अंक 2-
दो शक्ति : देवता ( सकारात्मक) और दानव ( नकारात्मक) ।
दो पक्ष : कृष्ण और शुक्ल।
दो अयन : उत्तरायण और दक्षिणायन।
दो गति : उर्ध्व और अधो।
अंक 3-
तीन प्रमुख देव (त्रिदेव) : ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव)।
तीन प्रमुख देवी (त्रिदेवी) : सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती (दुर्गा)।
तीन प्रमुख भगवान : राम, कृष्ण और बुद्ध।
त्रैलोक्य ( तीन प्रमुख लोक) : भू, भुव और स्वर्ग।
तीन प्रमुख कल्प : ब्रह्म, वराह और पद्य।
तीन गुण : सत्व, रज और तम।
तीन कर्म संग्रह : कर्ता, करण और क्रिया।
तीन कर्म प्रेरणा : ज्ञाता, ज्ञान और ज्ञेय।
अंक 4-
चार वेदज्ञ ऋषि : अग्नि, वायु, अंगिरा और आदित्य। जिन्होंने सर्वप्रथम वेद सुने। बाद में इनकी वाणी को बहुत से ऋषियों ने रचा और विस्तार दिया। मूलत: इन्हीं चार को हिन्दू धर्म का संस्थापक माना जा सकता है।
चार वेद : ऋग, यजु, साम और अथर्व।
चार आश्रम : ब्रह्मचर्य, ग्रहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास।
चार धाम : जगन्नाथ (पूर्व-अथर्व), द्वारिका (पश्चिम-साम), बद्रीनाथ (उत्तर-यजु) और रामेश्वरम (दक्षिण-ऋग)।
चार पीठ : ज्योर्तिपीठ, गोवर्धनपीठ, शारदापीठ और श्रृंगेरीपीठ।
चार मास : सौरमास, चंद्रमास, नक्षत्रमास और सावनमान (अधिमास या मलमास)
चार प्रकृति : सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती और सावित्री।
चार पद : ब्रह्मपद, रुद्रपद, विष्णुपद और परमपद (सिद्धपद)
चार नीतिज्ञ : मनु, अंगिरा, विदुर, चाणक्य।
चार सम्प्रदाय : वैष्णव, शैव, शाक्त और स्मृति-संत।
चार पुरुषार्थ : धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।
चार शत्रु : काम, क्रोध, मोह और लोभ।
चार प्रलय : नित्य, नैमित्तिक, द्विपारार्ध और प्राकृत।
चार जीव : अण्डज, स्वेदज, जरायुज और उद्विज
चार नीति : साम, दाम, दंड और भेद।
चार अन्न : भक्ष्य (चबाकर), भोज्य (निगलकर), लेह्म (चाटकर) और चोष्य (चुसकर)।
चार युग : सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग।
अंक 5-
पंच देव : ब्रह्मा, विष्णु, महेष, गणेश और सूर्य।
पांच प्रतीक : ॐ, स्वस्तिक, दीपक, माला, कमल।
पांच अमृत (पंचामृत) : दूध, दही, घी, शहद और शक्कर।
पांच कुमार : सनक, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार और स्वायंभुव।
पांच कर्मेंद्रियां : वाक्, पणि, पाद, पायु और उपास्थ।
पांच ज्ञानेंद्रियां : चक्षु, रसना, घ्राण, त्वक् और श्रोत।
पांच चित्तावस्था : क्षिप्त, मूढ़, विक्षिप्त, एकाग्र, निरुद्ध।
पंच क्लेश : अविद्या, अस्मिता, राग, द्वैष, अभिनिवेश।
वर्ष के पांच भेद : संवत्सर, परिवत्सर, इद्वत्सर, अनुवत्सर, युगवत्सर।
कामदेव के पांच बाण : मारण, स्तम्भन, जृम्भन, शोषण, उम्मादन (मन्मन्थ)
पंच महाभूत : पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। मन, बुद्धि और अहंकार को भी महाभूत कहा गया है।
पांच काल : प्रात:काल, संगवकाल, मध्यान्हकाल, अपरान्हकाल, सायंकाल। एक काल में तीन मूहर्त होते हैं।
[31/05, 4:53 pm] My Sister 2: चार वेद- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद
