैं।
इनकी कमी को पूरा करने के लिए एक पेय बनाया गया जो खिलाड़ियों को खेल के मध्यांतर में पिलाया जाता है।
इसका नाम गेटोरेड रखा गया।
आज इसे खिलाड़ियों और एथेलिट्स के शरीर में पानी की उचित आपूर्ति करने के लिए पूरे विश्व में पिया जाता है।...(जारी)
सन 1830 में बेल्जियम में एक रसोईया एक सब्जी तैयार करने में जुटा हुआ था। इसके लिए उसने आलू के पतले-पतले लंबे टुकड़े काटे और उन्हें दूसरे बर्तन में रखने जा रहा था।लेकिन गलती से उसने आलू के टुकड़े गरम घी वाली कड़ाही में डाल दिए।घबराए रसोइए ने सोचा कि वह इन आलुओं को फैंक कर दूसरे आलू काट लेगा। पर उस समय रसोई में और आलू नहीं थे।
तभी उसकी घबराहट दूर हो गई क्योंकि आलू से बहुत अच्छी खुशबू आने लगी। उसने देखा कि तले हुए आलू तो अत्यंत स्वादिष्ट है। उसने उन्हें नमक मिर्च डालकर अतिथियों को परोसा।
अतिथियों को यह तले हुए कुरकुरे पतले पतले आलू बहुत स्वादिष्ट लगे इसके बाद तले हुए आलू खाने का रिवाज़ ही चल पड़ा और लोग इन्हें फ्रेंच फ्राइस के नाम से पुकारने लगे।
2. सैंडविच-:
18 वीं सदी में इंग्लैंड में जॉन मोंटेग्यू नाम का एक बडा जुआरी था जो घंटों तक जुआ खेलता रहता था।
इस प्रक्रिया में कई बार तो वह सोना खाना सब भूल जाता था।
सन 1762 के एक दिन की बात है, वह ताश के पत्तों में ऐसा डूबा कि खाने-पीने का भी होश नहीं रहा। 24 घंटे बीत गए।उसे काफी भूख लगी थी मगर उसका मन जुए से उठने का नहीं हो रहा था।
उसने अपने नौकर से कहा कि वह एक मांस का टुकड़ा और ब्रेड के दो टुकड़े ले आए। नौकर ले आया।
मोंटेग्यू ने मांस का टुकड़ा दोनों ब्रेड के बीच रखा और हाथों से दबा लिया, और फिर एक हाथ से उसे खाने लगा दूसरे हाथ से खेलता भी रहा।
दोस्तों ने उसे इस तरह खेलते-खेलते खाते हुए देखा तो उन्होंने भी ऐसा ही किया, और इस प्रकार जुआरी मोंटेग्यू सैंडविच का आविष्कारक बन गया।
आज यह डिश अत्यंत लोकप्रिय हो चुकी है।
3. पिज़्ज़ा-:
पिज़्ज़ा का नाम सुनते ही लोगों को लगता है कि यह इटली का व्यंजन होगा पर इसका आविष्कार प्राचीन काल में यूनान के निवासियों ने किया था।
वे ब्रैड बनाकर उसके ऊपर सब्जियां,मिर्च-मसाले और अन्य खाद्य सजाकर रखते थे और फिर उसे खाते थे।
सन 1889 में इसमें टमाटर डालना प्रारंभ किया गया।राफेल एस्पेसिटो ने ने इटली की महारानी मार्गेरीटा के सम्मान में विशेष पिज्जा तैयार किया।
इटली के झंडे के सफेद और हरे रंग को दर्शाने के लिए उन्होंने पिज़्ज़ा के ऊपर चीज़ तथा बेसिल डाला।
लाल रंग का टमाटर भी डाला गया और इस तरह उन्होंने एक रंगबिरंगा पिज़्ज़ा तैयार किया, जो कि शीघ्र ही लोकप्रिय हो गया।
4.पॉपकॉर्न-:
पुरातत्ववेत्ताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार पॉपकॉर्न आदिकाल से खाया जाता रहा है।
विश्व के अनेक भागों में मक्के के दाने विभिन्न रूपों में भूने जाते थे और बड़े चाव से खाए जाते थे।
जैकब बेरेसिन नामक एक व्यक्ति ने, जो कि फिलाडेल्फिया के एक मेट्रोपॉलिटन ओपेरा हाउस में काम करता था, अतिरिक्त धन कमाने के लिए मध्यांतर में पॉपकॉर्न तथा अन्य खाद्य पदार्थ बेचना प्रारंभ कर दिया।
लोगों को यह बहुत अच्छा लगा, धीरे धीरे फिलाडेल्फिया के सभी थियेटरों में इंटरवल के दौरान पॉपकॉर्न बिकने लगे और यह व्यापार तेजी से बढ़ता गया और गर्म हवा मैं पके या बाद में माइक्रोवेव ओवन में पके पॉपकॉर्न लोगों की प्रिय वस्तु बन गए।
5.गेटोरेड -:
हम अक्सर देखते हैं कि फुटबॉल खेलने के दौरान काफी पसीना आता है और खेल के आखिरी क्वार्टर में कई खिलाड़ी बुरी तरह हांफने लगते है तथा उनकी शक्ति क्षीण हो जाती है।
ऐसे में टेनिस प्लेयर , शटलर्स, फुटबॉलर आदि एक पेय पदार्थ पीते हैं। यह पेय गेटोरेड कहलाता है। इसके बारे में यह कहानी मशहूर है।
फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता ने जो कि किडनी (गुर्दे) पर शोध कर रहा था, पसीने का विश्लेषण किया। उसने पाया कि इसमें पानी के अलावा सोडियम पोटेशियम व अन्य खनिज पदार्थ भी होते हैं।
इनकी कमी को पूरा करने के लिए एक पेय बनाया गया जो खिलाड़ियों को खेल के मध्यांतर में पिलाया जाता है।
इसका नाम गेटोरेड रखा गया।
आज इसे खिलाड़ियों और एथेलिट्स के शरीर में पानी की उचित आपूर्ति करने के लिए पूरे विश्व में पिया जाता है।...(जारी)


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