आज गंगादशहरा के पावन पर्व पर मां गंगा के पावन चरणों में प्रणाम तथा आप सभी को मंगल कामना..💐💐
आगामी दस दिनों तक माँ गंगा के इस दशहरा पर्व को याद करते हुए माँ गंगा की शब्दांजली सेवा का संकल्प लिया है।
आज प्रथम दिन माँ के चरणों पहले पांच छंद समर्पित हैं।काव्य कला से कोसों दूर, किन्तु भाव भक्ति से भरपूर इन शब्द पुष्पों को आपका स्नेह व मां गंगा का आशीर्वाद मिले, यही अपेक्षा है💐💐☺️😊💐💐
हर-हर गंगे...हर-हर महादेव.....!!
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गंगासेवा के दस दिन-:
पहला दिन- रविवार 20 मई 2021
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
1.स्वारथ के बिन कर रहीं,
गंगा ज़न कल्याण।
युगों युगों से फूंकती,
भारत-भू में प्राण।।
भारत भू में प्राण,
देवताओं की नदिया।
इसकेबिन अवरुद्ध
जीवनी-रथ का पहिया।।
गंगा सागर तक हो
गंगा का अविरल पथ।
गंगा के हित जुटें,
त्याग अपने सब स्वारथ।।
2.स्वारथ के हित कर रहे,
मां पर अत्याचार।
गंगा शोधन के लिए,
होते मात्र 'विचार'।।
होते मात्र विचार,
कागज़ी दौड़ें घोड़े।
कहने भर को काम
हो रहे थोड़े थोड़े।।
शुद्धिकरण यंत्रों ने
गंगा डाली हैं मथ।
नेता अभियंता जनता,
सबके हैं स्वारथ।।
3.कोई भी हो जाति या,
कैसा भी इंसान।
गंगा ने हर जीव का,
रखा सदा सम्मान।।
रखा सदा सम्मान,
कि जड़ चेतन को तारा।
गंगा जल ही बना,
मनुज का अंत-सहारा।।
गंगा को दूषित कर
अपनी गरिमा खोई।
बस अंतिम संकल्प,
प्रदूषित करें न कोई।।
4.नदी हमारी शक्ति है,
जीवन का संचार।
जीवन की रेखा बनी,
है नदियों की धार।।
है नदियों की धार,
भूमि की प्यास बुझाए।
हर संकट में,
यह जीवन रक्षक बन जाये।।
करो प्रदूषण मुक्त, बनाने की तैयारी।
रहे सदा शुचि सुंदर, गंगा नदी हमारी।।
5.गंगा तट पर कीजिये,
ध्यान तथा स्नान।
कचरे से हो मुक्त यह,
इसका भी हो ध्यान।
इसका भी हो ध्यान,
नहीं अपद्रव्य बहाएं।
गंगा परम् पवित्र,
स्वच्छता इसमें लायें।।
कहें संत रैदास,
अगर अपना मन चंगा।
कहीं न भटको,
मिले कठौती में ही गंगा।।
....जारी💐💐
गंगा- सेवा के दस दिन
दूसरा दिन- सोमवार 21मई 2021
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6.नदिया के तट पर यहां
तीरथ मन्दिर धाम।
कहीं यज्ञ तप दान हैं,
कहीं भक्ति निष्काम।।
कहीं भक्ति निष्काम,
कहीं शिव का आराधन।
कहीं ध्यान में मग्न
हो रहा है हरि चिंतन।।
कहीं गाय के संग
दान दी जाती बछिया।
परम् शांति का लाभ
करती गंगा नदिया।।
7.पावनता और स्वच्छता
रहती हर दम साथ।
गंगाजल हो स्वच्छ और,
श्रद्धानत हो माथ।
श्रद्धानत हो माथ,
शुद्धि हित आगे आयें।
नष्ट न हो अस्तित्व,
प्राण दे इसे बचाएं।।
गंगा की ,दुनिया भर में
है किससे समता?
