मंगलवार, 9 जुलाई 2024

प्रभात किरण (39)किसी को प्रशंसा देने से हमें भी प्रशंसा मिलती है और....

किसी को प्रशंसा देने से  हमें भी प्रशंसा मिलती है और घृणा, क्रोध, तिरस्कार, कुआलोचना करने से ये ही सब हमें भी प्राप्त होते हैं ।गुणग्राहक बनिए, दूसरों में जो उत्तम बातें हैं उन्हें प्रकट में लाने के लिए आप अवसर खोजते रहिए । तनिक सी गुणग्राहकता से दूसरा व्यक्ति एकदम आपकी ओर आकर्षित हो जाता है । यह एक मनोवैज्ञानिक नियम है कि जब दूसरा देखता है कि आप उसमें दिलचस्पी ले रहे हैं, उसकी महत्ता स्वीकार कर रहे हैं, गुणों की तारीफ कर रहे हैं, तो वह अनायास ही आपसे प्रभावित हो जाता है। संभव है कि कोई किसी समय हतोत्साहित हो रहा हो और आपकी गुणग्राहकता से उसका टूटता साहस पुनः जाग्रत हो जाए। जब हम लोगों का गुणग्राहक दृष्टि से निरीक्षण करने लगते हैं तो हर प्राणी में कितनी ही अच्छाइयाँ दीख पड़ती हैं।




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