आपका जीवन निराशाजनक नहीं है, क्योंकि ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो आपके जीवन को जीने लायक बनाती हैं। मुख्य बात यह है कि आप किस पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं? आधे खाली गिलास पर या आधे भरे गिलास पर ? विचार एक दोधारी तलवार की तरह होते हैं। वे रचनात्मक प्रकिया की बुनियाद भी होते हैं और साथ ही नकारात्मक, यहाँ तक की विनाशकारी मानसिकता के आधार भी । यही मस्तिष्क लियोनार्दो दा विंची की अमर कल्पनाशीलता और अल्बर्ट आइंस्टीन की गणितीय प्रतिभा को जन्म देता है तो अडोल्फ हिटलर के पागलपन को भी। एक अनुमान के मुताबिक औसतन 60,000 विचार प्रतिदिन हमारे दिमाग से गुजरते हैं। दु:खद बात यह है कि हममें से अधिकतर का अपने विचारों पर कोई नियंत्रण नहीं होता। विचार की सबसे अच्छी विशेषताओं में से एक यह है कि वह पारे की तरह होता है; आप भी उसे पकड़ नहीं सकते! यह काफी स्पष्ट है कि हमें अपने विचारों पर कुछ नियंत्रण क्यों होना चाहिए; अन्यथा हम उन के दास बन जाते हैं। विचार किस प्रकार से हमारी किस्मत को आकार देते हैं, इस की सबसे तार्किक व्याख्या 14वें दलाई लामा के शब्दों में कही जा सकती है। वह कहते हैं—
1.अपने विचारों पर ध्यान दें, क्योंकि वे शब्द बनते हैं।
2.अपने शब्दों पर ध्यान दें, क्योंकि वे कार्य बन जाएँगे।
3.अपने कार्यों पर ध्यान दें, क्योंकि वे आदत बन जाएँगे।
4.अपनी आदतों पर ध्यान दें, क्योंकि वे आपका चरित्र बनाएँगे।
5.अपने चरित्र पर ध्यान दें, क्योंकि वह आपकी किस्मत बनाएगा...और आपकी किस्मत ही आपका जीवन होगी !
हमारे समय के एक महान् आध्यात्मिक गुरु के इस सरल, प्रभावशाली सत्य को पढने और ग्रहण करने के बाद इस विषय पर कहने के लिए और कुछ नहीं रह जाता।
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