रहे सदा अक्षुण्ण,
जाह्नवी की पावनता।।
8.भारत कण-कण मानता
गंगा का उपकार।
युगों-युगों से कर रहीं,
मानव का उद्धार।।
मानव का उद्धार,
धरा को अमृत पिलातीं।
पाप ताप कटु क्लेश,
बहा कर सब ले जातीं।।
देव नदी हैं गंग,
सभी का है यह अभिमत।
युगों-युगों माँ गंगा का,
आभारी भारत।।
9.माता सा धीरज रखे,
सहन करे चुपचाप।
गंगा माँ पर ज्यादती,
करते हम और आप।
करते हम और आप,
प्रदूषित भी तबियत से।
जबकि राष्ट्र का सत्व
बचा इसके ही सत से।।
डुबकी अपने जीवन में,
जो एक लगाता।
महादेव की शरण,
दिलातीं गंगा माता।।
10.मानव को गंगा मिलीं,
ईश्वर का वरदान।
इस अनुपम वरदान का,
हमने रखा न ध्यान।।
हमने रखा न ध्यान,
किया भरपूर प्रदूषण।
जबकि मातु गंगा हैं,
शिव-मस्तक का भूषण।।
गंगा दूषित करे ,
मनुज काया में दानव।
माँ की करे सम्हाल,
वही सच्चा सुत,मानव।।
....अशेष💐💐
गंगा- सेवा के दस दिन
तीसरा दिन- मंगलवार 22मई 2021
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11.माँ गंगा को दीजिये
माँ जैसा सम्मान।
घाट-धार सब स्वच्छ हों,
इसका रखिये ध्यान।।
इसका रखिये ध्यान,
बहे यह धारा अविरल।
उसे नष्ट क्यों करें?
भक्त जन पर जो वत्सल।।
शिव मंदिर पर ज्यों सजता है
ध्वज पचरंगा।
जल स्रोतों की कीर्ति पताका
हैं माँ गंगा।।
12.सबका पहला धर्म है,
गंगा का सम्मान।
वह अनपढ़ ग्रामीण हो,
या शहरी विद्वान।।
या शहरी विद्वान,
ध्यान रखना है हर-पल।
अमृतमय ही बना रहे,
पावन गंगाजल।।
गंगा तट पर पलता,
भारत का हर तबका।
गंगा रक्षा से
विकास पथ जुड़ता सबका।।
13. गंगा केवल जल नहीं,
ये अमृत रस धार।
सृष्टि चेतना के लिए,
यह जीवन आधार।
यह जीवन आधार,
कोटि प्राणी हैं पलते।
वृक्ष मनुज जल-जीव,
यहाँ बसते और फलते।।
पावन जल में कचरा बहे,
काम बेढंगा।
सब कुछ सह कर चुप से,
बहती जाती गंगा।।
14.गोमुख से आती यहाँ
निर्मल अमृत धार।
गिरिखण्डों से निकल कर,
उतरे ये हरिद्वार।
उतरे ये हरिद्वार,
बसे बहु शहर किनारे।
शहर-दर-शहर
दिखते हैं नारकी नज़ारे।।
पावन गंगा के दर्शन में,
है अद्भुत सुख।
गंगा, सागर तलक
शुद्ध हो,जैसे गोमुख।।
15.चमकें गंगा घाट और
निर्मल हो जल-धार।
यह माँ गंगा पर नहीं,
खुद पर है उपकार।
खुद पर है उपकार,
करें गंगा का रक्षण।
गंगा पर बलिदान रहे
जीवन का हर क्षण।।
रवि किरणों से,
गंगा तट बिजली से दमकें।
जल में जीवों के,
हम सब के चेहरे चमकें।।
(...अशेष)💐💐
गंगा- सेवा के दस दिन
चौथादिन- बुधवार 23मई 2021
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
16. गंगा मानव मात्र का करती है कल्याण।गंगाजल मुख में पड़े,जबहो महाप्रयाण।।
जब हो महाप्रयाण, मनुज पीते गंगाजल।
पाप मुक्ति के साथ शांत हो मन की हलचल।।
गंगा का शुभ-रूप बनाया है बे-ढंगा।
फिर भी जननी सम पालन करती मां गंगा।।
17.अपने मन में पीर ले,गंगा करे पुकार।
क्यों मेरे सुत कर रहे? मुझ पर अत्याचार।।
मुझ पर अत्याचार, किया मेरा तन मैला।
घर का कूड़ा कचरा,डालें भर-भर थैला।।
करने हमें सजीव 'स्वच्छ-गंगा' के सपने।
त्यागें, इस संकल्प-सिद्धि हित स्वारथ अपने।।
18.सागर में जाकर मिले पावन गंगा धार।
सारे पथ में,जीव की पाप मुक्ति उद्धार।।
पाप मुक्ति उद्धार,सहज में ही हो जाता।
गंगा जल में नहा,जीव जीवन फल पाता।।
हर हिंदू घर में हो,गंगाजल की गागर।
मां गंगा का हृदय दया करुणा का सागर।।
19.गंगा तट के तीर्थ हैं,पावन शुभ स्थान।
संदूषित करके इन्हें,क्यों करते अपमान??