चार वर्ण- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र
चार आश्रम- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास
चार धाम - रामेश्वरम • बद्रीनाथ • द्वारका • जगन्नाथ पुरी
चार कुंभ स्थल - उज्जैन, नासिक, हरिद्वार, प्रयाग
चार फल- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष
उपाय चतुष्ठय - साम, दाम, दण्ड, भेद
चार सूफी सम्प्रदाय- चिश्तिया सम्प्रदाय, कादिरिया सम्प्रदाय, सुहरवर्दिया सम्प्रदाय, नक्शबन्दिया सम्प्रदाय
चार खलीफा- अबूबक्र, उमर, उस्मान, अली
[31/05, 4:53 pm] My Sister 2: पंच तत्त्व- क्षिति, जल, पावक, गगन, समीर
पंच देव- शिव, गणेश, विष्णु, सूर्य, दुर्गा
पंच ज्ञानेन्द्रियाँ- कान, आँख, जिह्वा, नाक, त्वचा
पंच कर्मेन्द्रियाँ- मुख, पैर, हाथ, लिंग, गुदा
पंचामृत- दूध, दही, घी, शक्कर, मधु
पंच कन्या- अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा, मंदोदरी
पंच पवन- प्राण वायु, अपान वायु, उदान वायु, व्यान वायु, समान वायु
पंच तिक्त- गुलोय, कटकारि, सोँठ, कुट, चिरायता
पंच वाण- द्रवण, शोषण, तापन, मोचन, उन्माद
पंच पुष्पवाण- कमल, अशोक, आम्र, नवमल्लिका, नीलोत्पल
पंच नद- झेलम, रावी, चिनाब, सतलज, व्यास
पंच रत्न- सोना, हीरा, नीलम, लाल, मोती
पंच पीर- जाहर, नरसिंह, भज्जू ग्वारपहरिया, घोड़ा बालाभंजी, रुहर दलेले
पंच "ग"कार(वैष्णवों के)- गंगा, गीता, गाय, गोविंद. गायत्री
पंच "म"कार(सिद्धों के)- मत्स्य, मांस, मद्य, मुद्रा, मैथुन
[31/05, 4:54 pm] My Sister 2: छह ऋतुएँ- ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, शिशर ऋतु, हेमंत ऋतु, वसंत ऋतु
छह रिपु- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर
छह रस- कड़वा, तीखा, खट्टा, मीठा, कसैला, खारी
छह अकाल- अतिवृष्टि, अनावृष्टि, चूहों की अधिकता, दूसरे राजा की चढ़ाई, टिड्डी दल का आना, पक्षियों की अधिकता
छह शास्त्र- मीमांसा, न्याय, वैशेषिक, योग, सांख्य, वेदांत
छह हास्य- स्मित, हसित, विहसित, अवहसित, अपहसित, अतिहसित
[31/05, 4:54 pm] My Sister 2: सात रंग (सूर्य प्रकाश में)- नीलोत्पल, नीलाभ, आसमानी, नीला, हरा
सात चिरजीवी- अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम
सप्तलोक- भू, भूवः, स्वः, मह, जनः, तपः, सत्यम्
सप्तऋषि(महाभारत के अनुसार)- मरीचि, अंगिरा, अत्रि, अगस्त्य, भृगु, वशिष्ठ, मनु
सप्तऋषि(शतपथ ब्राह्मण के अनुसार)- गौतम, भरद्वाज, विश्वामित्र, जमदग्नि, वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि
सप्त द्वीप - (विष्णु पुराण अनुसार)जम्बूद्वीप, प्लक्षद्वीप, शाल्मलद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप
सप्तसिन्धु- सिन्धु, परुष्णी(रावी), शतद्रु(सतलज), वितस्ता(झेलम), सरस्वती, गंगा, यमुना
सप्तपुरी - अयोध्या, मथुरा, मायानगरी, काशी, काँचीपुरम, उज्जयिनी, द्वारका
सप्त सागर - (विष्णु पुराण अनुसार) खारे पानी का सागर, इक्षुरस का सागर, मदिरा का सागर, घृत का सागर, दधि का सागर, दुग्ध का सागर, मीठे जल का सागर
[31/05, 4:54 pm] My Sister 2: सात रंग (सूर्य प्रकाश में)- नीलोत्पल, नीलाभ, आसमानी, नीला, हरा
सात चिरजीवी- अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम
