"मैं कर सकता हूँ" यह दृढ़ निश्चयात्मक भाव मनुष्य के आत्मविश्वास को पुष्ट करता है, शक्तियों को जगाता है, उसे अपनी सिद्धि और सफलता पर विश्वास हो जाता है। इस सृजनात्मक विचार का शक्तिवर्द्धक प्रभाव हमारे शरीर के संगठन पर पड़ता है। इन निश्चित दृढ़ और आशा भरे विचारों से हमारा मुखमंडल दमकता हुआ मालूम पड़ता है और हमारे संपूर्ण कार्य सजीव मालूम पड़ते हैं। मन में आशा और विश्वास, शक्ति और साहस पैदा होते हैं। मन में गुप्त ताकत आती है। रुधिर- प्रवाह भी ठीक होकर समस्त शरीर को पुष्ट करता है, जिससे मन प्रसन्न तथा शरीर हृष्ट-पुष्ट रहता है । अड़चनें और विरोध स्वतः दूर होते जाते हैं । ऐसे व्यक्ति कभी निरुत्साहित नहीं होते । भय आदि दूषित विकारों का उन पर कोई प्रभाव नहीं होता ।
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