क्यों करते अपमान,कहें गंगा को माता।
मां जैसा ही युगों-युगों से इससे नाता।।
जनजागृति से ही, कट पाएगा यह संकट।
स्वर्ग-सुखद अहसास, कराएं जब गंगा तट।।
20. कितना भी कचरा गिरे,नहीं अपावन गंग।
गंगा की गरिमा वही,मात्र बदलता रंग।।
मात्र बदलता रंग, विष्णुपद से यह निकली।
जटा-जाल से शिव के, यह धरती पर फिसलीं।। गंगा से संदेश हमें मिलता बस इतना।
एक बार गिरने पर...! गिरना पड़ता कितना!!
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गंगा- सेवा के दस दिन
पांचवां दिन- गुरुवार 24मई 2021
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21. गंगाजल की स्वच्छता हम सब का कर्तव्य। दिव्य स्वयं ही है,इसे चलो बनाएं भव्य।।
चलो बनाएं भव्य शांतिदायिनि जलधारा।
नारायण ने इसे धरा पर स्वयं उतारा।।
इस धारा में बह जाते जीवन के छल बल।
एक बूंद भी मुख में जो पहुंचे गंगाजल।।
22.धारा धरती पर गिरी,मिला ईश-वरदान।
नित्य नदी तट हो रहे,ज्ञान ध्यान स्नान।।
ज्ञान ध्यान स्नान,तपस्या होती हर पल।
ब्रह्म सुधा है, मानव को पावन गंगा जल।।
किन्तु प्रदूषण बना रहा दुर्गंध पिटारा।
फिर भी संजीवनी, सदा गंगा की धारा।।
23.पावन गंगा धार को, दें उसका सम्मान।
गंगा भारत के लिए, देवों का वरदान।।
देवों का वरदान त्रितापों को हर लेती।
धर्म अर्थ अरु काम मोक्ष,चारों फल देती।।
देव नदी के तट पर बीते सारा जीवन।
जन्म भाग्यशाली,और अंतिम पल भी पावन।।
24.शंकर जी के शीश पर जटा जूट घनघोर।
इन्हीं जटाओं में थमा, गंगा मां का शोर।।
गंगा मां का शोर, जटाओं में जा अटकीं।
जीव जगत उद्धार हेतु फिर वन-वन भटकीं।।
स्वार्थ मुक्त जो जिए,उसे जग में किसका डर?
