सोमवार, 29 जुलाई 2024

प्रभात रश्मि (7)अपनी कद्र करें

एक कहावत है कि चीजें जितनी बदलती हैं, उतनी ही अपरिवर्तित रहती हैं। यह सिद्धांत विशेष रूप से मानवीय गुणों और समस्याओं पर लागू होता है। यदि आपको लगता है कि आप भ्रष्टाचार का चरम देख रहे हैं, तो एक बार फिर सोचें। चाँदी के 30 टुकड़ों के लिए यीशु को बेच दिया गया था। स्वच्छंदता और व्यभिचार रोमन काल में चरम पर था। और महाभारत की जड़ में लालच था। हमारी समस्याएँ भी पुरातन हैं : बेवफा जीवनसाथी, उग्र पुत्र, निरंकुश स्वामी, विवेकहीन राजनेता, लालची व्यापारी आदि। यदि आप आत्मनिरीक्षण करें, तो ब्रूट्स और उसके दल द्वारा जूलियस सीजर की हत्या के समय से स्थिति बहुत अधिक नहीं बदली है। परंतु कुछ चीजें बदली हैं, जो इंटरनेट और फेसबुक के इस युग में प्रत्याशित था और हमें घेरनेवाली नई समस्याओं में नई पीढ़ी में एक कमी काफी व्याप्त देखी जा सकती है : आत्मविश्वास की कमी।

यह हमारे समय का एक लक्षण है। हमारे  बचपन के समय ऐसी भावनाओं का खास अस्तित्व नहीं था। एक छोटे शहर में, हर कोई हर किसी को जानता था और अपना सही महत्व पहचानता था। कोई भी अपनी असली पहचान से ऊँचा होने का दिखावा नहीं कर सकता था। हर कोई आपके वेतन और बैंक बैलेंस के बारे में जानता था, इसलिए असलियत से अधिक अमीर होने का दिखावा करने की कोशिश का तनाव नहीं होता था।

आत्मविश्वास में कमी शहरों में अधिक देखी जाती है, जहाँ अधिकतर लोग बिना जड़, बिना चेहरेवाले प्रवासी होते हैं; जो हर समय अपने पड़ोसियों से अधिक समृद्ध और खानदानी होने का दिखावा करते रहते हैं। प्रतिस्पर्धा का दबाव इतना अधिक होता है, और पैसे कमाने की ललक इतनी अधिक होती है, कि लोग यह दिखावा करते दशकों बिता देते हैं कि वे आर्थिक रूप से अधिक संपन्न हैं, बेहतर नौकरियों में हैं और बेहतर शिक्षित हैं, जबकि असलियत कुछ और होती है। वे अंत तक नहीं जानते कि वे हैं कौन।

हालाँकि कुछ विवेकशील लोग इस खेल से ऊब जाते हैं और अपने आप में भरोसा खो बैठते हैं। उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है। और वे वास्तव में इस चूहा दौड़ में अधिक ईमानदार होते हैं, वे यह दौड़ छोड़ चुके होते हैं, क्योंकि वे रैट पैक के इस धोखे के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते।

वे मार्केटिंग रणनीतियों के प्रचार और शोर-शराबे से तालमेल बिठाना मुश्किल पाते हैं, जो आजकल अपने आप को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है, चाहे आप एक उदीयमान कॉपीराइटर हों, संघर्षरत अभिनेता, उभरते लेखक या कॉरपोरेट एक्जीक्यूटिव । इस युग में पैकेजिंग पैकेज से भी अधिक महत्वपूर्ण है।

ऐसे लोगों को यही सलाह है कि शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप में अपने आप से प्यार करें और कभी यह न सोचें कि अगला व्यक्ति उनसे बेहतर है। सत्य तो यह है कि कोई श्रेष्ठ नहीं है; हम सभी किसी-न-किसी रूप में सक्षम हैं। आपका आत्मसत्मान आपके दिमाग में है। यह विश्वास रखें कि आप अपने क्षेत्र में बेहतरीन हैं और अपनी प्रतिभा को लेकर आत्मविश्वास से पूर्ण रहें।

शुरुआत करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप उन बीस गुणों की सूची बनाएँ, जिनमें आप बेहतरीन हैं। हर किसी में बहुत सी विशेषताएँ होती हैं; बस गहराई में जाने की जरूरत है। यदि आप अपने आप में ये सकारात्मक गुण पाते हैं, तो क्या आपके विजेता होने में संदेह रह जाता है?

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