सोमवार, 17 जून 2024
प्रभात किरण (29)
संसार में ऐसी कोई दुर्लभ वस्तु नहीं जिस पर तुम्हारा जन्मसिद्ध अधिकार न हो। तुम अपनी संकल्प की शक्तियों को आदेश दो कि मैं एक ईश्वरीय तत्त्व से, जिसका संबंध मन से है, तादात्म्य रखता हूँ । अतएव उससे उत्पन्न होने वाली प्रत्येक उत्तम वस्तु का मैं पूरा हकदार हूँ, वारिस हूँ । इच्छा शक्ति के लंबे-चौड़े हाथों से मैं उसे अवश्य प्राप्त कर सकता हूँ । जीवन के प्रधान व्यक्तियों में कदाचित प्रमुख नियम यही है कि मनुष्य मन, विचार, आकांक्षा का सदुपयोग सीखे। यह अनुभव करे कि वह परम शक्ति संपन्न एक सुदृढ़ चैतन्य आत्मा का पिंड है । संसार की समस्त उत्कृष्टतम वस्तुओं पर उसका पूर्ण अधिकार है। धन-संपत्ति, पदाधिकार, धर्म, मोक्ष इत्यादि कुछ भी क्या न हो, उससे विमुख नहीं हैं। वे उसी के लिए सृजित हैं । अतएव उसे एक दिन अवश्यमेव प्राप्त होंगे।
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