सप्तलोक- भू, भूवः, स्वः, मह, जनः, तपः, सत्यम्
सप्तऋषि(महाभारत के अनुसार)- मरीचि, अंगिरा, अत्रि, अगस्त्य, भृगु, वशिष्ठ, मनु
सप्तऋषि(शतपथ ब्राह्मण के अनुसार)- गौतम, भरद्वाज, विश्वामित्र, जमदग्नि, वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि
सप्त द्वीप - (विष्णु पुराण अनुसार)जम्बूद्वीप, प्लक्षद्वीप, शाल्मलद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप
सप्तसिन्धु- सिन्धु, परुष्णी(रावी), शतद्रु(सतलज), वितस्ता(झेलम), सरस्वती, गंगा, यमुना
सप्तपुरी - अयोध्या, मथुरा, मायानगरी, काशी, काँचीपुरम, उज्जयिनी, द्वारका
सप्त सागर - (विष्णु पुराण अनुसार) खारे पानी का सागर, इक्षुरस का सागर, मदिरा का सागर, घृत का सागर, दधि का सागर, दुग्ध का सागर, मीठे जल का सागर
[31/05, 4:55 pm] My Sister 2: अष्टकुल (नागों के)- वासुक, तक्षक, कुलक, कर्कोटक, पद्म, शंखचूड़, महापद्म, धनंजय
अष्टगन्ध- चन्दन, अगर, देवदारु, केसर, कपूर, शैलज, जटामासी, गोरोचन
अष्ट सिद्धि- अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशत्व, वशित्व
आठ सिद्धियाँ (पुराणों की)- अंजन, गुटका, पादुका, धातु-भेद, वेताल, वज्र, रसायन, योगिनी
आठ सिद्धियाँ (सांख्य की)- तार, सुतार, तारतार, रम्यक, आदि भौतिक, आदि दैविक, आध्यात्मिक, आदि दैहिक
अष्ट धातु- सोना, चाँदी, ताँबा, पीतल, लोहा, काँसा, राँगा
अष्टांग योग- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान, धारणा, समाधि
अष्टांग आयुर्वेद - शल्य, शालाक्य, कायचिकित्सा, भूतविद्या, कौमारभृत्य, अगदतंत्र, रसायनतंत्र और वाजीकरण।
आठ विवाह- देव विवाह, ब्रह्म विवाह, आर्ष विवाह, आसुर विवाह, पैशाच विवाह, गान्धर्व विवाह, स्वयंवर
अष्ट सखियाँ (राधा की)- ललिता, विशाखा, चित्रा, चम्पकलता, इन्दुलेखा, तुंगविद्या, रंगदेवी, वसुदेवी
[31/05, 4:55 pm] My Sister 2: नवग्रह- सूर्य ग्रह, चन्द्र ग्रह, मंगल ग्रह, बुध ग्रह, गुरु ग्रह, शुक्र ग्रह, शनि ग्रह, राहु ग्रह, केतु ग्रह
नवरस- शृंगार रस, हास्य रस, करुण रस, रौद्र रस, वीर रस, भयानक रस, वीभत्स रस, अद्भुत रस, शान्त रस
नवद्वार(शरीर के)- दो आँखें, दो कान, दो नाक छिद्र, एक मुख, गुदा, जननेन्द्रिय
नवरत्न- मोती, पन्ना, माणिक, गोमेद, हीरा, मूँगा, लहसुनियाँ, पद्मराग, नीलम
नवरत्न (विक्रमादित्य के दरबार के)- क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, वेताल भट्ट, घटखर्पर, कालिदास, वराह मिहिर, धन्वंतरि, वररुचि
नवनिधि- पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुन्द, कुन्द, नील, वर्च
नवखण्ड- भारत, किंपुरुष, भद्र, हरि, हिरण्य, केतुमाल, इलावृत, कुश, रम्य
नवधा भक्ति- श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पदसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सेव्य, आत्म-निवेदन
दस संपादित करें
दस अवतार- मच्छ, कच्छप, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि
दस धर्म लक्षण- धैर्य, क्षमा, दया, अस्तेय, शौच, इन्द्रिय निग्रह, अहिंसा, सत्य, अक्रोध, विद्या
दस दिशाएँ- पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य, ऊर्ध्व, अधो
