मंगलवार, 11 जून 2024
प्रभात किरण (26)संसार में ऐसी कोई दुर्लभ वस्तु नहीं जिस पर तुम्हारा जन्मसिद्ध अधिकार न हो...
संसार में ऐसी कोई दुर्लभ वस्तु नहीं जिस पर तुम्हारा जन्मसिद्ध अधिकार न हो। तुम अपनी संकल्प की शक्तियों को आदेश दो कि मैं एक ईश्वरीय तत्त्व से, जिसका संबंध मन से है, तादात्म्य रखता हूँ । अतएव उससे उत्पन्न होने वाली प्रत्येक उत्तम वस्तु का मैं पूरा हकदार हूँ, वारिस हूँ । इच्छाशक्ति के लंबे-चौड़े हाथों से मैं उसे अवश्य प्राप्त कर सकता हूँ । जो अपनी बेकदरी करते हैं वे पापी हैं, क्योंकि वे परमेश्वर स्वरूप परमात्मा की निंदा करते हैं। कारण !मनुष्य ईश्वर की प्रतिमूर्ति है। ईश्वर में किसी प्रकार की संकीर्णता नहीं है, सीमा बंधन नहीं है, प्रत्युत समृद्धि की विपुल संपदा भरी पड़ी है।
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