बुधवार, 17 जुलाई 2024

खुशी की तलाश

याद रखिए, उदासी और दुःख कोई ऐसी चीज नहीं है, जिससे घृणा या भय किया जाए; वे मनुष्य की प्रकृति को समृद्ध बनाते हैं। वे हमें साहस प्रदान करते हैं और जीवन को जीने लायक बनाते हैं ।

हर कोई खुशी चाहता है और अधिकतर लोग धन नहीं, बल्कि खुशी की तलाश करते हैं। फिर भी, विशुद्ध, संपूर्ण प्रसन्नता, जहाँ पर अप्रसन्नता लेशमात्र न हो, का अस्तित्व ही नहीं है। यह बात एक प्रकार से विरोधाभास लगती है, परंतु ऐसा नहीं है। प्रत्यक्ष रूप से, बहुत से लोग कहेंगे कि यदि खुशी का अस्तित्व ही नहीं है, तो उसकी तलाश करने का क्या मतलब है?

परंतु, धैर्य रखिए तभी आप इस विरोधाभास को समझ पाएँगे।

 एक इटालियन लोककथा है 'द हैप्पी मैंस शर्ट'  जिसे आपने भिन्न भिन्न नामों से पढ़ा होगा। इसके अनुसार राजा गिफार्ड एक शांतिपूर्ण और शक्तिशाली राज्य पर शासन करते थे। उनकी प्रजा उन्हें पूजती थी और पूरी तरह उन पर विश्वास करती थी। उनका साम्राज्य बहुत सुखी था।

राजा का एक युवा पुत्र राजकुमार जोनाश था । बुद्धिमान, प्रतिभाशाली और खूबसूरत युवक जोनाश कुछ दिनों से गहरी अप्रसन्नता की स्थिति में था। काफी प्रयासों के बाद भी राजा समझ नहीं पा रहा था कि उसका पुत्र हर समय इतना दु:खी क्यों रहता है। राजकुमार अकसर अपने कमरे की खिड़की के पास बैठकर शून्य दृष्टि से खिड़की से बाहर देखता रहता, उसे अपने आसपास घट रही घटनाओं में कोई दिलचस्पी नहीं थी। भव्य समारोहों और शाही उत्सवों में भी वह अप्रभावित सा रहता।

राजा गिफार्ड बहुत दिनों तक यह सहन नहीं कर पाए और उन्होंने अपने पुत्र से यह पूछने का निर्णय किया कि कौन सी बात उसे परेशान कर रही है। 'जोनाश, कौन सी बात तुम्हें इतना खाए जा रही है ? तुम्हारे पास किस चीज की कमी है ? कौन सी चीज तुमको इतना परेशान कर रही है? कुछ समय से तुम खुश नहीं हो। मुझे बताओ, मैं तुम्हारी मदद करने की कोशिश करूँगा।'युवा राजकुमार ने बस कंधे उचका दिए।

'क्या किसी सुंदरी ने तुमको सम्मोहित कर लिया है? महल में भटकने की बजाय उसके लिए अपना प्रेम प्रदर्शित करने के इससे बेहतर तरीके हैं। '

'नहीं पिताजी, यह लड़की की बात नहीं है। सच में मैं नहीं जानता कि मैं इतना दुःखी क्यों हूँ। मैं किसी चीज में खुशी नहीं महसूस करता। मैं खुश रहना चाहता हूँ, लेकिन नहीं जानता कि ऐसा कैसे करूँ।'

राजा को यह बात समझ नहीं आई, परंतु उसे यकीन था कि यदि राजकुमार ऐसे ही दुःखी रहा, तो वह जीवित नहीं रह पाएगा। राजा ने महसूस किया कि अब राजकुमार जोनाश को चिकित्सा की जरूरत है। उसने अपने बेहतरीन चिकित्सकों, ज्योतिषियों और विद्वानों के लिए एक फरमान जारी किया कि वे बैठकर यह तय करें कि इस स्थिति में क्या किया जाना चाहिए ।

लगातार तीन दिनों के विचार-विमर्श के बाद ज्योतिषियों ने आखिरकार एक हल निकाला।

मुख्य ज्योतिषी जांकलो ने कहा, 'महाराज, हमने इस मुद्दे पर काफी विचार किया है। अपने राजकुमार की सहायता करने के लिए, हमें एक ऐसा व्यक्ति खोजना होगा जो पूरी तरह सुखी हो; ऐसा व्यक्ति जो अपने जीवन से पूरी तरह संतुष्ट हो।'