[31/05, 4:56 pm] My Sister 2: एकादश रुद्र- प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान, नाम, कूकल, कूर्म, देवदत्त, धनंजय, आत्मा
बारह संपादित करें
द्वादश राशियाँ- मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन
बारह महीने- चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भादों, क्वार, कार्तिक, अगहन, पौष, माघ, फाल्गुन
द्वादश वन- मधुवन, तालवन, वृंदावन, कामवन, कोटवन, चन्दनवन, लोहवन, महावन, खदिरवन, बेलवन, भाण्डारीवन
द्वाद्वश भानुकला- तपिनी, तापिनी, पूसा, मरिची, ज्वालिनी, रुचि, रुचिनिम्ना, मोगदा, विश्व-बोधिनी, धारिणी, क्षमा, शोषिणी
द्वादश ज्योतिर्लिंग - सोमनाथ · द्वारका · महाकालेश्वर · श्रीशैल · भीमाशंकर · ॐकारेश्वर · केदारनाथ · विश्वनाथ · त्र्यंबकेश्वर · रामेश्वरम · घृष्णेश्वर · बैद्यनाथ
[31/05, 4:56 pm] My Sister 2: चौदह विद्याएँ- शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष, ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, धर्मशास्त्र, पुराण, मीमांसा, तर्कशास्त्र
चौदह लोक- तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह
चौदह रत्न (समुद्र मंथन से प्राप्त)- श्री, रम्भा, विष, वारुणी, अमृत, शंख, हाथी, धेनु, धन्वन्तरि, चन्द्रमा, कल्पद्रुम, कौस्तुभमणि, धनु, बाजि
पन्द्रह संपादित करें
पन्द्रह तिथियाँ- प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दसमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा
सोलह संपादित करें
सोलह शृंगार- शौच, उबटन, स्नान, केशबंधन, अंजन, अंगराग, महावर, दंतरंजन, ताम्बूल, वस्त्र, भूषण, सुगन्ध, पुष्पहार, कुंकुम, भाल तिलक, ठोड़ी की बिन्दी
सोलह संस्कार- गर्भाधान संस्कार, पुंसवन संस्कार, सीमान्त संस्कार, जातकर्म संस्कार, नामकरण संस्कार, निष्क्रमण संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, चूड़ाकर्म संस्कार, कर्णवेध संस्कार, उपनयन संस्कार, वेदारम्भ संस्कार, समावर्तन संस्कार, विवाह संस्कार, वानप्रस्थ संस्कार, संन्यास संस्कार, अन्त्येष्टि संस्कार
सोलह पूजा विधि- आवाहन, स्थापन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, सिंहासन, स्नान, चन्दन, धूप, फूल, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, प्रदक्षिणा, नमस्कार, आरती
[31/05, 4:56 pm] My Sister 2: अठारह पुराण- ब्रह्म पुराण, विष्णु पुराण, शिव पुराण, पद्म पुराण, भागवत पुराण, नारद पुराण, अग्नि पुराण, मार्कण्डेय पुराण, भविष्य पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, लिंग पुराण, स्कंद पुराण, वामन पुराण, कूर्म पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण
चौबीस संपादित करें
चौबीस अवतार- सनकादि, वाराह अवतार, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, यज्ञपुरुष, ऋषभ, पृथु, मतस्य, कूर्म, धन्वन्तरि, मोहिनी, नृसिंह, वामन, परशुराम, व्यास, हंस, राम, कृष्ण, हयग्रीव, हरि, बुद्ध, कल्कि
सत्ताईस संपादित करें
सत्ताईस नक्षत्र- अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्ति, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़, उत्तराषाढ़, श्रावण, घनिष्ठा, शतभिषी, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद, रेवती, मूल