इस सद्गुण से शीश मध्य रखते शिव शंकर।।
25.गंगा में मत डालिए,दूषित खाद्य पदार्थ।
स्वार्थ त्याग कर कीजिए,गंगा हित परमार्थ।।
गंगा हित परमार्थ,इसे फिर स्वच्छ बनाएं।
आड़ धर्म की लेकर,कचरा नहीं बढ़ाएं।।
गंगा का, लें नाम,करें नेता हंगामे।
केवल बढ़ता शोर, जहर घुलता गंगा में।।
(......अशेष)💐💐
गंगा- सेवा के दस दिन
छठा दिन- शुक्रवार 25मई 2021
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26. संगम में आकर मिले जब यमुना की धार। दिव्य त्रिवेणी से सजे वसुधा का श्रृंगार।।
वसुधा का श्रृंगार तीर्थ यह सबसे न्यारा।
हिंदू जनमानस को यह प्राणों से प्यारा।।
घाट-घाट पर होती शिव भोले हर बम-बम।
दर्शन से ही मुक्ति दिलाता पावन संगम।।
27.शंकर की प्रिय गंग है हिय में भरे उमंग। मोक्षदायिनी त्रिपथगा पावन तरल तरंग।।
पावन तरल तरंग,मुक्ति यह देने वाली।
मैदानों को बांट रही, स्वर्णिम हरियाली।।
श्रीहरि का स्पर्श मिले, लहरों को छूकर।
सिर पर रखकर शीतलता पाते शिव शंकर।।
28.गंगाजल के पात्र को, रखिए सालों साल।
सदा ताजगी ही मिले, कभी न हो बदहाल।।
कभी न हो बदहाल, न बदबू और न कीड़ा।
किंतु आज हमने ही दी गंगा को पीड़ा।।
गंगा दूषित तो, बिगड़े आने वाला कल।
पीढ़ी दर पीढ़ी जीवनदाता गंगाजल।।
29.होती गंगा क्रुद्ध तो गिरते पेड़ पहाड़।
गांव खेत खलिहान को पल में करें उजाड़।।
पल में करें उजाड़ उफनती नदिया नाले।
यह बिगड़े तो,लाखों का जीवन ले डाले।।
जब प्रसन्न हों, पाप-ताप कलि-कल्मष धोती।
हैं प्रलयंकर रूप क्रुद्ध जब गंगा होती।।
30.घाट-घाट पर गूंजती गंगा की जय कार।
शंकर की काशी तथा हरि का प्रिय हरि-द्वार।
हरि का प्रिय हरि-द्वार,परम पावन गंगा जल।
एक आचमन,तन-मन को कर देता निर्मल।। भाग्यवान हैं, जो बनते गंगा में जलचर।
हरि-दर्शन का भाव,यहां हर घाट-घाट पर।।
(....अशेष)💐💐
गंगा- सेवा के दस दिन
सातवां दिन- शनिवार 26मई 2021
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31.सगर सुतों की मुक्ति को,
लिया भूमि अवतार।
वर्षों से दूषित पड़े,
किया सहज उद्धार।।
किया सहज उद्धार,
चरण से निकली धारा।
रज-कण पावन किए
और जन-जन को तारा।।
गंगा हैं हरि-चरण प्राप्ति की,
पहली चौकी।
अमर हुई गाथा गंगा से,
सगर सुतों की।।
32.पावन गंगा धार में
यदि किंचित विश्वास।
'पानी' कह कर ना करें,
गंगा का उपहास।।
गंगा का उपहास,
इसे बस नदी न मानो।
यह 'अमृत-घट' मिला,
शक्ति इसकी पहचानो।।
गंगा-दर्शन मात्र,
सफल कर देता जीवन।
एक बिंदु भी,
कोटि-कोटि को कर दें पावन।।
33. अगर न बदले मनुज ने,
अपने क्रियाकलाप।
कर देगा उसको खतम,
मां गंगा का शाप।।
मां गंगा का शाप,
कष्ट लाता जीवन में।
जिसने कचरा भर डाला है,
मां के तन में।।।
भर डाला जो ज़हर,
कहीं हम पर ना उगले।
मानव होगा नष्ट,
अगर रंग-ढंग न बदले।।
34.जीवनदाता जल यहां,
जीवन का पर्याय।
जल से जीवन पा रहा,
है मानव समुदाय।
है मानव समुदाय,