राजा थोड़ा चौंके, 'मुझे एक संतुष्ट और सुखी व्यक्ति ढूँढना होगा ! '

'हाँ महाराज, और जब आप उस सुखी व्यक्ति को ढूँढ़ लें, आपको उसकी कमीज अपने बेटे के लिए खरीदनी होगी। इसके बाद सब ठीक हो जाएगा।'

राजा ने इस पर विचार किया और अंतत: इसके लिए तैयार हो गया। उसने पूरे राज्य में इश्तिहार लगवा दिए कि जो भी एक पूर्णत: सुखी व्यक्ति के बारे में बताएगा, उसे बड़ा ईनाम मिलेगा। उसने घोषणा की और अपने संदेशवाहकों को दूर-दूर तक ऐसे व्यक्ति की तलाश में भेजा जिसकी कमीज उसके पुत्र को फिर से जीवंत बना सके। जल्दी ही लोगों ने राजा से मिलने के लिए भीड़ लगाना शुरू कर दिया।

राजा के सामने पेश किया जानेवाला पहला व्यक्ति एक पुजारी था।

'क्या आप सुखी हैं?' पुजारी के लिए राजा का प्रश्न सरल और प्रासंगिक था।

'हाँ महाराज, मैं बहुत सुखी हूँ।'

'ठीक है, तो आप क्या शाही पुजारी बनना चाहेंगे?' राजा ने पूछा। यह सुनकर पुजारी का चेहरा चमक उठा।

'बिलकुल महाराज, आपकी सेवा करने से अधिक प्रसन्नता की बात कुछ नहीं हो सकती।'

राजा को क्रोध आ गया, वह गुस्से में चिल्लाया, 'इससे पहले कि मैं तुम्हें जेल में डलवा दूँ, निकल जाओ मेरे महल से! तुम झूठे हो। तुम पूरी तरह संतुष्ट या सुखी नहीं हो। तुममें और अधिक की इच्छा शेष है। मेरे किले से निकल जाओ!'

यह तलाश जारी रही, किंतु ऐसा कोई नहीं मिला। दो सप्ताह बाद, एक पड़ोसी राजा के बारे सूचना मिली जिसे असाधारण रूप से सुखी व्यक्ति माना जाता था। उसकी एक खूबसूरत पत्नी और कई बच्चे थे। उसका कोई शत्रु नहीं था और उसका राज्य शांतिपूर्ण और शक्तिशाली था। राजा ने यह सोचकर कि शायद अब उसकी प्रार्थनाओं का फल मिले, अपना दूत उसके पास भेजा।

'उस राजा ने दूत को बताया कि 'यह सच है कि मेरे पास वह सबकुछ है, जो मैं इच्छा कर सकता हूँ। मेरी एकमात्र चिंता यह है कि मैं जल्दी ही मृत्यु को प्राप्त हो जाऊँगा और यह सब खो दूँगा। यह बात मुझे इतनी चिंतित करती है कि यह मुझे रातों को जगाए रखती है।' यह सुनते ही दूत को लग गया कि इस राजा की कमीज ले जाने का कोई लाभ नहीं है। दूतसे उस राजा का सज जान राजा गिफार्ड बहुत निराश और परेशान हुआ। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करे? उसका पुत्र दुःख की प्रतिमूर्ति था और राजा उसके लिए कुछ नहीं कर सकता था, जब तक कि उसे वह कमीज नहीं मिलती।

अपना दिमाग शांत करने के लिए, राजा ने शिकार पर जाने का फैसला किया। मैदान में, उसने कुछ मीटर दूर एक खरगोश पर तीर चलाया। तीर चौंके हुए खरगोश को केवल स्पर्श करके निकल गया और वह जंगल में भाग गया। खरगोश का पीछा करते-करते राजा अपने शिकार दल से अलग भटक गया। कुछ मिनटों बाद उसने खरगोश का पीछा करने का इरादा छोड़ दिया और अन्य लोगों के पास लौटने का फैसला किया, लेकिन रास्ते में किसी चीज ने उसे रोक लिया। उसकी बाईं ओर से एक अजीब सी आवाज आ रही थी। जब वह आवाज के पास पहुँचा, तो राजा को पता चला कि कोई सीटी बजा रहा था। उसके सामने सरकंडों के बीच एक खूबसूरत युवक लेटा हुआ था। वह युवक पीठ के बल लेटा हुआ आसमान में तैरते बादलों को निहार रहा था।