[31/05, 4:57 pm] My Sister 2: इक्यावन शक्तिपीठ संपादित करें
हिंगलाज भवानी · शर्कररे · सुगंध · अमरनाथ · ज्वाला जी · त्रिपुर मालिनी · अम्बाजी · गुजयेश्वरी · दाक्षायनी · विमला · गंडकी चंडी · बाहुला · मंगल चंद्रिका · त्रिपुरसुंदरी · छत्राल भवानी · भ्रामरी · कामाख्या · जुगाड़्या · कालीघाट · ललिता · जयंती · विमला , किरीट · विशालाक्षी · श्रावणी · सावित्री · गायत्री · महालक्ष्मी, श्रीशैल · देवगर्भ, बीरभूमि · अमरकंटक · नर्मदा · शिवानी · उमा · नारायणी · वाराही · अपर्णा · श्री सुंदरी · कपालिनी · चंद्रभागा · अवंति · भ्रामरी, नासिक · विश्वेश्वरी · अम्बिका · कुमारी · उमा, मिथिला · कालिका · जयदुर्गा · महिषमर्दिनी · यशोरेश्वरी · फुल्लरा · नंदिनी · इंद्राक्षी
छप्पन संपादित करें
देखें - छप्पन भोग
छप्पन भोग - रसगुल्ला, चन्द्रकला, रबड़ी, मूली, दधि, भात, दाल, चटनी, कढ़ी, साग-कढ़ी, मठरी, बड़ा, कोणिका, पूरी, खजरा, अवलेह, वाटी, सिखरिणी, मुरब्बा, मधुर, कषाय, तिक्त, कटु पदार्थ, अम्ल {खट्टा पदार्थ}, शक्करपारा, घेवर, चीला, मालपुआ, जलेबी, मेसूब, पापड़, सीरा, मोहनथाल, लौंगपूरी, खुरमा, गेहूं दलिया, पारिखा, सौंफ़लघा, लड़्ड़ू, दुधीरुप, खीर, घी, मक्खन, मलाई, शाक, शहद, मोहनभोग, अचार, सूबत, मंड़का, फल, लस्सी, मठ्ठा, पान, सुपारी, इलायची
[31/05, 4:57 pm] My Sister 2: चौसठ कलाएँ- गीत, वाद्य, नृत्य, नाट्य, विशेष कच्छेद(तिल के साँचे बनाना), तन्दुल कुसुमावली विचार (चावलों एवं फूलों का चॉक पूरना), पुष्पास्तरण(पुष्पों की सेज रचना), दशन वसनांग (दाँतों, वस्त्रों और अंगों को रंगना), मणि भूमिका कर्म(ऋतु के अनुसार घर को सजाना), शयन रचना, उदक वाद्य (जल तरंग बजाना), उदक घात(पिचकारी गुलाबपाश से काम लेने की विद्या), चित्र योग (विचित्र औषधियों का प्रयोग), माल्य ग्रन्थन विकल्प, केश शेखर की पीड़ योजना (केश प्रसाधन वेणी बंधन द्वारा), नेपथ्य प्रयोग (देशकाल के अनुरूप वस्त्राभूषण पहनना), कर्णपत्र भंग (कानों के लिए आभूषण बनाना), गंध युक्ति (सुगंध बनाना), भूषण योजन,इन्द्रजाल, कौचुमार योग (उबटन आदि लगाना), हस्त लाघव (हाथ की सफाई), चित्र शाक यूष भक्ष्य-विकार क्रिया (अनेक प्रकार के भोजन की विविध सामग्री बनाना), पानक रस रागासव योजन (अनेक प्रकार के पेय बनाना), सूची कर्म (सीना, पिरोना, जाली बुनना आदि), सूत्र कर्म (कसीदा), प्रहेलिका (पहेली बुझाना), प्रीतिमाला (अन्त्याक्षरी), दुर्वाचक योग (कठिन शब्दों या पदों का अर्थ करना), पुस्तक वाचन, नाटक आख्यायिक दर्शन, काव्य समस्या पूर्ति, पट्टिका वेगवान विकल्प (चारपाई आदि बुनना), तक्षकर्म, तक्षण (बढ़ई), वास्तु विद्या, रूप्य रतन परीक्षा, धातुवाद, मणि राग ज्ञान, आकर ज्ञान (खानों की विद्या का ज्ञान), वृक्षायुर्वेद योग, मेष-कुक्कुट-लावक युद्ध, शुक-सारिका प्रलापन, उत्सादन (उबटन लगाना, सिर, हाथ, पैर आदि दबाना), केश मार्जन कौशल, अक्षर मुष्टिका कथन, म्लेक्षित कला विशेष (विदेशी भाषा का ज्ञान), देश भाषा ज्ञान, पुष्प सकटिका निमित्त ज्ञान (दैव लक्षण देखकर भविष्यवाणी