गुरुवार, 13 जून 2024

और मनोरथ जो कोई लावें,सोई अमित जीवन फल पावें।।

और मनोरथ जो कोई लावै। 

राम भक्त तुमको मन भावै।।

मन में मानव के रहतीं अनगिन इच्छाऐं।

कैसे धनसन्तान शक्ति पलमें मिल जाऐं। 

योगरूप हनुमान,भक्ति के ही हैं दाता। किन्तुचाहिए सुख तो जन वह भी पा जाता।। 

कहता है संसार जिसे सुख तुम वह देते। किन्तु राम की भक्ति हेतु उसका मन लेते।। 

दरशनकी लालसा मिटे वह राह बतावै। और मनोरथ पूरे हो जो मन में लावै।। 

मन का पात्र रिक्त कर इनके सम्मुख लाओ। 

भक्तिज्ञान वैराग्य प्रेमसे भर ले जाओ।। 

अगर चाह सेवा की है वह भी हो पूरी। मनमें सच्चीभक्ति नहीं फिर चाह अधूरी ।। 

मुक्ति महत् फलहै जीवन का, आप दिलाते। 

मूढ़,सम्पदासुख में प्रेमा भक्ति गंवाते।। 

पाप पुण्य का बोझलदा हम सबके मन में।

सीमा से आगे फिर शक्ति नहीं तन मन में ।।

भटके मन को खींच आप प्रभु तक पहुँचावैं । 

सफल मनोरथ सभी तुम्हारे तक जो आवै।।

सोई अमित जीवन फल पावै।। 

तुम्हारे द्वार शीश जो नावै।। 

चिन्तन ही मानव मन की इच्छा बन जाते।

फिर अपनेअनुसार पाप या पुण्य कराते ।। 

धर्म अर्थ कामना मोक्ष यह चारों पाए। हनुमत आराधन चारोंका सुख दिलवाए।। 

भक्त आपका रामलला के मन को भावै। तेरी सेवा चार पदारथ सहज दिलावै।। 

वीर अंजनानन्दन राम सिया के प्यारे । कितने ही पतितों के तुमने भाग्य सँवारे।। 

धर्म प्रथमफल हैजो सारे सुख का दाता। 

अर्थ तत्व दूजा जो सारे काम बनाता ।। काम हृदयमें छिपा अन्तमें राम मिलावै। लौकिक काम अलौकिक साधन ही बन जावै।। 

मोक्ष अन्त है तुम अनन्त की राह दिखाते। 

भक्तजनों को राम कृपा पहचान बताते।। 

चारों फल उपलब्ध कृपा जो होवे तेरी । कृपा करो साधना सफल हो जाऐ मेरी ।।

हनुमतसम्मुख बैठे रामके जो गुणगावै।

सोई मनुज जीवन के सब उत्तम फल पावें।।..... (क्रमश:)


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