गंग-जल का आभारी।
गंगा से पोषित है,
मानव जाति हमारी।।
गंगा से मानव का,
जन्म जन्म का नाता।
जीव-जंतु कृषि वन-उपवन को
जीवन दाता।।
35. दूषित मल-जल बह रहा,
रोती गंगा धार।
उद्योगों का हो गया
घाट-घाट विस्तार।।
घाट-घाट विस्तार,
स्वच्छ जल जहर बनाया।
पृथ्वी के अमृत का,
लाभ नहीं ले पाया।।
अभी स्वयं से मनुज,
कर रहा कितने छल-बल।
अमृत रस में घोल दिया है
दूषित मल-जल।।
गंगा- सेवा के दस दिन
आठवां दिन- रविवार 27मई 2021
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
36.हरि चरणों से यह गिरीं,
ब्रह्म कमंडल मध्य।
ब्रह्म कमंडल से हुईं,
हिमगिरि से संबद्ध।
हिमगिरी से संबद्ध,
उतर भू-तल पर आई।
पाप मुक्त जन किए,
सज्जनों को सुखदाई।।
लहरें चमक रहीं,
सज्जित हो रवि किरणों से।
मृत्यु बाद,मिलवा देतीं,
यह हरि चरणों से।।
37.तर्पण पितरों का करें,
रख मन में विश्वास।
गंगाजल से ही मिले,
हरि चरणों में वास।।
हरि चरणों में वास,
दिलाती गंगा माता।
मुक्ति मिले, प्रभु भक्ति,
भाव युत मन हो जाता।।
अपना तन-मन जीवन,
मां गंगा के अर्पण।
पितृ तृप्त होते,
पा कर गंगा का तर्पण।।
38.गोमुख से निकली यहां,
पावन गंगाधार,
गंगा ने हमको दिया,
युगों-युगों से प्यार।
युगों-युगों से प्यार,
अन्न-जल देती हमको।
तन को शोधित करें,
और सुख देतीं मन को।।
काया को मिल जाते,
जीवन के सारे सुख।
ब्रह्म कमंडल का जल,
हमको देता गोमुख।।
39.आश्रम उपवन वाटिका,
साधु संग उद्यान।
नाले गिरते धार में,
घाट बने श्मशान।।
घाट बने शमशान,
धार में कचरा बहता।
मां गंगा का तन
ना जाने क्या-क्या सहता।।
गंगा देतीं,
मरते मानव को नव जीवन।
गंगा-तट से स्वर्ग बनें,
मंदिर गृह आश्रम।।
40.शिव शंकर की जटा में,
भरा अमृत का कोष।
मुक्ति मार्ग सोपान है,
नित्य सिद्ध निर्दोष।।
नित्य सिद्ध निर्दोष,
धार गंगा की बहती।
भारत की जनता से,
मानो फिर-फिर कहती।।
मैंने तुमको अपनाया है,
आगे बढ़कर।
मुझे प्रदूषित किया?
क्रुद्ध होंगे शिव शंकर।।
(....अशेष)💐💐
गंगा- सेवा के दस दिन
नौंवां दिन- सोमवार 28मई 2021
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
41.हरियाली सब कट रही,मरुथल बने कगार।
गंगा तट पर बढ़ रहे,बस्ती और बाजार।।
बस्ती और बाजार धार अब हटती जाती।
गंगा तट पर नई बस्तियां कटती जाती।।
जिसे समझते आज जिंदगी की खुशहाली।
निगल रहा है वह विकास सारी हरियाली।।
42.कीड़े पड़ते हैं नहीं, और न हो दुर्गंध।
ऐसा जल दूषित किया मनुज हो गया अंध।।
मनु जो हो गया अंध,न देखे आगा पीछा।
उसमें घोला जहर कि जिसने जीवन सींचा।।
गंगा शुद्धीकरण हेतु अब ले लें बीड़े।
वरना इक दिन मानव बन जाएंगे कीड़े।।
43. डुबकी मुश्किल हो गई जल में है दुर्गंध।
पर कागज पर हो रहे, बड़े-बड़े अनुबंध।।
बड़े-बड़े अनुबंध,रोज बैठक सम्मेलन।
एयर कंडीशन में बैठ, कर रहे चिंतन।।
दूषित गंगा से मुश्किल बढ़ जाएं सबकी।
जल हो अगर प्रदूषित कैसे लोगे डुबकी??
