फिर भी ज्यादातर दिन ऐसा होता है कि हमारा दिमाग एक ही समय पर अनेक जगहों पर विचरण कर रहा होता है। अपने काम पर जाते वक्त उस रास्ते का मज़ा लेने के बजाए हम यह सोच रहे होते हैं कि हमारा अधिकारी हमसे दफ्तर में पहुंचने के बाद क्या बोलने वाला है, या हम दोपहर में क्या खाने वाले हैं या हमारे बच्चे स्कूल में क्या करने वाले हैं। जैसा बोला जाता है कि हमारा मन इधर-उधर भागते हुए छोटे पिल्ले की तरह है या उन छूटे हुए बन्दरों की तरह है जो एक जगह से दूसरी जगह बिना जरा भी आराम किए दौड़ते रहते हैं।
वर्तमान के क्षण की जागरुकता का विकास और मानसिक एकाग्रता की प्रचुरता आपके जीवन में शान्ति लाएगी बल्कि आपको अपने मन की योग्यताओं को सम्पूर्ण रुप से उजागर करने में भी मदद करेगी। जब बहुत सारी बातें हमारे ध्यान में विघ्न डालती हैं तो हमारे मन की शक्ति विभाजित हो जाती है जिसको वास्तव में एक लेज़र की केन्द्रित ऊर्जा की तरह होना चाहिए। अच्छी बात यह है कि आप अपना ध्यान वर्तमान पर केन्द्रित करना सीख सकते हैं और इस कला का विकास काफी जल्दी किया जा सकता है।
अपने अस्थिर दिमाग का इलाज करने के लिए एक पद्धति है जिसे 'केन्द्रित पढ़ना' कहा जा सकता है। हर बार जब आपका ध्यान अपने पढ़ने वाले पन्ने से भटकता है तो आप दाहिनी तरफ के हाशिए में एक निशान लगाइए। यह साधारण प्रक्रिया आपको अपनी एकाग्रता में असमर्थता देगी और जैसा कि यह जागरुकता परिवर्तन की ओर पहला कदम है यह आपको स्पष्ट और शान्त दिमाग की निपुणता बढ़ाने में मदद करती है।
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