गुरुवार, 27 जून 2024

विवाह के समय जन्मकुंडलीमिलाने के पीछे विज्ञान

विवाह किसी भी स्त्री-पुरुष के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण कदम है, अतः इसे उठाते समय हमेंखूब सोच- विचारकर उठाना चाहिए। विवाह से हमारे जीवन की कई महत्त्वपूर्ण बातें जुड़ी हैं; जैसे स्त्री-पुरुष का प्यार, यौन- संबंध, बच्चे, जीवन के अन्य सुख, समाज में स्थान और जीवन में प्रगति व उन्नति । विवाह के बाद ही मनुष्य पूर्ण होता है, क्योंकि पुरुष को स्त्री और स्त्री को पुरुष मिलता है। इस प्रकार से वे दोनों एक-दूसरे के पूरक बनते हैं। जन्मकुंडली मिलाने से यह पता चलता है कि दोनों के मिलने से क्या उन दोनों के संबंध विवाह के बाद ठीक रहेंगे या नहीं। हमारे शास्त्रों में मनुष्य के स्वभाव को तीन प्रकार का बताया गया है; जैसे देवता - स्वभाव, राक्षस- स्वभाव और मनुष्य-स्वभाव । जन्मकुंडली में इसे 'गण' कहते हैं। देवता-स्वभाववाले व्यक्ति का विवाह यदि राक्षस- स्वभाववाली स्त्री के साथ होगा तो संभावना यही है कि वे दोनों सारी जिंदगी लड़ाई-झगड़े, मन-मुटाव और कलह में बताएँगे। स्त्री-पुरुष एक जैसे स्वभाव के होंगे तो जीवन ठीक-ठाक चलेगा। यदि दोनों में से एक देवता - स्वभाव तथा दूसरा मनुष्य स्वभाववाला है तो ठीक-ठाक ही होगा, पर यदि मनुष्य स्वभाववाली स्त्री का विवाह किसी राक्षस-स्वभाववाले व्यक्ति से हुआ तो वह पुरुष सारी उम्र उस स्त्री पर रोब ही जमाता रहेगा और उसे व्यक्तिगत रूप से प्रगति नहीं करने देगा | आजकल अधिक विवाह विच्छेद होने का यह एक बड़ा कारण है।इसी तरह जन्मकुंडली मिलाने से स्त्री-पुरुष के यौन संबंध का भी पता चलता है; वे दोनों एक-दूसरे को पूर्ण यौन-सुख दे पाएँगे या नहीं? उन दोनों के मिलन से बच्चे समय पर होंगे या नहीं? बच्चों में कोई शारीरिक कमजोरी तो नहीं होगी? ये सब बातें एक अच्छा व सच्चा ज्योतिषाचार्य ही बता सकता है, पैसे लेकर जन्मकुंडली मिलानेवाले ज्योतिषी नहीं ।

प्रायः देखा गया है कि प्रेम-विवाह में विवाह से पूर्व स्त्री-पुरुष के संबंध ठीक-ठाक ही होते हैं, पर विवाह के बाद कई बार संबंध कटु होते देखे गए हैं, क्योंकि प्रकृति के नियमों के अनुसार वे दोनों अच्छे मित्र तो रह सकते हैं, पर पति-पत्नी के रूप में उनका संबंध ग्रहों के अनुसार अनुकूल नहीं होता, इसलिए विवाह के बाद समस्याएँ पैदा हो जाती हैं।

एक और महत्त्वपूर्ण जानकारी, जो जन्मकुंडली के मिलाने से मालूम पड़ती है, वह है विवाह सूत्र की आयु । फलित ग्रंथों द्वारा पत्नी - नाशक या पति- नाशक योग का पता लगाया जा सकता है। इसलिए जन्मपत्री मिलाते समय वैधव्य योग देखना बहुत आवश्यक है। ऐसे विवाह का क्या लाभ जो कुछ ही समय में जीवनसाथी का जीवन ही छीन ले ।

एक सफल वैवाहिक जीवन के लिए पति-पत्नी के मानसिक स्तर में अंतर केवल ५ प्रतिशत ही होना चाहिए, इससे अधिक नहीं। ये सभी बातें जन्मपत्री मिलाते समय देखी जाती हैं।

इस तरह कई कारणों से विवाह के समय जन्मपत्री मिलाना एक समझदारी की बात है । पर शर्त यह है कि दोनों की जन्मपत्रियाँ ठीक-ठाक बनी हों और उनके बनानेवाले पंडित भी ज्ञानी रहे हों, वरना उस पर लिखी बातों का

कोई अर्थ नहीं रह जाता । पर आजकल इन सब बातों पर लोग ध्यान नहीं देते। परिणाम हमारे सामने टूटते घरों की बढ़ती संख्या के रूप में है।

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