गुरुवार, 27 जून 2024
प्रभात किरण (33)जहाँ विचार दृढ़ और संशयरहित हैं, वहाँ शक्ति प्रबल और तीव्र होती है
जहाँ विचार दृढ़ और संशयरहित हैं, वहाँ शक्ति प्रबल और तीव्र होती है । विचारों में स्थिरता और टिकाऊपन दृढ़ता और श्रद्धा से आता है। जरा विचार कीजिए, आप कौन हैं ? क्या आप केवल शरीर हैं ? क्या आप हाड़, मांस, रक्त, चमड़ा आदि दुर्गंधयुक्त घृणोत्पादक पदार्थों से बने हुए पुतले हैं ? नहीं ! आप हाड़, मांस, रक्त कुछ नहीं हैं। आप एक देवमूर्ति हैं। विचारें तो आपको मालूम होगा कि आप शरीर नहीं हैं, किंतु स्वयं विचार हैं। स्वयं शक्ति हैं। आप वैसे ही हैं, जैसा आप वस्तुतः विचार करते हैं। यदि आप अपने आप को शरीर समझते हैं, तो शरीर मात्र हैं। यदि आप अपने आप को महान आत्मा, सर्वशक्तिमान आत्मा समझते हैं, तो वास्तव में सर्वशक्तिमान, सर्वगुणसंपन्न योद्धा हैं। आप दिव्य मूर्ति हैं। अपने संकल्प से आप जो चाहें बन सकते हैं।
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