44.गंगाधर शिव शंभु के मस्तक पर आसीन।
पावन गंगा नीर की छवि है सदा नवीन।।
छवि है सदा नवीन,भव्यता इसकी अनुपम।
तीर्थ बन गए यमुना एवं सागर संगम।।
गंगा शुद्धीकरण बन गया कितना दुष्कर।
स्वच्छ बनेगी,कृपा करें यदि शिव गंगाधर।।
45.वेद ऋचाऐं गूंजतीं तट पर साधन ध्यान।
गंगा तट पर बैठते पंडित कवि विद्वान।।
पंडित कवि विद्वान रची तुलसी ने मानस।
योग शक्ति अध्यात्म भक्ति और जीवन का रस।।गंगा के हित सभी श्रेष्ठ विधियां अपनाएं।
गंगा तट पर फिर से गूंजें वेद ऋचाएं।।
(......अशेष)💐💐
गंगा- सेवा के दस दिन💐💐
दसवां अंतिम दिन- मंगलवार 29मई 2021
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💐 पावन गंगा-दशहरा को माँ गंगा एवं श्री भोलेनाथ को नमन करके उन्हें यह भाव-पुष्प समर्पण का संकल्प लिया जो आज पूर्ण होता है।
हम सभी भारतवासी मातृ स्वरूपा सभी पावन नदियों के शुद्धिकरण हेतु आत्म संकल्पित हों यही प्रेरक उद्देश्य लेकर यह लघु श्रृंखला आरम्भ की थी। आशा है अपने उद्देश्य में आंशिक सफलता प्राप्त की होगी।💐💐 हर-हर गंगे💐💐
46.पाप मिटातीं जगत से जल का दिव्य प्रभाव। जल पी लो विश्वास से बदले हृदय स्वभाव।।
बदले हृदय स्वभाव सगर पुत्रों को तारा।
कुटिल कलुष युत कलयुग में यह एक सहारा।।
रक्षा करो कि यह है मानवता की थाती।
युग युग से यह मानव मन के पाप मिटाती।।
47.गर्दन तक जल में खड़े करें साधना संत।
सभी गंग से मांगते शिव हरिभक्ति अनंत।।
शिव हरिभक्ति अनंत मिले इस दिव्य धार से।
सदा सिद्ध शुभ कर्म हृदय के शुभ विचार से।।
गंगा होगी स्वच्छ जीव-जन का संवर्धन।
हमें होश तब आता जब फंसती है गर्दन।।
48.हिम मंडितपर्वत शिखर गंगा करें निवास।
गंगा करती है कृपा जो शंकर के दास।।
जो शंकर के दास गंग की दशा सुधारें।
जीवनदायिनि मां गंगा पर तन-मन वारें।।
निर्मल गंगा धार देश में बहे अखंडित।
गंगा को करते समृद्ध पर्वत हिम मंडित।।
49.धारा में नौका चलें मछली करें किलोल।
शंख नगाड़े बज रहे घाट-घाट हरि बोल।
घाट घाट हरि बोल कहीं वेदों की बानी।
श्री हरि ने भेजी अपनी ये दिव्य निशानी।।
दूर करें मन से,कुबुद्धि का यह अंधियारा।।
शुचि सुंदर शुभ सत्य सदा गंगा की धारा।
50.आधि-व्याधि से मुक्त हो,मनचाहे आनंद।
गंगा के स्पर्श से कट जाते दुख द्वंद।।
कट जाते दुख द्वंद स्वर्ग का सुख मिल जाता।
शिव की कृपा भक्ति शिव की,शिव शक्ति विधाता।गंगा का जल मुक्त करे मन को उपाधि से।
काया रहती मुक्त अनेकों आधि-व्याधि से।।
💐💐💐समापन💐💐💐
51.काया स्वर्णिम चमकती रविकिरणों का जाल। संगम पर यमुना मिले धारा बने विशाल।।
धारा बने विशाल, संचरण करे धरा पर।
जहां सिंधु से मिलीं, बनाया गंगासागर।।
सदा शुद्ध निर्मल रहती हैं,प्रभु की माया।
मन को करें पवित्र शुद्ध कर देतीं काया।।
52.स्वर्गारोहण के लिए परम दिव्य सोपान।
पृथ्वी का श्रृंगार या जीवनमुक्त विधान।
जीवनमुक्ति विधान जुडीं यह जनजीवन से।
गंगा सेवा करो हृदयसे तन मन धन से।।
गंगा से मिलता है मानवता को पोषण।
एक आचमन करवा देता स्वर्गारोहण।।
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💐जय माँ गंगा-जय भोलेनाथ💐
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