करना), यन्त्र मातृका (यन्त्र निर्माण), धारण मातृका (स्मरण शक्ति बढ़ाना), सापठ्य (दूसरे को पढ़ते सुनकर उसी तरह पढ़ लेना), मानसी काव्य क्रिया (दूसरे के मन के भाव जानकर कविता बनाना), क्रिया विकल्प (क्रिया के प्रभाव को पलटना), वस्त्र गापन (वस्त्रों की रक्षा), अभिधान कोष (छन्दों को ज्ञान), छलितक योग (ऐय्यारी करना), द्यूत विशेष, आकर्ष क्रीड़ा (पासा फेंकना), बाल क्रीड़ा कर्म, वैनायिकी विद्या-ज्ञान (शिष्टाचार), [[वैतालिकी विद्या-ज्ञान व्यायामिक विद्या ज्ञान
[31/05, 5:00 pm] My Sister 2: एक = ईश्वर, चन्द्र , सूर्य , पृथ्वी , गणेश का दाँत , शुक्राचार्य का नेत्र।
● दो = दो(उभय) पक्ष - कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष।
● दो मार्ग = प्रवृत्ति मार्ग , निवृत्तिमार्ग।
● दो अयन = दक्षिणायन , उत्तरायण ।
● दो उपासना = निर्गुण , सगुण ।
● दो विद्या = परा विद्या , अपरा विद्या ।
● तीन लोक = मृत्युलोक , आकाश , पाताल ।
● तीन देव = ब्रह्मा , विष्णु , महेश ।
● तीन गुण = सत्त्वगुण , रजोगुण , तमोगुण ।
● तीन ऋण = पितृऋण , ऋषिऋण , देवऋण ।
● तीन काल = भूत , वर्तमान , भविष्यत् ।
● तीन आग = जठरानल , वड़वानल , दावानल ।
●तीन दोष = वात , पित्त , कफ़ ।
● तीन ताप = दैहिक , दैविक , भौतिक।
● तीन अवस्थाएँ = बाल्यावस्था , युवावस्था , वृद्धावस्था ।
● तीन कर्म = संचित , प्रालब्ध , क्रियमाण ।
● तीन दिव्य पदार्थ = ब्रह्म , जीव , प्रकृति ।
● तीन वायु = शीतल , मन्द , सुगंध।
● तीन जीव = थलचर , जलचर , नमचर।
● तीन वेदकांड = कर्मकाण्ड , ज्ञानकाण्ड , उपासनाकांड।
● तीन राम = परशुराम , राम , बलराम।
● चार वेद = ऋग्वेद , यजुर्वेद , सामवेद , अथर्ववेद ।
● चार उपवेद ' = आयुर्वेद , गान्धर्ववेद , स्थापर्य ,अर्थवेद।
● चार ब्राह्मण ग्रन्थ = ऐतरेय , कौशीतकी , तैत्तिरीय , शतपथ ।
● चार आश्रम = ब्रहमचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , संन्यास ।
● चार वर्ण = ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य , शूद्र ।
● चार अवस्थाएँ = जाग्रत , स्वप्न , सषप्ति , तुरीयावस्था ।
● चार देवता = मातृ , पितृ , आचार्य , अतिथि।
● चार अंग = साम , दाम , दंड , भेद।
● चार युग = सतयुग , त्रेता , द्वापर , कलियुग।
● चार फल = धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष ।
● चार दिशाएँ = पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण।
● चतुः सृष्टि = जरायुज , अण्डज , स्वेदज , उभिज्ज।
● चार धाम = रामेश्वर , द्वारका , बद्रीनाथ , जगन्नाथ ।
● चतुरंगिणी सेना = गजसेना , अश्वसेना . रथी , पदाति।
● पंचगव्य = दूध , दही , घी , गोबर , गोमूत्र।
● पंच तत्व = पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश।
● पांच ज्ञानेन्द्रियां = आँख , कान , नाक , जिह्वा , त्वचा।
● पाँच कमेन्द्रियों = मुख , हस्त , पाद , गुदा , लिंग ।
● प्रचामृत = दुग्ध , दधि , घृत , मधु , शर्करा।
● पंच कन्या = अहल्या , द्रौपदी , तारा , कुन्ती , मन्दोदरी ।
● पंच रत्न = स्वर्ण , मुक्ता , हीरक , लाल , नीलम ।
● पंच यम = अहिंसा , सत्य , अस्तेय , ब्रह्मचर्य , इन्द्रियनिग्रह।