'हे युवक! सुनो! क्या तुम देश के राजा के व्यक्तिगत सलाहकार के पद पर नियुक्त होना चाहोगे?' राजा ने पूछा।

'मैं? सलाहकार?' युवक उठ बैठा और अपनी ठुड्डी खुजाने लगा, 'वह तो बहुत परेशानीवाला पद है। मेरी उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं जैसा हूँ, अच्छा हूँ।'

राजा का चेहरा खुशी से चमकने लगा। उसने स्वीकारा, ' ईश्वर का शुक्र है कि आखिरकार एक पूरी तरह खुश व्यक्ति मिल गया। आओ युवक!' राजा उस युवक को अपने सेवकों के पास ले गया, 'मेरा पुत्र अब बच जाएगा! अब भी मेरे बेटे के लिए उम्मीद बची है!' वह युवक की ओर मुड़ा और गर्मजोशी से कहा, 'तुम मुझसे कुछ भी माँग सकते हो, युवक। परंतु मुझे भी तुमसे कुछ चाहिए।' युवक ने विचित्र निगाहों से राजा की ओर देखा, 'आपको मुझसे जो भी चाहिए, आप ले लीजिए, महाराज।'

'मेरा पुत्र, राजकुमार जोनाश, मर रहा है और सिर्फ तुम ही उसे बचा सकते हो। यदि मैं तुम्हारी कमीज उसे पहना दूँ, तो वह बच जाएगा। यहाँ आओ।'

राजा ने मुसकराते हुए युवक के कंधे थपथपाए और उसकी कमीज के बटन खोलने के लिए हाथ आगे बढ़ाए, फिर अचानक रुक गया। उसके हाथ नीचे आ गए। सुखी व्यक्ति ने कमीज ही नहीं पहनी हुई थी।

तो, इस कहानी का संदेश यह है कि राजा को एहसास हो गया कि असली खुशी किसी और से खरीदी नहीं जा सकती। अपने सामने खड़े युवक को, जिसका जीवन उसके पुत्र के जीवन से बहुत अलग था, देखते हुए राजा ने महसूस किया कि असली संतोष और खुशी अंदर से आती है और उसका इससे कोई लेना-देना नहीं है कि हमारे पास कितना धन है।

अंत में उसे पता चल गया कि वह अपने पुत्र को कैसे ठीक कर सकता है।

हमारा जीवन भी ऐसा ही होना चाहिए। हमें समझना चाहिए कि खुशी अपने जीवन में हर सुख-सुविधा का होना नहीं है, बल्कि हमारे पास जो है, उसमें खुश रहना है। हम पहले चर्चा कर चुके हैं कि भौतिक संपन्नता में खुशी शामिल नहीं है, बल्कि यह तर्क उससे परे है। मैं यहाँ पर इस बात पर बल देना चाहता हूँ कि एक सुखी व्यक्ति वह है जो दुःख में भी सुखी रहे। यह एक गलत धारणा है कि सुख का अर्थ दुःख का न होना है। मैं मानता हूँ कि जीवन आपको जो भी देता है, आपको उसका अधिकतम लाभ उठाना चाहिए। जब आप दुःख को भी उसी तरह अपनाएँगे, जिस तरह सुख को, तभी आप उन दोनों से ऊपर उठ सकते हैं।

याद रखिए, उदासी और दुःख कोई ऐसी चीज नहीं है, जिससे घृणा या भय किया जाए; वे मनुष्य की प्रकृति को समृद्ध बनाते हैं। वे हमें साहस प्रदान करते हैं और जीवन को जीने लायक बनाते हैं। 

यहाँ राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के यादगार विदाई भाषण से उद्धरण को जानना उचित होगा , जिन्हें वाटरगेट स्कैंडल के कारण दुनिया के सबसे शक्तिशाली पद से हटने पर (अगस्त 1974 में) मजबूर होना पड़ा था। जब वह विपरीत परिस्थितियों में ह्वाईट हाउस छोड़ रहे थे, तोउन्होंने राष्ट्रीय टेलीविजन पर कहाथा : 'जब आप बहुत गहरी खाई में रह चुके होते हैं, तभी आप समझ सकते हैं कि सबसे ऊँची चोटी पर होना कितना शानदार होता है।'

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