शुक्रवार, 26 जुलाई 2024

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाते हैं

आषाढ मास में जो पूर्णिमा आती है, उसे गुरु पूर्णिमा कहते हैं । पूर्णिमा यों तो हर मास ही आती है, पर आषाढ मास की पूर्णिमा के दिन आकाश में ग्रहों की जो स्थिति बनती है, उस समय बृहस्पति यानी गुरु ग्रह (Jupitor) के तत्त्व दूसरी अन्य पूर्णिमाओं की अपेक्षा सबसे अधिक विद्यमान होते हैं । इस कारण इस दिन गुरु का आशीर्वाद तथा कृपा हमें कई गुना अधिक प्राप्त हो सकती है । अतः इस अवसर पर शिष्य गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करके उनके आशीर्वाद को अधिक-से-अधिक मात्रा में प्राप्त कर सकते हैं । यही है इसका विज्ञान ।

यहाँ 'गुरु' का अर्थ विद्या पढ़ानेवाले स्कूल या कॉलेज के प्राध्यापक से नहीं है, क्योंकि वे तो केवल शिक्षक हैं, शुद्ध रूप से 'गुरु' नहीं । गुरु का अर्थ उस आध्यात्मिक व्यक्ति विशेष से है जो ब्रह्म को जानता है और हमारी आध्यात्मिक उन्नति करा सकता है। इसलिए केवल भगवा वस्त्र पहननेवालों को या लंबी दाढ़ी रखनेवालों को गुरु की संज्ञा नहीं दे सकते, उन्हें हम केवल आध्यात्मिक बातें करनेवाले बुद्धिजीवी तो कह सकते हैं, पर 'गुरु' नहीं । भारतीय दर्शन के अनुसार, सच तो यह है कि 'गुरु' को ढूँढ़ा नहीं जाता, अपितु जब आप शिष्य बनने योग्य हो जाएँगे और अध्यात्म की यात्रा के लिए तैयार होंगे, तब गुरु आपको ढूँढ़ता हुआ स्वयं आपने पास आ जाएगा। ऐसा होने के लिए कई जन्मों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

गुरु ढूँढ़ने से नहीं मिलते, कारण गुरुतत्त्व सूक्ष्मतम है । अध्यात्म में शिष्य गुरु को धारण नहीं करता, अपितु गुरु ही शिष्य को चुनते हैं, आगे का मार्ग बताते हैं । भविष्य में कौन उनका शिष्य होगा, यह एक सच्चे गुरु को पहले से ही ज्ञात होता है । गुरुकृपा बिना गुरुप्राप्ति नहीं होती है । एक आश्चर्य की बात यह है कि आज तीन युगों की तुलना में कलयुग में गुरुप्राप्ति व गुरुकृपा प्राप्त करना कठिन नही है। बस आप में इस प्राप्ति के लिए सच्ची लगन होनी चाहिए। गुरु एक दिन आपके उद्धार के लिए आपके द्वार पर होंगे

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

समाचार का व्रत रखिए

आजकल नकारात्मक समाचार ज्यादा बिकते हैं। हमारे समाज में ज्यादातर लोग एक प्रसिद्ध इन्सान के जुर्म का मुकदमा देखना किसी वास्तव में ...