● पाँच नियम = शौच , संतोष , तप , स्वाध्याय , ईश्वर , प्रणिधान।
● पाँच यज्ञ = ब्रह्मयज्ञ , देवयज्ञ , भूतयज्ञ , पितृयज्ञ , अतिथियज्ञ ।
● पाँच कोष = अन्नमय , मनोमय , प्राणमय , आनंदमय , विज्ञानमय।
● पांच बाण = मोहित , मस्त , तपन , शुष्क , शिघित ।
● पंचवटी = पीपल , बेल , बड़ , हरड़ , अशोक ।
● पाँच लक्षण = काकचेष्टा , बकध्यान , श्वाननिद्रा , अल्पाहार , गृहत्याग ।
● पाँच शत्रु = काम , क्रोध , लोभ , मोह , अहंकार ।
● पंच माता = अम्बा , आचार्य - पत्नी , सास , राजपत्नी , मातृभूमि।
● पंच प्राण = प्राण , अपान , समान , व्यान , उदान ।
● षट् वेदान्त = शिक्षा , कल्प , व्याकरण , निरुक्त , छन्द , ज्योतिष
● षड्दर्शन = न्याय , वैशेषिक , योग , सांख्य , मीमांसा , वेदान्त ।
● षड रस = मधुर , अम्ल , लवण , कटु , तिक्त , कषाय ।
● षड ऋतु = हेमन्त , शिशिर , बसन्त , ग्रीष्म , वर्षा , शरद।
● षट् जीव गुण = ईर्ष्या , द्वेष , प्रयत्न , सुख , दुःख , ज्ञान ।
● षट् घोर दःख = गर्भ - दुःख , जन्म - दुःख , रोग - दुःख , जरा - दुःख , बुभुक्षा , मरण - दुःख।
● सप्तवासर = सोम , मंगल , बुध , बृहस्पति , शुक्र , शनि , रवि ।
● सप्तस्वर = षड्ज , ऋषभ , गांधार , मध्यम , पंचम , धैवत , निषाद सप्तद्वीप : जम्बू , प्लक्ष , कुश , शाल्मली , कौंच , शाक , पुष्कर।
● सप्तसागर = क्षीर , दधि , घृत , इक्षु , मधु , मदिरा , लवण ।
● सप्तर्षि = गौतम , भारद्वाज , विश्वामित्र , जमदग्नि , वशिष्ठ , कश्यप , अत्रि ।
● अष्टसिद्धि = अणिमा , महिमा , लघिमा , गरिमा , प्राप्ति , प्राकाम्य , ईशित्व , वशित्व ।
● आठ लक्षण = साहस , अनृत , चपलता , माया , भय , अविवेक , अशौच . निर्दयता ।
● अष्टांग योग = यम , नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान , समाधि ।
● अष्टधातु = स्वर्ण , रजत , ताम्र , सीसक ( सीसा ) , कांस्य , रांगा।
● अष्टछाप कवि = सूरदास , कृष्णदास , नन्ददास , परमानन्ददास , कुंभनदास , चतुर्भुजस्वार्म छीतस्वामी , गोविन्ददास ।
● अष्टविवाह = ब्राह्म , देव , आर्ष , प्रजापत्य , आसुर , पैशाच , गान्धर्व , स्वयंवर ।
● आठ वसु = आदित्य , चन्द्र , नक्षत्र , पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश ।
● नवधाभक्ति = श्रवण , कीर्तन , स्मरण , पाद - सेवन , अर्चन , वन्दन , सख्य , दास्य , आ निवेदन ।
● नवरत्न = हीरक , माणिक्य , पुखराज , पन्ना , मोती , गोमेद , मूंगा , लहसुनिया , नीलम ।
● नवग्रह = सूर्य , चन्द्र , मंगल , बुध , बृहस्पति , शुक्र , शनि , राहु , केतु।
● नवरस = शृंगार , करुण , हाम्य , रौद्र , वीर , भयानक , बीभत्स , अद्भुत , शान्त ।
● नवनिधि = पद्म , महापद्म , शंख , मकर , कच्छप , मुकुन्द , कुंद , नील , खर्व ।
● दस लक्षण ( धर्म ) = धैर्य , क्षमा , दम , अम्तेय . शौच , इन्द्रियनिग्रह , बुद्धि , विद्या , सत्य , अक्रोध ।
● दस दिग्पाल = गरुडध्वज , गोविन्द , अग्नि , पवन , ईश , राक्षस , यक्ष , सुरपति , धनद , वारण ।
● दस दिशाएँ = पूर्व , पश्चिम , उत्तर . दक्षिण , ईशान , नैऋत्य , वायव्य , आग्नेय , उपरि ,अधः ।
● दस अवतार = मत्स्य , कूर्म , वराह , नरसिंह , वामन , परशुराम , राम , कृष्ण , बुद्ध , कल्कि ।
