गुरुवार, 13 जून 2024

प्रभात किरण (27)

जो अपनी बेकदरी करते हैं वे पापी हैं, क्योंकि वे परमेश्वरस्वरूप परमात्मा की निंदा करते हैं । कारण! मनुष्य ईश्वर की प्रतिमूर्ति है। ईश्वर में किसी प्रकार की संकीर्णता नहीं है, सीमा बंधन नहीं है, प्रत्युत समृद्धि की विपुल संपदा भरी पड़ी है।ईश्वर का आदेश है कि पूर्ण बनो, जैसा कि मैं हूँ । अतः कभी अपने आप को नीच, दीन, दुखी, दरिद्री, रोगग्रस्त आदि न समझो। प्रत्युत उत्साहपूर्वक गर्व से छाती फुला कर कहो कि प्रत्येक उत्तम वस्तु पर मेरा अधिकार है । कोई मुझसे वह अधिकार हरण नहीं कर सकता । इस प्रकार सुंदर और शिवत्व से परिपूर्ण सुमनोहर वस्तुओं पर केंद्रित करना, विरोध से हटाकर ऐक्य में संलग्न करना, मृत्यु के विचार हटाकर दिव्य जीवन के रहस्य में केंद्रित करना एक बहुत उत्कृष्ट कला है।



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