● ग्यारह रुद्र = प्राण , अपान , समान , व्यान , उदान , नाग , कूर्म , कृकल , देवदत्त , धनंजय , आत्मा ।
● बारह राशियों = मेष , वृष , मिथुन , कर्क , सिंह , कन्या , तुला , वृश्चिक , धनु , मकर , कुम्भ , मीन।
● बारह आदित्य = दिव , बृहद्भान , रवि , चक्षु , ऋचीक , भानु , विभावसु , अर्क , आज्ञा . वह सविता , आत्मा , सद्यः ।
● बारह भूषण = नूपुर , किंकिणी , हार , नथ , चूड़ी , मुद्रिका , शीशफूल , बिंदी , कंकन , कंठश्री . बाजूबन्द , टीका ।
● तेरह उपनिषद् = ईश , केन , कठ , प्रश्न , मुण्डक , माण्डूक्य , ऐतरेय , तैत्तिरीय , छान्दोग्य , बृहदारण्यक , कौशीतकी , मैत्रायणी , श्वेताश्वतर ।
● चौदह लोक = तल , अतल , वितल , सुतल , तलातल , रसातल , पाताल , भूलोक , भवर्लोक, स्वर्लोक , महर्लोक , जनलोक , तपलोक , सत्यलोक ।
● चौदह विद्या = ब्रह्म ज्ञान , रसायन , श्रुति , वैदिक , ज्योतिष , व्याकरण , धनुर्विद्या , जल तरंग , संगीत , नाटक , घुड़सवारी , कोकशास्त्र , चौर्य , चातुर्य ।
● चौदह रल = श्री . रम्भा , विष , वारुणी , अमृत , शंख , ऐरावत , धनुष , धन्वन्तरि , कामधेनु , कल्पवृक्ष , चन्द्रमा , उच्चैःश्रवा , कौस्तुभमणि ।
● पन्द्रह तिथियाँ = प्रतिपदा , द्वितीया , तृतीया , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी , दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , अमावस्या या पूर्णिमा ।
● सोलह संस्कार = गर्भाधान , पुंसवन , सीमन्तोन्नयन , जातकर्म , नामकरण , निष्क्रमण , अन्नप्राशन , अन्त्येष्टि ,चूडाकर्म , कर्णवेध , उपनयन , वेदारम्भ , विवाह . समावर्तन , वानप्रस्थ , संन्यास।
● सोलह शृंगार = अंगशीच , मज्जन ( स्नान ) , दिव्यवस्त्र , महावर . केश , माँग , ठोड़ी , मस्तक , मेंहदी , उबटन , भूषण , सुगन्ध , मुखराग , दन्तराग , अधरराग , काजल ।
● सोलह उपचार = आवाहन , स्थापन , पाद्य , सिंहासन , अर्घ्य , आचमन , स्नान , चन्दन पुष्प , दीपक , धूप , नैवेद्य , ताम्बूल , प्रदक्षिणा . नमस्कार , आरती ।
● अट्ठारह पुराण = ब्रह्म , पद्म , विष्ण , शिव . भागवत . नारदीय . मार्कण्डेय , आग्न , ' ब्रह्मवैवर्त , लिंग , वराह , स्कन्द , वामन , कर्म , मत्स्य , गरुड़ , ब्रह्माण्ड ।
● चौबीस अवतार = सनत्कुमार , वाराह , नारद , नरनारायण , कपिल , दत्तात्रेय ,यज्ञपुरूष,ऋषभ, पृथु , मत्स्य , कूर्म , धन्वन्तरि , मोहिनी . नसिंह , वामन , परशुराम , व्यास,हंस, कृष्ण , हयग्रीव , हरि , बुद्ध , कल्कि ।
● सत्ताईस नक्षत्र = अश्विनी , भरणी , कृत्तिका , रोहिणी . मगशिर , आर्द्रा , पुनर्वसु , पुष्य , मघा , पूर्वाफाल्गुनी , उत्तराफाल्गनी , हस्त , चित्रा , स्वाति , विशाखा , ज्येष्ठा , मूल , पूर्वाषाढ , उत्तराषाढ , श्रवण , घनिष्ठा ,शतविषा, पूर्वाभाद्रपद ,उत्तराभाद्रपद, रेवती।
● अक्षौहिणी सेना = ऐसी सेना जिसमें - 109 , 350 पदाति , 65 , 610 अश्वारोही , 31 , 870 रथी और 11 , 870 गजारोही हो ।
● चौरासी लाख योनियाँ =
4 लाख मनुष्य योनियाँ
9 लाख जलचर योनियाँ और नभचर।
11 लाख कृमियोनियाँ ।
23 लाख पशुयोनियाँ + 37 लाख स्थावर योनियाँ।
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